
अगर आपको पीरियड्स में इतना ज्यादा दर्द होता है कि आप काम तो क्या ठीक से उठ बैठ भी नहीं पाती हैं? क्या इस दौरान ऑफिस जाना आपके लिए किसी बड़ी सजा से कम नहीं होता है? क्या आपको भी लगता है कि जब भी आपको पीरियड्स आएं आप पूरी तरह से आराम करें? क्या आपको पीरियड्स में छुट्टी मिलनी चाहिए? अगर मुझसे पूछा जाए तो मेरा जवाब भी होगा हां...लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं और छात्राओं के लिए पीरियड्स के दौरान अनिवार्य छुट्टियों का प्रावधान करने की मांग को लेकर दायर याचिका की सुनवाई से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी चिंता जताई कि अगर पीरियड्स लीव को कानून के रूप में अनिवार्य बना दिया गया, तो इससे महिलाओं के करियर पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। यही नहीं ऐसे में कई कंपनियां महिलाओं को जॉब ऑफर करने से भी पीछे हट सकती हैं। क्या ऐसा सोचना सही है और क्या सच में महिलाओं को पीरियड लीव्स देने से उनका करियर खराब हो सकता है?

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अगर पीरियड्स लीव को एक कानून के रूप में अनिवार्य कर दिया गया तो इसका सीधा असर महिलाओं के करियर पर पड़ सकता है। CJI का मानना है कि इस फैसले से कि सभी वर्किंग महिलाओं, छात्राओं या किसी भी कामकाजी महिला के लिए पीरियड्स के दौरान छुट्टी लेना अनिवार्य किया गया, तो इससे महिलाओं के करियर पर नकारात्मक असर हो सकता है। CJI ने इस बात पर चिंता जताते हुए यह भी कहा कि ऐसी स्थिति भी बन सकती है कई कंपनियां या संस्थान महिलाओं को किसी बड़े और जिम्मेदार पर पर लेने से हिचकिचाने लगें।

वास्तव में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर एक बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर महिलाओं को पीरियड्स के दौरान छुट्टी देना अनिवार्य कर दिया गया तो बड़ी कंपनियां उन्हें नौकरी देने से मना कर सकती हैं? भारत जैसे देश में जहां पहले से ही महिलाओं को वर्कप्लेस में समानता का अधिकार नहीं दिया जाता है वहां इस तरह की आशंका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर बात महिलाओं के लिए पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याओं की करें तो न जानें कितनी महिलाओं को पीरियड्स में क्रैम्प्स होते हैं और एक नहीं बल्कि 4-5 दिनों तक ब्लीडिंग की वजह से वीकनेस आने लगती है। मेरा मानना ये है कि वर्कप्लेस में महिलाओं को समानता मिलने के साथ पीरियड्स में होने वाली समस्याओं से बचने के लिए उन्हें छुट्टी का अधिकार भी मिलना चाहिए।
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पीरियड्स लीव को जरूरी बनाने के लेकर मैंने अपने ऑफिस में काम करने वाली कई महिलाओं से सवाल किए। मेरी कलीग गरिमा गर्ग जिसे पीरियड्स में इतना पेन होता है कि वो इस दौरान ट्रेवल करने में परेशान हो जाती हैं और किसी तरह से अगर ऑफिस आ भी जाती हैं, तो काम करने में बहुत तकलीफ होती है। गरिमा का मानना है कि सभी वर्किंग महिलाओं को पीरियड्स में छुट्टी मिलनी चाहिए, क्योंकि इस दौरान उन्हें कमजोरी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें आराम देने के लिए पीरियड लीव को अनिवार्य करना एक अच्छा कदम हो सकता है। कुछ देशों और कंपनियों में पहले से ही ये नियम फॉलो किए जाते हैं, लेकिन अभी भी भारत में ऐसा नियम लागू नहीं हो पाया है।
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वास्तव में अगर पीरियड्स की छुट्टी को महिलाओं के लिए अनिवार्य करने से उनके लिए रोजगार के अवसरों की कमी हो सकती है तो ऐसे देश को अपनी सोच बदलने की बहुत ज्यादा जरूरत है।
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