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UGC के बनने से पहले कौन देता था यूनिवर्सिटीज को मान्यता? यहां जानें पूरा इत‍िहास

सुप्रीम कोर्ट ने UGC विनियम 2026 के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है क‍ि अगले आदेश तक इन्हें स्थगित ही रखा जाए। ऐसे में अब लोगों में चर्चा बढ़ गई है क‍ि UGC बनने से पहले यून‍िवर्सिटीज को मान्‍यता कौन देता था? हम आपको इसके बारे में व‍िस्‍तार से जानकारी दे रहे हैं।
Editorial
Updated:- 2026-01-30, 16:57 IST

सुप्रीम कोर्ट ने UGC विनियमों पर रोक लगा दी है। उन्हें स्थगित भी कर द‍िया गया है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है क‍ि यूजीसी विनियम 2012 अगले आदेश तक लागू रहेंगे। बीते द‍िनों हुई सुनवाई के बाद ये न‍िर्देश द‍िया गया है। बताया जा रहा है क‍ि अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। दरअसल, जनवरी 2026 में यूजीसी ने Equity in Higher Education Institutions Regulations जारी किए थे।

इन नियमों का मकसद कैंपस में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना था। साथ ही छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सेफ्टी का भी ध्‍यान रखना था। हालांकि‍, ये न‍ियम आते ही इस पर सवाल उठने लगे थे। इस पूरे मामले के बीच एक सवाल फिरसे चर्चा में आ गया है क‍ि UGC आखिर है क्या और इसके बनने से पहले भारत में यूनिवर्सिटीज को मान्यता कौन देता था? आइए इसके बारे में जानते हैं व‍िस्‍तार से -

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UGC क्‍या है?

UGC यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (University Grant Commission)। ये शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक वैधानिक संस्था है। इसका काम देश की Higher Education को सही दि‍शा देना होता है। साथ ही यूनिवर्सिटीज के कामकाज पर भी नजर रखना होता है।

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यूजीसी ये देखता है कि पढ़ाई, एग्‍लाम और रिसर्च का लेवल फिक्स्ड स्टैंडर्ड के ह‍िसाब से ही हो। इसके अलावा यूजीसी (UGC) का काम सिर्फ नियम बनाना ही नहीं, बल्कि काबिल यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को फंड देना भी है। ये केंद्र और राज्य सरकारों को हायर एजुकेशन से जुड़ी जरूरी सलाह देने का काम भी करता है।

UGC से पहले कौन देता था यूनिवर्सिटीज को मान्यता?

भारत में शिक्षा की परंपरा बहुत पुरानी है। नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे यून‍िवर्सिटीज पुराने समय में दुनिया भर में काफी फेमस थे। यहां चीन, कोरिया, तिब्बत, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों से छात्र पढ़ने के ल‍िए आया करते थे। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान एजुकेशन को नए तरीके से ढाला गया।

  • 1823 में माउंटस्टुअर्ट एल्फिंस्टन
  • 1835 में लॉर्ड मैकाले
  • 1854 में सर चार्ल्स वुड

इन सभी ने एजुकेशन को बेहतर बनाया और अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा भी दी।

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आजादी से पहले ही रखी गई थी यूजीसी की नींव

शायद ही क‍िसी को मालूम होगा क‍ि यूजीसी का विचार आजादी से पहले ही सामने आ चुका था। साल 1944 में भारत के लिए एक खास एजुकेशन सिस्टम बनाने की तैयारी शुरू की गई थी। उस समय सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन ने शिक्षा को लेकर एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसे सार्जेंट रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है। इस रिपोर्ट में पहली बार University Grants Committee बनाने की सिफारिश की गई।

1945 में बनी पहली यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिटी

सार्जेंट रिपोर्ट के आधार पर 1945 में University Grants Committee का गठन किया गया। शुरुआत में इसका काम सिर्फ तीन सेंट्रल यून‍िवर्सिटीज जैसे- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी तक ही सीम‍ित था, लेक‍िन 1947 में आजादी के बाद इसकी जिम्मेदारी बढ़ा दी गई और इसे देश की सभी यूनिवर्सिटीज से जुड़े मामलों की निगरानी का काम सौंपा गया।

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आजाद भारत में यूजीसी को मिला था नया रूप

  • शुरुआत: साल 1948 में डॉ. एस राधाकृष्णन की देखरेख में एक कमेटी बनी, जिसने सलाह दी कि भारत की यूनिवर्सिटीज के लिए एक खास संस्था होनी चाहिए।
  • ब्रिटिश मॉडल: इसी सलाह पर ब्रिटेन के सिस्टम को देखते हुए यूजीसी को तैयार किया गया।
  • उद्घाटन: 28 दिसंबर 1953 को हमारे पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने UGC का उद्घाटन किया।

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हालांकि, इसे पूरी तरह से कानूनी ताकत 1956 में मिली, जब संसद में इसका कानून (UGC Act) पास हुआ था।

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FAQ
UGC का फुल फॉर्म क्‍या है?
यूजीसी का फुल फॉर्म University Grants Committee है।
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