
एक मित्र ने अपनी कहानी साझा की, जिसे मैं कभी भूल नहीं पाई। उसके पति ही परिवार का वित्तीय प्रबंधन करते थे। उन्होंने कई साल पहले डीमैट अकाउंट खोला और कुछ अच्छे म्यूचुअल फंड्स व फिक्स्ड डिपॉजिट्स में निवेश किया। उनका निवेश पोर्टफोलियो अच्छा था, पर पति की अप्रत्याशित बीमारी ने ऐसी परिस्थितियां निर्मित कर दीं कि पत्नी पर वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी आ गई। अस्पताल में जब वह थी तो उसे एहसास हुआ कि उसके पास तो किसी निवेश का कोई स्टेटमेंट नहीं था। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर भी कई साल पहले बदला जा चुका था। म्यूचुअल फंड्स फोलियो भी कई प्लेटफॉर्म पर बिखरे थे। उसे ये भी नहीं पता था कि किस ईमेल आईडी पर कन्फर्मेशन आएगा। निवेश तो किया गया था पर उस तक पहुंच नहीं थी। ऐसे मामले अक्सर दिख जाते हैं। हम निवेश विकल्पों का चयन बड़े ध्यान से करते हैं फंड्स की तुलना करते हैं, एसआईपी समय पर जाए, इसकी व्यवस्था करते हैं। यह सुनिश्चित करते हैं कि एसआईपी समय पर जाती रहे प्रतिफल को देखते हैं, लेकिन अपने निवेशों की समीक्षा करना भूल जाते हैं। जब अप्रत्याशित परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो धन की निकासी के लिए कागजी कार्यवाई महत्व रखती है। यदि उसमें कहीं कोई कमी है तो फिर समस्या है।

वित्तीय पहचान सुनिश्चित करना कोई जटिल प्रक्रिया नहीं है। बस जरूरी दस्तावेजों में सभी विवरण भरना अनिवार्य होता है। आप किसी को नामित भी कर सकती हैं जो आपके स्थान पर निवेश का संचालन कर सके। इसके लिए आपको पैन, केवाईसी, खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर व ईमेल अपडेट करना आवश्यक होता है। प्रत्येक खाते में एक नॉमिनी भी दर्ज किया जाना चाहिए। उसका विवरण भी सही दर्ज होना चाहिए। साझा स्वामित्व को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। निवेश कहां-कहां किया गया है, उसका भी विवरण किसी एक स्थान पर होना चाहिए। निवेश के कागजात कहां रखे हैं, लॉगिन आईडी व पासवर्ड भी जानना अहम है।
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तकनीकी तौर पर ये छोटी बातें नहीं हैं। धन की सुगम व तत्काल निकासी उपरोक्त बातों पर ही निर्भर करती है।
कुछ व्यावहारिक बातों पर विचार करें। यदि केवाईसी विवरण पूरा नहीं है तो बहुत से प्लेटफार्म ट्रांजैक्शन को रोक देते हैं। रजिस्टर्ड नंबर होना जरूरी है, क्योंकि उस पर वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भेजा जाता है। स्टेटमेंट्स और ट्रांजैक्शन कन्फर्मेशन ईमेल पर जाते हैं। यदि ईमेल पुराना हो गया है तो ये संवाद अधूरा रह जाएगा। नामिनी विवरण होने पर ट्रांजैक्शन की प्रक्रिया पूरी होती है। पुराने डीमैट अकाउंट्स या म्यूचुअल फंड्स का फोलियो स्मृति से हट गया है, तो उसकी जानकारी पुन: प्राप्त करने में समय लग सकता है। यदि कहीं कोई खामी है तो उसे दूर किया जा सकता है, लेकिन उसके लिए संबंधित व्यक्ति को सजग होना पड़ेगा। अक्सर देखा जाता है कि बहुत से परिवारों पर जब कोई मुसीबत पड़ती है तभी महिलाएं वित्तीय जिम्मेदारियां ओढ़ती हैं। मैंने बहुत सी पढ़ी-लिखी महिलाओं को संपर्क विवरण या नामिनी रिकार्ड अपडेट न होने के कारण बाधाओं से जूझते देखा है। यहां व्यक्तिगत नहीं, बल्कि ढांचागत दिक्कतें होती हैं। इस खाई को पाटकर आप वित्तीय सुरक्षा पा सकती हैं।

