
भारत के इतिहास में राजा-महाराजाओं और उनके वैभव की कहानी आज भी सुनी जाती हैं। आजादी के इतने सालों बाद भी देश में ऐसी कई जगह हैं, जहां आज भी कुछ जगह राजघरानों की पीढ़ियां मौजूद हैं। जब बात 'दरभंगा राज' की हो, तो वहां का भी इतिहास काफी मशहूर है, लेकिन अब मिथिला के उस गौरवशाली इतिहास की अंतिम महारानी इस दुनिया में नहीं रही हैं। दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया है। सोमवार को उन्होंने दरभंगा स्थित कल्याणी निवास में अंतिम सांस थी। आइए जानते हैं इनके इतिहाल के बारे में।
दरभंगा राजघराने की आखरी महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा के अंतिम राजा महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं। उनका विवाह सन 1940 में हुआ था। वे शाही परिवार की महारानी थी, लेकिन उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से जिया। जानकारी के मुताबिक उन्होंने 1962 में अपने पति के निधन के बाद 64 सालों तक एक तपस्विनी की तरह जीवन बिताया था। उन्होंने समाज और शिक्षा को ही अपना परिवार मान लिया था। यही नहीं महारानी ने गरीब बच्चों के लिए 'कल्याणी फाउंडेशन' भी बनाया था।

दरभंगा राज भारत की सबसे अमीर रियासतों में से एक माना जाता है। इसकी स्थापना 16वीं सदी (1556) में महेश ठाकुर ने की थी। इस रियासत का क्षेत्रफल करीब 8,000 वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा था। जानकारी के मुताबिक दरभंगा के महाराजाओं ने उस दौर में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय बनाने के लिए सबसे बड़ी आर्थिक मदद की थी। इसके अलावा कहा जाता है, कि पटना यूनिवर्सिटी और कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाने में भी दरभंगा के महाराजाओं कायोगदान रहा है।
यह भी पढ़ें- कभी इस मराठा रानी ने औरंगजेब को चटा दी थी धूल, मुगलों से ले चुकी हैं जोरदार टक्कर
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक द्वितीय विश्व युद्ध के समय दरभंगा के राजा-महाराजाओं ने देश को आर्थिक मदद की थी। महाराजा कामेश्वर सिंह ने 14,000 तोला सोना दान किया था, जो उस समय बहुत बड़ी बात हुआ करती थी। दरभंगा राज के पास उनकी खुद की रेलवे लाइन थी और उनके पास दुनिया की सबसे बेहतरीन कारों का भी कलेक्शन हुआ करता था।

दरभंगा का 'लक्ष्मीनारायण विलास पैलेस' भी अपनी खूबसूरती के लिए पुरे बिहार में मशहूर था, जिसे आज 'दरभंगा हाउस' भी कहा जाता है। अंतिम महाराजा कामेश्वर सिंह ने 3 शादियां की थी। उनकी पत्नी राजलक्ष्मी, कामेश्वरी प्रिया और अंत में कामसुंदरी देवी, लेकिन तीनों रानियों से भी उनकी अपनी कोई संतान नहीं हुई थी। इसी वजह से ये उनके कुल का अंत था।
यह भी पढ़ें- कौन थीं महारानी ताराबाई? जानिए उनके जीवन से जुड़ी ये बातें
अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Image Credit- INSTAGRAM/zilaparishad_wazirganj/navinvmishra
यह विडियो भी देखें
Herzindagi video
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।