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Indian Queen Tarabai Bhosale Story

कभी इस मराठा रानी ने औरंगजेब को चटा दी थी धूल, मुगलों से ले चुकी हैं जोरदार टक्कर

Indian Queen Tarabai Bhosale Story: औरंगजेब दक्षिण भारत पर अपना कब्जा करना चाहता था, लेकिन यह उसके लिए इतना आसान नहीं था, जितना उसने सोचा था। दक्षिण भारत में उसका सामना एक ऐसी मराठा रानी से हुआ, जिसने उसे धूल चटाकर रख दी थी। आइए जानें, किस मराठा रानी ने औरंगजेब को धूल चटाई?
Editorial
Updated:- 2025-03-12, 13:07 IST

Indian Queen Tarabai Bhosale Fought With Aurangzeb: औरंगजेब पूरे भारत पर अपना कब्जा करना चाहता था। उसका सपना था कि वह दक्षिण भारत को भी अपने कब्जे में कर सके। साल 1680 में औरंगजेब दक्षिण भारत पर जीत हासिल करने के लिए अपनी दिल्ली की गद्दी को छोड़कर अपने लाव लश्कर को लेकर दक्षिण भारत पर फतेह करने के लिए निकल पड़ा। हालांकि, दक्षिण भारत की भूमि पर औरंगजेब के लिए जीत हासिल कर पाना इतना आसान नहीं था, जितना उसने सोचा था। औरंगजेब दक्षिण की ओर तो निकला, लेकिन कभी दिल्ली वापस ना लौट सका। 

इसके दक्षिण विजय के सपने में मराठा साम्राज्य चट्टान की तरह खड़ा था। मराठाओं के अलावा, उसका सामना कई शक्तिशाली राज्यों और साम्राज्यों से हुआ। आखिरी तक औरंगजेब और उसकी सेना पस्त पड़ गई। इसके बाद, औरंगजेब की मौत हुई और उसका पतन शुरू हुआ। यही वह समय था, जब उसे एक मराठा रानी से भी मुंह की खानी पड़ी थी। आइए जानें, आखिर कैसे ताराबाई भोंसले ने औरंगजेब को धूल चटाई थी?

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मराठाओं से ली औरंगजेब ने टक्कर

Aurangzeb took on the Marathas

दक्षिण के सफर में औरंगजेब का सामना छत्रपति मराठाओं से हुआ। इस राह में छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुगलों को रोकने के लिए स्वतंत्र मराठा राज्य की स्थापना भी की थी। शिवाजी के निधन के बाद उनके बेटे संभाजी महाराज ने छत्रपति की पदवी संभाली। उन्होंने अपने शासनकाल में औरंगजेब से कई बार लड़ाई लड़ी। 1689 में औरंगजेब ने संभाजी महाराज की बेहद क्रूरता से हत्या कर दी थी। औरंगजेब ने इसके बाद मराठा साम्राज्य को खत्म करने के लिए जोरदार हमले किए, लेकिन अब भी उसके रास्ते में कई चुनौतियां पहाड़ बनकर खड़ी थीं। 

राजा राम ने लड़ी लड़ाई

संभाजी महाराज के बाद उनके भाई राजा राम ने मुगलों के खिलाफ संघर्ष किया। हालांकि, 30 साल की उम्र में ही उनका निधन हो गया। इसके बाद, उनकी पत्नी ने औरंगजेब के खिलाफ लड़ाई लड़ी। शिवाजी महाराज की बहू ताराबाई भोंसले ने अपने दम पर मराठा साम्राज्य की रक्षा की। 

ताराबाई भोंसले ने चटाई थी औरंगजेब को धूल

Tarabai Bhosale had defeated Aurangzeb

रानी ताराबाई भोंसले ने मराठाओं का इतना कुशल नेतृत्व किया, जिसकी मुगलों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। छत्रपति राजा राम के निधन के बाद ताराबाई ने अपने बेटे शिवाजी द्वितीय के नाम पर अकेले पूरा शासन संभाला। 1700 से 1707 तक रानी ताराबाई ने औरंगजेब की मुगल सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध की रणनीति चलाई। उनकी इस नीति से मुगलों को काफी नुकसान भी हुआ। 7 साल तक चले इस संघर्ष में उन्होंने मराठा साम्राज्य को फिर से मजबूत बनाया। यहां तक की रानी ताराबाई ने सूरत और मालवा पर भी विजय हासिल की। 1761 में महाराष्ट्र के सतारा के किले में उनकी मृत्यु हो गई थी। आज भी उनकी वीरता को याद किया जाता है। 

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Image Credit:Her Zindagi

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