
पीरियड्स को लेकर बच्चों के मन में कई तरह के मिथ और गलतफहमियां बनी रहती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इस मुद्दे पर कोई भी खुलकर बातचीत नहीं करना चाहता। अक्सर माता-पिता भी बच्चों से इस बारे में खुलकर चर्चा करने से हिचकिचाते हैं, जिससे बच्चों को सही जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में बच्चे इधर-उधर से सुनी हुई बातों को ही सच मान लेते हैं। कई बार ये गलत धारणाएं उनके दिमाग में स्कूल से अपने खुद के परिवार से ही बनती है- जैसे कि पीरियड्स के दौरान अचार नहीं छूना चाहिए, मंदिर नहीं जाना चाहिए, या फिर पीरियड्स का खून गंदा होता है। इसीलिए बच्चों के मन में चल रही इन गलतफहमियों को दूर करने और उन्हें सही जानकारी देने के उद्देश्य से Herzindagi स्कूलों में “पीरियड्स पार्टी एडिशन” का आयोजन कर रहा है। इस पहल से बच्चों को पीरियड्स को लेकर बिना झिझक अपनी बात रखने और सही जानकारी पाने का मौका मिला।।

कार्यक्रम की शुरुआत Megha Mamgain, जो Jagran New Media की मैनेजिंग एडिटर (हेल्थ एंड लाइफ) और वाइस प्रेसिडेंट हैं, उनके संबोधन से हुई। उन्होंने बच्चों से खुलकर बातचीत करते हुए पीरियड्स से जुड़े मिथ को समझाया।
स्कूल की प्रिंसिपल ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को जागरूक बनाने के साथ-साथ उनके मन में मौजूद झिझक और गलतफहमियों को दूर करने में भी मददगार साबित होते हैं, इसलिए हम इस पहल में आपके साथ हैं।

पीरियड पार्टी में डॉ. वेदिका बाली, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिड़ला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ ने बच्चों से बातचीत की और उन्हें पीरियड ब्लड को लेकर चल रहे मिथ पर जागरुक किया। बच्चों को इसके बारे में समझाने के लिए ‘मिथ्स एंड फैक्ट्स’ और ‘पीरियड रिले’ जैसे गेम खेले गए।

उन्होंने बताया कि आज के समय में भले ही कुछ बच्चों के पीरियड्स जल्दी आ रहे हों, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनकी हाइट रुक जाएगी। यह एक आम मिथ है, बच्चों और माता-पिता को यह समझना चाहिए कि शरीर की ग्रोथ और हाइट कई अन्य फैक्टर्स पर निर्भर करती है, जैसे जेनेटिक्स, पोषण और ओवरऑल हेल्थ। इसे आप पीरियड्स से जोड़कर न देखें।
बच्चों ने डॉक्टर से सवाल किया कि क्या पीरियड्स का खून गंदा होता है। इस पर डॉ. वेदिका बाली ने कहा कि यह खून गंदा नहीं होता, बल्कि यह शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसे गंदा कहना और इस दौरान बच्चों को दूसरे काम करने से रोकना गलता है।
कुछ बच्चों ने यह भी सवाल किया कि पीरियड्स में खेलना या दौड़ना नहीं चाहिए। इसपर डॉक्टर ने कहा कि अगर शरीर साथ दे रहा है, तो हल्की-फुल्की एक्टिविटी करना फायदेमंद होता है।
‘पीरियड पार्टी स्कूल एडिशन’ का अगला आयोजन जल्द ही फिर किया जाएगा, इसके जरिए हम बच्चों तक सही जानकारी पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।
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