
Shab-e-Barat ki Namaz 2026: शाबान के महीने में शब-ए-बारात का पर्व बेहद ही खास माना जाता है। ये इस महीने की 15वीं तारीख को आती है। यह मुसलमान का एक बेहद खास त्योहार होता है। शब-ए -बारात में एक महत्वपूर्ण और मुकद्दस रात आती है, जिसे हम शब-ए-कद्र की रात भी कहते हैं। इस रात में अल्लाह अपने बंदों की दुआएं कबूल फरमाता है और गुनाहों को माफ करने के दरवाजे खोलता है। ऐसे में जो लोग दिल से तौबा करते हैं और सच्ची इबादत करते हैं, उन्हें अल्लाह की रहमत मिलती है। इस रात नफिल नमाज अदा की जाती है। बता दें कि इस दिन कुछ खास दुआ भी पढ़ी जाती है। कुरआन की तिलावत करना भी फायदेमंद माना जाता है। अगर आप भी इस मुबारक रात में इबादत कर अपनी जिंदगी में सवाब कमाना चाहते हैं तो, हम आपको इस रात में पढ़ी जाने वाली नमाज और दुआ के बारे में बता रहे हैं। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

इशा की फर्ज और सुन्नत नमाज अदा करने के बाद शब-ए- बरात की इबादत शुरुआत की जाती है। इसमें नफिल नमाज पढ़ी जाती है। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से दो रिकात से लेकर 24 रिकात तक नमाज पढ़ सकते हैं। जिस तरह से आप बाकी की नमाज अदा करते हैं, ठीक उसी तरह से आपको नफिल नमाज अदा करनी होती है, सिर्फ नियत करते वक्त आपको नफिल नमाज की नियत करनी होती है।
-1739361598231.jpg)
नमाज अदा करने के बाद अल्ला से अपने गुनाहों की माफी के लिए यह दुआ कसरत से पढ़ी जाती है।
इसका मतलब होता है, ऐ अल्लाह! मैने अपनी जान पर बहुत जुल्म किया है और गुनाहों को सिर्फ तू ही माफ कर सकता है। तो मुझे अपनी तरफ से माफी अता कर और मुझ पर रहमत कर। बेशक, तू ही सबसे ज्यादा माफ करने वाला है और रहम करने वाला है।
-1739361614813.jpg)
शब-ए- बरात की रात यह दुआ पढ़ने की बहुत ही फजीलत है। माना जाता है कि इस दुआ को कसरत से पढ़ने से अल्लाह की रहमत और मगफिरत हासिल होती है। इससे दिल को सुकून मिलता है। इस दुआ के साथ बंदा अपने दिल की बातें अल्लाह से कहता है, तो अल्लाह उसे जरूर सुनते हैं और दुआ कबूल होने की संभावना बढ़ जाती है। इस दुआ को पढ़ने से इंसान को अपनी गुनाहों का एहसास होता है और वह उन्हें दोबारा न करने की कसम खाता है। यही दुआ कयामत के दिन आपको माफी दिलवाती है
इसका मतलब होता है, ए अल्लाह! तू बहुत माफ करने वाला है,तू माफी को पसंद करता है। मुझे भी माफ कर दे।
यह भी पढ़ें - शब-ए-बारात की नफिल नमाज कैसे अदा करें? यहां जानें दुआ और पढ़ने का तरीका

इसका मतलब होता है, ऐ अल्लाह, मुझे माफ कर, मुझ पर रहमत फरमा, मेरे गुनाहों को माफ कर और मेरी इबादत को कबूल कर
यह भी पढ़ें - Eid Special: ईद उल-फितर के दिन जरूर करें ये काम
हमें उम्मीद है कि आपको ये तमाम जानकारी समझ में आई होगी। अगर आपको कोई और दुआ जाननी है, तो हमें नीचे कमेंट करके बताएं। हम आप तक सही जानकारी पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी से।
Image Credit- Freepik
यह विडियो भी देखें
Herzindagi video
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।
-1739361633222.jpg)