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Roza Kholne ki Dua

Roza Rakhne or Kholne ki Dua 2026: रमजान में रोज़ा रखने और खोलने की दुआ से लेकर नमाज का सही तरीका यहां पढ़ें

Roza Rakhne ki Dua 2026: अल्लाह की रहमत हासिल करनी हो या अपनी इबादत को मुकम्मल बनाना हो, रमजान का पाक महीना दुआओं की कबूलियत का समय माना जाता है। सच्चे दिल से पढ़ी गई दुआएं इंसान को सुकून, बरकत और रूहानी ताकत देती हैं। माना जाता है कि इस मुबारक महीने में की गई दुआएं जल्द कबूल होती हैं और दिली ख्वाहिशें पूरी होने का रास्ता खुलता है। इस्लाम में ऐसी खास दुआएं बताई गई हैं जो आप रोजा रखने और इफ्तार के वक्त पढ़ सकती हैं।
Editorial
Updated:- 2026-02-23, 13:30 IST

Ramadan ki Dua 2026: रमदान इस्लाम में सबसे पाक महीना माना जाता है, जिसे इबादत, संयम और रहमत का महीना कहा जाता है। इस महीने में मुस्लिम समुदाय रोज़ा रखते हैं, जिसका उद्देश्य आत्मसंयम, धैर्य और अल्लाह की रहमत हासिल करना होता है। रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और नेकी के रास्ते पर चलने की एक इबादत है।

रोज़ा की शुरुआत सहरी से होती है और इफ्तार के साथ समाप्त होती है। इस दौरान झूठ, गुस्सा और बुरे विचारों से बचना जरूरी माना जाता है। रमदान में हर इबादत का फल कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए इस महीने में ज्यादा से ज्यादा दुआ करने की हिदायत दी गई है। ये दुआएं न सिर्फ रोजे की अहमियत बढ़ाती हैं, बल्कि बंदे और अल्लाह के बीच रिश्ते को भी मजबूत बनाती हैं।

रोजा रखने की दुआ (Roza Rakhne Ki Dua)

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रोजा रखने से पहले नियत करना जरूरी होता है, जिससे रोजा सही माना जाता है। सहरी के दौरान रोजा रखने की नियत हर मुस्लिम भाई-बहन को करनी पड़ती है। यह नियत दिल से और सच्ची होनी चाहिए। नियत के बाद पूरे दिन रोजा रखा जाता है और इफ्तार के समय विशेष दुआ पढ़कर रोजा खोला जाता है।

हिंदी में रोज़ा रखने की दुआ (Roza Rakhne Ki Dua In Hindi)

व बिसौमि ग़दिन नवैतु मिन शाह्रि रमज़ान, जिसका अर्थ है- "मैं अल्लाह के लिए रमज़ान के रोजे की नीयत करता/करती हूं।"

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इंग्लिश में रोज़ा रखने की दुआ ( Roza Rakhne Ki Dua in English)

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Wa Bisawmi ghaddan nawaiytu min shahri ramadan"

अरबी में रोज़ा खोलने की दुआ (Roza Rakhne Ki Dua in Arabic)

و بسومي غادين نويت من شهري رمضان

रोज़ा रखने की नियत (Roza Rakhne Ki Niyat)

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रोज़ा रखने के लिए नियत बहुत महत्वपूर्ण होती है। यह जरूरी नहीं कि इसे शब्दों में कहा जाए, लेकिन दिल से यह इरादा किया जाता है कि यह रोज़ा सिर्फ अल्लाह की खुशी के लिए रखा जा रहा है।

रोज़ा खोलने की दुआ (Roza Kholne Ki Dua)

रोज़ा खोलने से पहले हर मुसलमान के लिए यह दुआ पढ़ना अहम माना जाता है। माना जाता है कि इस दुआ को पढ़ने से न सिर्फ सवाब मिलता है बल्कि खाने में बरकत भी होती है। इफ्तार के दौरान, खासतौर पर खजूर खाने से पहले यह दुआ पढ़ी जाती है, और दुआ पूरी होने के बाद ही कुछ खाया जाता है। यह सुन्नत तरीका रोज़े की तक़दीस को बढ़ाता है और अल्लाह की रहमत व बरकत हासिल करने का जरिया बनता है।

हिंदी में रोज़ा खोलने की दुआ (Roza Kholne ki Dua Hindi me)

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अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु,व-बिका आमन्तु,व-अलयका तवक्कालतू,व अला रिज़किका अफतरतू, जिसका अर्थ है- "हे अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया और तुझ पर भरोसा किया और तेरी दी हुई रोजी से रोज़ा खोला।"

इंग्लिश में रोज़ा खोलने की दुआ (Roza Kholne ki Dua in English)

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Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa ‘alayka tawakkaltu wa ‘ala rizq-ika-aftartu

रोज़ा खोलने की नियत ( Roza Kholne Ki Niyat)

इफ्तार के दौरान रोज़ा खोलने की नियत की जाती है, जिसमें रोज़ेदार अल्लाह की रज़ा के लिए खास दुआ पढ़ता है और रोज़ा खोलता है। यह नियत पहले से नहीं की जाती, क्योंकि अगर कोई व्यक्ति इफ्तार से पहले ही रोज़ा खोलने की नियत कर ले, तो उसका रोज़ा अमान्य हो सकता है और पूरे दिन की इबादत व्यर्थ हो जाती है। इसलिए, सही तरीका यह है कि रोज़ा खोलते समय ही नियत की जाए और इफ्तार की दुआ पढ़कर रोज़ा खोला जाए, ताकि अल्लाह की रहमत और बरकत प्राप्त हो सके।

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रोज़े की नमाज का तरीका (Roza ki Namaz ka Tarika)

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रमजान में नमाज का खास महत्व होता है। पांच वक्त की नमाज के अलावा तरावीह की नमाज भी अदा की जाती है, जो रमजान की बहुत ही खास इबादत होती है। तरावीह की नमाज में कुरान पढ़ी जाती है और यह रमजान की रातों को खास रूप से इबादत में बिताने का एक जरिया होता है।

रमजान का महीना अल्लाह की बरकत और रहमत से भरा होता है। इसमें रोज़ा रखना, नमाज अदा करना, दुआएं पढ़ना और नेक काम करना बहुत सवाब का काम माना जाता है।

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FAQ
रमजान के चांद की दुआ क्या है?
Allahumma Ahlilhu Alaina Bill Yumni Wal-Iman, Was-Salamati Wal Islam, Rabbi wa Rabbuk Allah
रमजान का रोजा कैसे खोला जाता है?
रोजेदार रोजाना रात में नमाज अदा की जाती है। इफ्तार में तरह-तरह के व्यंजन बनते हैं और पहले दुआ पढ़कर खजूर खाकर रोजा खोला जाता है।
रोज़ा खोलने की दुआ कब पढ़नी चाहिए?
इफ्तार के समय, रोज़ा खोलने से ठीक पहले यह दुआ पढ़ी जाती है। आमतौर पर खजूर या पानी से रोज़ा खोलते समय इसे पढ़ना सुन्नत माना जाता है।
रमज़ान में कौन-कौन सी नमाज़ पढ़ी जाती है?
रमज़ान में पांच वक्त की नमाज़ के अलावा तरावीह की नमाज़ भी अदा की जाती है, जो खास तौर पर रमज़ान की रातों में पढ़ी जाती है।
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