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घर में बच्चे के जन्म पर पिता को भी मिले छुट्टी.... सुप्रीम कोर्ट में उठा पैटरनिटी लीव का मुद्दा; जानें इस पर क्या है लोगों की राय?

सुप्रीम कोर्ट ने पैटरनिटी लीव पर जोर देते हुए बच्चे के पालन-पोषण को माता-पिता की साझा जिम्मेदारी बताया है। आधुनिक समय में यह लीव मां को शारीरिक-मानसिक सहारा देती है और पिता-बच्चे का भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाती है। 
Editorial
Updated:- 2026-03-20, 16:15 IST

सुप्रीम कोर्ट की हालिया रिपोर्ट ने देशभर में पैटरनिटी लीव (Paternity Leave) को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। कोर्ट का मानना है कि बच्चे के पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल मां की नहीं, बल्कि माता-पिता दोनों की शेयर जिम्मेदारी है।  बदलते समय में परिवेश और न्यूक्लियर फैमिली के बढ़ते ट्रेंड के बीच पैटरनिटी लीव की पॉपुलैरिटी बहुत बढ़ गई है। आधुनिक समय में जब पति-पत्नी दोनों काम करते हैं, तो बच्चे के जन्म के शुरुआती महीनों में पापा की उपस्थिति न केवल मां को शारीरिक और मानसिक सहारा देती है, बल्कि पिता और बच्चे के बीच एक इमोशनल जुड़ाव भी पैदा करती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि बच्चे के विकास में पिता की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस फैसले से ऑफिस में जेंडर इक्वलिटी को बढ़ावा मिलेगा। यह कानून न केवल पेरेंट्स, बल्कि गोद लेने वाले पेरे्ंसट् के लिए भी एक बड़ा फैसला साबित होगा। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि पैटरनिटी लीव पर लोगों की क्या राय है। पढ़ते हैं आगे...

पैटरनिटी लीव पर लोगों की क्या राय है?

शालिनी मिश्रा (गाजियाबाद): गाजियाबाद की रहने वाली शालिनी का मानना है कि पैटरनिटी लीव केवल एक छुट्टी नहीं, बल्कि इससे नई मांओं को मानसिक सपोर्ट भी मिलेगा। उनका कहना है कि डिलीवरी के बाद महिलाएं अक्सर 'पोस्टपार्टम डिप्रेशन' और थकान का सामना करती हैं। ऐसे में अगर पति घर पर रहकर जिम्मेदारी शेयर करे, तो मां जल्दी रिकवर कर पाती है और घर का माहौल सकारात्मक बना रहता है।

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पीहू सिंह (दिल्ली): दिल्ली की पीहू सिंह इस मुद्दे को मॉडर्न पेरेंटिंग के नजरिए से देखती हैं। उनका कहना है कि दिल्ली में जहां लोग अपने माता-पिता से दूर अकेले रहते हैं, वहां पापा का घर पर होना जरूरी है। पीहू का मानना है कि बच्चे के डायपर बदलने से लेकर उसे सुलाने तक के कामों में पिता का हाथ बटें तो बच्चे के मन में बचपन से ही यह आदत बैठती है कि घर के काम किसी एक जेंडर के नहीं होते।

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मीताली गुप्ता (सहारनपुर): सहारनपुर की मीताली गुप्ता इस फैसले को अच्छा मानती है। उनका ऐसा कहना है कि अक्सर कंपनियों में लड़कियों को हायर करने में दिक्कत करती हैं क्योंकि उन्हें मैटरनिटी लीव देनी पड़ती है। 

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 अगर लड़कों को भी जरूरी रूप से पैटरनिटी लीव मिलने लगे, तो नौकरी के बाजार में महिलाओं के प्रति होने वाला यह भेदभाव शायद कम होगा और लड़के भी परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी को ज्यादा गंभीरता से समझ पाएंगे।

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Images: Freepik/shutterstock

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