
कुछ लोगों को फिक्स्ड डिपॉज़िट सुरक्षित लगता था तो सारा धन उसमें ही डाल दिया, तो वहीं कुछ महिलाएं ऐसी भी थीं, जिन्होंने अपने धन को बैंक में ही सुरक्षित रखने को सही समझा। निवेश को लेकर अपनी पसंद से विकल्प के चयन में कुछ भी गलत नहीं था, बस एक समस्या थी कि उन्होंने केवल एक स्थान पर निवेश किया था। इसे किचेन के उदाहरण से समझना आसान होगा। कोई एक मसाला कितना ही अच्छा क्यों न हो, आप हर व्यंजन उससे तैयार नहीं कर सकतीं। स्वादिष्ट भोजन में संतुलन जरूरी है। नमक, चीनी इत्यादि सबका अपना महत्व है। कोई एक चीज ज्यादा हो गई तो खाने का स्वाद खराब हो जाएगा, यदि कुछ कम हो गया तो भी वो स्वाद नहीं आएगा।

धन भी कुछ इसी प्रकार काम करता है। आर्थिकी में विभिन्न तत्वों की आवश्यकता होती है। जीवन का प्रत्येक लक्ष्य अलग वित्तीय कार्ययोजना की अपेक्षा रखता है। किसी एक ही परिसंपत्ति की खरीद पर भरोसा करना, हर खाने को एक ही मसाले से पकाने जैसा है। यहां आपको विविधता लाने की आवश्यकता है। इससे आशय है कि अपने धन को विभिन्न प्रकार की परिसंपत्तियों में निवेश करें ताकि आपकी आर्थिक समृद्धि किसी एक आय पर निर्भर न रहे। इसमें चतुराई जैसा भी कुछ नहीं है। बात बस इतनी सी है कि इस प्रकार आप भावी परिस्थितियों के लिए स्वयं को तैयार करते हैं। फिक्स्ड डिपॉज़िट या अन्य फिक्स्ड आय विकल्पों के बारे में सोचें। वे आपको ज्यादा उत्साहित नहीं करते, लेकिन स्थिरता प्रदान करते हैं। वे आपको एक अनुमानित रिटर्न देते हैं और बाजार के उतार-चढ़ावों से सुरक्षित रखते हैं। यह स्थिरता मानसिक शांति के लिए महत्व रखती है, खासकर तब भी जब आपको निकट भविष्य में धन की आवश्यकता पड़ने वाली हो।
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फिर आता है सोने में निवेश। भारतीय महिलाओं को इसमें निवेश हमेशा से प्रिय रहा है। मुद्रास्फीति बढ़ने, मुद्रा कमजोर होने पर जब पूरी दुनिया में आर्थिक संकट गहराया तो सोने की मजबूती कायम रही। जब अन्य परिसंपत्तियों के मूल्य में गिरावट आती है तो आपके पोर्टफोलियो में सोने में निवेश वो झटका सहने में मदद करता है। हालांकि सोने में निवेश से तेजी से संपत्ति नहीं बनती, पर ये जरूर है कि दीर्घकाल में ये आर्थिक सुरक्षा देता है। शेयर्स और म्यूचुअल फंड्स में अल्प अवधि के लिए निवेश जोखिमभरा हो सकता है, लेकिन दीर्घकाल में ये बड़ा लाभ दे सकते हैं। लंबे समय में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश से बड़ा लाभ कमा सकते हैं। इसके माध्यम से आप देश के विकास में भी सहभागी बनते हैं, पर इसके लिए समय और धैर्य की आवश्यकता होती है।

ये सभी परिसंपत्तियां अलग काल अवधि में अलग परिणाम देती हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो फिक्स्ड डिपॉज़िट का आकर्षण बढ़ जाता है। जब अनिश्चितता का माहौल हो तो सोने से सुरक्षा मिलती है। जब विकास दर में बढ़त हो तो इक्विटी फंड्स में लाभ मिलता है। कोई भी परिसंपत्ति हर दौर में बेहतरीन परिणाम नहीं देती। निवेश में विविधता से आप बिना डरे हर परिस्थिति का सामना कर सकती हैं। ये भी ध्यान रखना चाहिए कि हमेशा चीजों को बढ़ाते रहने में समझदारी नहीं है। निवेश में विविधता का आशय समझे बिना बस उन्हें जोड़ते जाने से असमंजस की स्थिति निर्मित होगी। उनके प्रदर्शन पर नजर रखना भी कठिन होगा। निवेश में विविधता के साथ जटिलता नहीं, बल्कि उन्हें लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। किन परिसंपत्तियों में निवेश करना उचित होगा, ये आपके लक्ष्य से जुड़ा मामला होना चाहिए। जिस धन की आपको कुछ अवधि में आवश्यकता पड़ सकती है, उसे जोखिम वाले दीर्घकालिक विकल्पों में डालना सही नहीं होगा। दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए जो धन है, उसे यूं ही रखे रहना भी उचित नहीं होगा। यहां परिसंपत्तियों में विविधता लाने से आपके लक्ष्यों व निवेश के मध्य सेतु बनता है।
यह भी सदैव स्मरण रखें कि ये निर्णय नितांत व्यक्तिगत पहलुओं से जुड़ा होता है, जो परिसंपत्ति या निवेश किसी महिला के लिए लाभकारी है, ये जरूरी नहीं कि अन्य के लिए भी उसी प्रकार लाभकारी हो। आपकी आय में स्थिरता, उत्तरदायित्वों, उम्र और जोखिम लेने की क्षमता पर काफी कुछ निर्भर करता है। दूसरों की नकल करने की बजाय अपनी जरूरतों को समझकर निर्णय लें। एक प्रश्न स्वयं से करें कि क्या एक परिसंपत्ति में गिरावट आने पर भी मेरी आर्थिक स्थिति में स्थिरता बनी रहेगी। यदि इसका उत्तर हां में है तो आप सही मार्ग पर हैं।
इस हफ्ते इस पर ध्यान दें कि आपने धन को कहां लगाया है। क्या वह किसी एक जगह पर केंद्रित है? यदि हां तो ऐसा क्यों है? क्या आदतन, भय, सहजता या जानकारी के अभाव के कारण आपने वह निर्णय लिया है। आपको स्वयं को सही या गलत नहीं ठहराना है, बल्कि जागरूक होना है। विविधता लाने का अर्थ सब जगह विस्तार लेना नहीं है बल्कि निवेश में सही संतुलन बिठाना है। जिस तरह एक किचेन में सभी मसालों की उपलब्धता होने पर आप कोई भी व्यंजन तैयार कर सकती हैं वैसे ही विविधतापूर्ण पोर्टफोलियो से जीवन के विभिन्न पड़ावों पर हर परिस्थिति का सामना कर सकती हैं।
अगले हफ्ते हम बात करेंगे कि किस आधार पर निवेश के लिए परिसंपत्तियों का चयन करें। कितनी राशि का निवेश कहां करना उचित होगा।
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