करीब एक घंटे का समय निकालें। अपने घर से संबंधित प्रत्येक वित्तीय दस्तावेज- बैंक अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट्स रिकरिंग डिपॉजिट्स, म्यूचुअल फंड्स, डीमैट अकाउंट, बीमा पॉलिसी, पब्लिक प्राविडेंट फंड अकाउंट्स, विदेश में निवेश इत्यादि का अध्ययन करें। प्रत्येक में तीन चीजें देखना अहम है- नामिनी कौन है, कौन सा मोबाइल नंबर और ईमेल दर्ज है, सारे दस्तावेज कहां रखे गए हैं। यदि इसमें कोई अस्पष्टता प्रतीत होती है तो तुरंत ही समाधान का प्रयास करें। नामिनी बहुत सोच-विचारकर दर्ज करना चाहिए। नॉमिनी के माध्यम से संस्थाओं से धन की निकासी की प्रक्रिया आसान होती है, लेकिन नॉमिनी का स्वामित्व से सीधा संबंध नहीं होता।
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शादी के बाद, संतान के जन्म के उपरांत नामिनी अपडेट करने पर ध्यान दें। साझा स्वामित्व से भी बहुत सी मुश्किलें हल हो जाती हैं, पर ये सोचा-समझा निर्णय होना चाहिए।
इंश्योरेंस व सेवानिवृत्ति अकाउंट की प्राय: लोग अनदेखी कर देते हैं। जीवन बीमा आश्रितों का चयन परिवार की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए। कार्मिक सेवानिवृत्ति अकाउंट अलग पोर्टल पर चलता है, जहां केवाईसी की अलग जरूरतें होती हैं। उन्हें निजी निवेश से मिलाकर देखना ठीक नहीं है।
आजकल सुविधा के लिए कई डिजिटल प्लेटफार्म व ऐप भी सुलभ हैं। इनका संचालन सुविधाजनक होता है, पर इससे चीजें बंट भी जाती हैं।
इसलिए किसी एक स्थान पर सभी दस्तावेजों व उससे जुड़ी जानकारियां रखने से तस्वीर स्पष्ट रहती है। विभिन्न बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट्स, एसआईपी, पुराने डीमैट अकाउंट इत्यादि से जुड़ी जानकारियां एक स्थान पर रखना उचित होता है। इससे वित्तीय प्रबंधन का तनाव भी दूर होता है।
एक व्यावहारिक अनुशासन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हस्तलिखित नोट लिखें जिसमें खातों के संचालन से जुड़ी जानकारियां हों। यहां नाटकीय योजना बनाने जैसे कुछ नहीं है, ये तो जिम्मेदारी की बात है। किसी एक जगह पर सब विवरण लिखें कि कहां अकाउंट से जुड़ी जानकारी व दस्तावेज रखे गए हैं, कौन नामिनी है, किस तरह खाते तक पहुंच संभव है, मूल दस्तावेज कहां रखे हैं? ऐसा करने से असमंजस दूर होगा। इसे सुरक्षित रखना भी जिम्मेदारी का काम है। किसी विश्वसनीय स्वजन को बताएं कि कहां ये जानकारी सुरक्षित है। उसे साल दर साल अपडेट करते रहें।
धन को लेकर आत्मविश्वास केवल पोर्टफोलियो के आकार से नहीं आता, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी कार्यप्रणाली व संचालन कितना सुगम है। धन जोड़ना महत्वपूर्ण है, पर वह जरूरत के समय सुगमता से उपलब्ध हो सके, ये देखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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