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Ramzan ki Dua: रोज़ा खोलने के बाद तुरंत पढ़ें ये दुआ, मिलेगी अल्लाह की रहमत और बरकत

इफ्तार का वक्त बेहद पाक और रहमतों से भरा होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस समय रोज़ा रखने वालों की दुआएं खासतौर पर कबूल मानी जाती हैं। यह पूरा महीना अल्लाह की नेमत और करम को याद करने का सबसे सुंदर अवसर होता है। इस समय इफ्तार के समय दिल से, पूरे यकीन के साथ और सच्ची नीयत से खुदा से दुआ मांगनी चाहिए। इस समय मांगी गई दुआ इंसान की जिंदगी में बरकत और सुकून ला सकती है।
Editorial
Updated:- 2026-02-18, 14:18 IST

रमजान का पाक महीना इबादत, सब्र और रहमत का समय माना जाता है। इस दौरान रोजा रखने वाले सुबह से शाम तक अल्लाह की रजा के लिए रोज़ा रखते हैं। इस समय जैसे ही सूरज ढलता है, इफ्तार का मुबारक वक्त आ जाता है और रोजा खोला जाता है, जो बरकत वाला पल माना जाता है। इफ्तार के समय दुआ पढ़ना इस्लामिक परंपरा का अहम हिस्सा होता है। यह न सिर्फ इबादत को पूर्ण करने का प्रतीक माना जाता है, बल्कि अल्लाह का शुक्र अदा करने और उसकी रहमत मांगने का खूबसूरत तरीका भी होता है। सच्चे दिल और यकीन के साथ पढ़ी गई दुआ इफ्तार की नेमत को और ज्यादा खास बना देती है। अक़्गार आप भी रमजान में अल्लाह से दुआ मांगना चाहती हैं तो आइए जानते हैं कि रोजा खोलते समय कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए और उनका मतलब क्या होता है।

रोज़ा खोलने के बाद की दुआ क्यों पढ़ी जाती है? (Roza Kholne ke Baad ki Dua)

रोज़ा खोलने के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ का मुस्लिम संप्रदाय में विशेष महत्व होता है। दिनभर रोजा रखकर इंसान सब्र, संयम और अल्लाह की इबादत का एहसास करता है। इफ्तार का पल इस इबादत की पूर्णता का समय होता है। ऐसे में दुआ पढ़ना अल्लाह का शुक्र अदा करने और उसकी रहमत व कबूलियत की उम्मीद जताने का तरीका माना जाता है। यह दुआ रोजा रखने वाले के दिल में कृतज्ञता, विनम्रता और आध्यात्मिक जुड़ाव को और गहरा करती है।

Roza Kholne ke Baad ki Dua

रोज़ा खोलने के बाद की दुआ इन हिंदी (Roza Kholne ke Baad ki Dua in Hindi)

ज़हबज़-ज़माऊ वब्तल्लतिल-ऊरूक़ वसाबतल-अज्रु इंशा-अल्लाह

रोज़ा खोलने के बाद की दुआ इन इंग्लिश (Roza Kholne ke Baad ki Dua in English)

zahabaz zamau wabtallatil urooq wa-sabatal-ajru insha-allah

रोज़ा खोलने के बाद की दुआ इन उर्दू (Roza Kholne ke Baad ki Dua in Urdu)

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ

ramzan ki dua for fasting

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इस दुआ का क्या है मतलब?

प्यास बुझ गई, रगें तर हो गईं और अल्लाह ने चाहा तो सवाब मुक्म्मल हो जाएगा।

यानी इफ्तार के समय इस दुआ को पढ़ने से अल्लाह की रहमत मिलती है और रोज़े का पूरा सवाब मिलता है। इसे पढ़कर पानी या खजूर से रोज़ा खोलना सबसे अच्छा माना जाता है।

मेहमानों के साथ रोज़ा खोलने की दुआ (Roza Kholne ki Dua)

Roza Kholne ki Dua

अगर आप किसी समूह या मेहमानों के साथ इफ्तार कर रहे हैं, तो इस खास दुआ को पढ़ना बहुत फज़ीलत (सवाब) वाला माना जाता है। अगर आप चाहें तो इस दुआ को मुकम्मल पढ़ सकते हैं।

मेहमानों के साथ रोज़ा खोलने की दुआ इन हिंदी

Roza Kholne ki Dua (2)

अफ़्तरा इंदकुम अस-साइमून, व अकल तआमकुम अल-अब्रार, व सल्लत अलैकुम अल-मलायक़ा

मेहमानों के साथ रोज़ा खोलने की दुआ इन इंग्लिश

aftara indakum as-saa’imoon, wa akala ta’aamakum al-abraar, wa sallat alaikum al-malaa’ikah.

मेहमानों के साथ रोज़ा खोलने की दुआ इन उर्दू

أَفْطَرَ عِنْدَكُمُ الصَّائِمُونَ، وَأَكَلَ طَعَامَكُمُ الْأَبْرَارُ، وَصَلَّتْ عَلَيْكُمُ الْمَلَائِكَةُ

इफ्तार के बाद दुआ पढ़ना क्यों जरूरी है?

इस दुआ में अल्लाह से दुआ की जाती है कि हमारा रोज़ा कुबूल करें और इसका सवाब हमें जरूर मिले। दिनभर भूखे-प्यासे रहने के बाद रोज़ेदार अल्लाह की दी गई नेमतों का शुक्र अदा करता है। यह दुआ पढ़ने से इफ्तार के खाने में बरकत होती है और सेहत को फायदा मिलता है।

रमज़ान की आम दुआ (Ramzan ki Dua)

Ramzan ki Dua

दुआ सिर्फ रोज़ा खोलते वक्त नहीं, बल्कि पूरे दिन कसरत से पढ़ी जानी चाहिए। अगर आप कसरत से अल्लाह की इबादत करते हैं, तो सारे काम आसान हो जाएंगे और आपको अच्छा भी लगेगा।

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रमज़ान की आम दुआ इन हिंदी (Ramzan ki Dua in Hindi)

अल्लाहुम्मा बारिक लना फी रमज़ान वा अ'इन्ना अला सियामिहि वा क़ियामिहि

रमज़ान की आम दुआ इन इंग्लिश (Ramzan ki Dua in English)

Allahumma barik lana fi Ramazan wa a'inna ala siyamihi wa qiyamihi.

रमज़ान की आम दुआ इन उर्दू (Ramzan ki Dua in Urdu)

اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِي رَمَضَانَ وَأَعِنَّا عَلَى صِيَامِهِ وَقِيَامِهِ

इसका मतलब यह है कि अल्लाह हमारे लिए रमज़ान को बरकत वाला बना दे और हमें रोज़ा रखने और नमाज़ पढ़ने की ताकत दे, ताकि हम पूरे रमजान सिर्फ और सिर्फ तेरी इबादत कर सकें।

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