
रमजान का पाक महीना इबादत, सब्र और रहमत का समय माना जाता है। इस दौरान रोजा रखने वाले सुबह से शाम तक अल्लाह की रजा के लिए रोज़ा रखते हैं। इस समय जैसे ही सूरज ढलता है, इफ्तार का मुबारक वक्त आ जाता है और रोजा खोला जाता है, जो बरकत वाला पल माना जाता है। इफ्तार के समय दुआ पढ़ना इस्लामिक परंपरा का अहम हिस्सा होता है। यह न सिर्फ इबादत को पूर्ण करने का प्रतीक माना जाता है, बल्कि अल्लाह का शुक्र अदा करने और उसकी रहमत मांगने का खूबसूरत तरीका भी होता है। सच्चे दिल और यकीन के साथ पढ़ी गई दुआ इफ्तार की नेमत को और ज्यादा खास बना देती है। अक़्गार आप भी रमजान में अल्लाह से दुआ मांगना चाहती हैं तो आइए जानते हैं कि रोजा खोलते समय कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए और उनका मतलब क्या होता है।
रोज़ा खोलने के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ का मुस्लिम संप्रदाय में विशेष महत्व होता है। दिनभर रोजा रखकर इंसान सब्र, संयम और अल्लाह की इबादत का एहसास करता है। इफ्तार का पल इस इबादत की पूर्णता का समय होता है। ऐसे में दुआ पढ़ना अल्लाह का शुक्र अदा करने और उसकी रहमत व कबूलियत की उम्मीद जताने का तरीका माना जाता है। यह दुआ रोजा रखने वाले के दिल में कृतज्ञता, विनम्रता और आध्यात्मिक जुड़ाव को और गहरा करती है।

ज़हबज़-ज़माऊ वब्तल्लतिल-ऊरूक़ वसाबतल-अज्रु इंशा-अल्लाह
zahabaz zamau wabtallatil urooq wa-sabatal-ajru insha-allah
ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ
यह भी पढ़ें- Ramadan 2026: 18 या 19 फरवरी कब से शुरू हो रहा है रमजान का पाक महीना? जानिए कब रखा जाएगा पहला रोजा
प्यास बुझ गई, रगें तर हो गईं और अल्लाह ने चाहा तो सवाब मुक्म्मल हो जाएगा।
यानी इफ्तार के समय इस दुआ को पढ़ने से अल्लाह की रहमत मिलती है और रोज़े का पूरा सवाब मिलता है। इसे पढ़कर पानी या खजूर से रोज़ा खोलना सबसे अच्छा माना जाता है।

अगर आप किसी समूह या मेहमानों के साथ इफ्तार कर रहे हैं, तो इस खास दुआ को पढ़ना बहुत फज़ीलत (सवाब) वाला माना जाता है। अगर आप चाहें तो इस दुआ को मुकम्मल पढ़ सकते हैं।
-1740990887111.jpg)
अफ़्तरा इंदकुम अस-साइमून, व अकल तआमकुम अल-अब्रार, व सल्लत अलैकुम अल-मलायक़ा
aftara indakum as-saa’imoon, wa akala ta’aamakum al-abraar, wa sallat alaikum al-malaa’ikah.
أَفْطَرَ عِنْدَكُمُ الصَّائِمُونَ، وَأَكَلَ طَعَامَكُمُ الْأَبْرَارُ، وَصَلَّتْ عَلَيْكُمُ الْمَلَائِكَةُ
इस दुआ में अल्लाह से दुआ की जाती है कि हमारा रोज़ा कुबूल करें और इसका सवाब हमें जरूर मिले। दिनभर भूखे-प्यासे रहने के बाद रोज़ेदार अल्लाह की दी गई नेमतों का शुक्र अदा करता है। यह दुआ पढ़ने से इफ्तार के खाने में बरकत होती है और सेहत को फायदा मिलता है।

दुआ सिर्फ रोज़ा खोलते वक्त नहीं, बल्कि पूरे दिन कसरत से पढ़ी जानी चाहिए। अगर आप कसरत से अल्लाह की इबादत करते हैं, तो सारे काम आसान हो जाएंगे और आपको अच्छा भी लगेगा।
इसे जरूर पढ़ें- Ramadan Duas: रमज़ान के पाक महीने में पढ़ी जाने वाली खास दुआएं
अल्लाहुम्मा बारिक लना फी रमज़ान वा अ'इन्ना अला सियामिहि वा क़ियामिहि
Allahumma barik lana fi Ramazan wa a'inna ala siyamihi wa qiyamihi.
اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِي رَمَضَانَ وَأَعِنَّا عَلَى صِيَامِهِ وَقِيَامِهِ
इसका मतलब यह है कि अल्लाह हमारे लिए रमज़ान को बरकत वाला बना दे और हमें रोज़ा रखने और नमाज़ पढ़ने की ताकत दे, ताकि हम पूरे रमजान सिर्फ और सिर्फ तेरी इबादत कर सकें।
इन दुआओं को भी अपने रूटीन में शामिल करें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह के और भी आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।
Image Credit- (@Freepik and shutterstock)
यह विडियो भी देखें
Herzindagi video
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।
