
'19 मिनट 34 सेकंड वायरल एमएमएस वीडियो' को आए लगभग 2 महीने बीत चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसका ट्रेंड अब भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जैसे ही कोई यूजर गूगल सर्च पर इस कीवर्ड को टाइप करता है, दर्जनों संदिग्ध लिंक उसकी स्क्रीन पर दिखाई देने लगते हैं। कई लोग केवल जिज्ञासा में आकर इन लिंक्स पर क्लिक कर देते हैं, बिना यह सोचे कि इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं।
दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे कथित 'लीक वीडियो' अक्सर लोगों की उत्सुकता का फायदा उठाने के लिए बनाए जाते हैं। सच तो यह है कि 19 मिनट 34 सेकंड वाला असल वीडियो कब का इंटरनेट से डिलीट किया जा चुका है और अब इस टाइम स्टैंप का सहारा लेकर कई हैकर्स नए-नए लिंक क्रिएट करके उसके अंदर ऐसी संदिग्ध सामग्री परोस रहे हैं, जो आपको बुरे परिणामों की ओर ले जाएगी। अगर आप गलती से भी इस तरह के संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर दें, तो क्या हो सकता है? यदि आप जानना चाहती हैं, तो इस लेख को अंत तक पढ़ें।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ऐसे वायरल लिंक अधिकतर फर्जी या मैलिशियस होते हैं। इनका उद्देश्य असली वीडियो दिखाना नहीं, बल्कि यूजर के मोबाइल या लैपटॉप में वायरस या स्पायवेयर इंस्टॉल करना होता है। जैसे ही आप लिंक पर क्लिक करते हैं, एक फाइल अपने आप डाउनलोड हो सकती है या आपको किसी थर्ड पार्टी वेबसाइट पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है।
ऐसे लिंक्स के जरिए अक्सर बड़ी साइज की करप्ट फाइल डाउनलोड हो जाती है। कई बार यह फाइल आपको दिखाई भी नहीं देती, लेकिन वह आपके फोन की स्टोरेज घेर लेती है। धीरे-धीरे मोबाइल की मेमोरी फुल होने लगती है और फोन की स्पीड कम हो जाती है। आपको लगेगा कि फोन अचानक स्लो हो गया है या बार-बार हैंग हो रहा है, जबकि असली वजह वह छिपी हुई फाइल होती है।
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करप्ट फाइल या वायरस आपके मोबाइल के सिस्टम फाइल्स को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण फोन बार-बार रीस्टार्ट हो सकता है, ऐप्स क्रैश होने लगते हैं और कई बार तो डिवाइस पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में आपको सर्विस सेंटर तक जाना पड़ सकता है और डेटा भी खो सकता है।

सबसे बड़ा खतरा आपकी प्राइवेसी को होता है। कई संदिग्ध लिंक फिशिंग वेबसाइट्स पर ले जाते हैं, जहां आपसे लॉगिन डिटेल्स मांगी जाती हैं। अगर आपने गलती से अपना ईमेल, सोशल मीडिया या बैंकिंग पासवर्ड डाल दिया, तो वह सीधे साइबर अपराधियों के पास पहुंच सकता है। इसके बाद आपके अकाउंट हैक होने का खतरा बढ़ जाता है।
आजकल ज्यादातर लोग मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। अगर आपके फोन में मैलवेयर इंस्टॉल हो गया, तो वह आपके बैंकिंग ऐप्स की जानकारी चुरा सकता है। ओटीपी तक इंटरसेप्ट किए जा सकते हैं। ऐसे में आपके बैंक अकाउंट से बिना जानकारी के पैसे निकाले जा सकते हैं।
आपके फोन में मौजूद फोटो, वीडियो, कॉन्टैक्ट लिस्ट और निजी दस्तावेज भी सुरक्षित नहीं रहते। साइबर अपराधी इस डेटा का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं या ब्लैकमेलिंग तक कर सकते हैं। कई मामलों में लोगों को धमकी दी जाती है कि उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।
ऐसे वायरल टॉपिक्स अक्सर सोशल मीडिया एल्गोरिदम की वजह से लंबे समय तक ट्रेंड करते रहते हैं। लोग जिज्ञासा में बार-बार सर्च करते हैं, जिससे यह कीवर्ड और ज्यादा पॉपुलर हो जाता है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि हर ट्रेंडिंग चीज सुरक्षित नहीं होती।

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि 19 मिनट 34 सेकंड वायरल एमएमएस वीडियो का ट्रेंड भले ही सोशल मीडिया पर बना हुआ हो, लेकिन आपकी सुरक्षा उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। थोड़ी सी जिज्ञासा आपको बड़ी परेशानी में डाल सकती है। इसलिए सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और किसी भी संदिग्ध लिंक से दूरी बनाए रखें। यह जानकारी पसंद आई हो तो इस लेख को शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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