Sun Mar 8, 2026 | Updated 03:54 AM IST
herzindagi
who is winnie singh woman changing lives of vrindavan widows

Women's Day 2026: वृंदावन की बेसहारा मांओं की'मसीहा', मिलिए विनी सिंह से; जिन्होंने बदल दी हजारों विधवाओं की तकदीर

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर, विनी सिंह की कहानी प्रेरणा देती है, जिन्होंने मैत्री घर विधवा आश्रम की स्थापना कर वृंदावन की बेसहारा विधवाओं के जीवन में सम्मान और सुरक्षा लाई है। 2005 में 'मैत्री' की शुरुआत कर, उन्होंने हजारों महिलाओं को आश्रय, भोजन और इमोशनल सपोर्ट दिया है, जिन्हें समाज ने भुला दिया था। उनका मिशन यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी विधवा अकेली न रहे।
Editorial
Updated:- 2026-03-07, 20:10 IST

हर साल 8 मार्च को इंटरनेशनल वुमन डे मनाया जाता है। इस मौके पर हम आपको विनी सिंह के बारे में बताने जा रहे हैं। वह एक ऐसी समाज सेविका हैं, जिन्होंने अपना जीवन उन महिलाओं के लिए समर्पित कर दिया जिन्हें समाज ने लगभग भुला दिया था। विशेष रूप से वृंदावन की बेसहारा और विधवाओं के लिए उनका काम उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। मैत्री घर विधवा आश्रम की फाउंडर विनी सिंह ने हजारों महिलाओं को सिर्फ छत ही नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मसम्मान के साथ जीने का मौका दिया है।

विनी सिंह का मानना है कि किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन में सबसे जरूरी चीज सम्मान और सुरक्षा है। यही सोच उन्हें उन महिलाओं के लिए काम करने की प्रेरणा देती रही, जिन्हें परिवार और समाज दोनों ने छोड़ दिया था। वृंदावन में रहने वाली कई विधवाएं ऐसी हैं, जिन्हें कभी अपने ही घरवालों ने अपनाने से मना कर दिया और वे मंदिरों या सड़कों पर रहने को मजबूर हो गईं।

ऐसे में विनी सिंह ने न सिर्फ इन महिलाओं को आश्रय देने का काम किया, बल्कि उन्हें एक नया परिवार और सहारा भी दिया। उनके द्वारा स्थापित मैत्री घर विधवा आश्रम में आज सैकड़ों महिलाएं सुरक्षित माहौल में रह रही हैं। यहां उन्हें भोजन, दवाइयां, कपड़े और जरूरी सुविधाएं ही नहीं मिलतीं, बल्कि उन्हें मानसिक और भावनात्मक सहारा भी दिया जाता है।

विनी सिंह की यह पहल केवल मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं को फिर से आत्मविश्वास के साथ जीने की ताकत देती है। उनका प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी विधवा अपने जीवन के आखिरी वर्षों में अकेली, भूखी या असहाय महसूस न करें।

who is winnie singh changing lives of vrindavan widows

मैत्री की शुरुआत और सामाजिक मिशन

विनी सिंह ने वर्ष 2005 में 'मैत्री' संस्था की शुरुआत की थी। शुरुआत में इस संगठन का उद्देश्य यूनिफॉर्म्ड सर्विसेज (सुरक्षा बलों) में HIV/AIDS के खिलाफ जागरूकता और सहयोग नेटवर्क बनाना था। इस समय मैत्री ने शिलॉन्ग (मेघालय) में कई कार्यक्रम चलाए और बाद में दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में घरेलू हिंसा रोकने और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी काम किया।

वृंदावन की विधवाओं के लिए नई उम्मीद

साल 2008 में विनी सिंह और उनकी टीम को वृंदावन में एक बेहद संवेदनशील और उपेक्षित समुदाय से सामना हुआ। वे विधवाएं जिन्हें परिवार ने घर से निकाल दिया था। कई महिलाएं मंदिरों के बाहर या सड़कों पर भीख मांगकर जीवन बिताने को मजबूर थीं।

इस दर्दनाक स्थिति को देखकर विनी सिंह ने निर्णय लिया कि इन महिलाओं को सिर्फ मदद नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिलाया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ वृंदावन में 'मैत्री घर विधवा आश्रम' की स्थापना की गई।

who is winnie singh woman changing lives of vrindavan widows

हजारों महिलाओं के जीवन में बदलाव

आज मैत्री घर सिर्फ एक आश्रय नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत का स्थान बन चुका है।

  • वर्तमान में लगभग 130 विधवाएं आश्रम में रहती हैं।
  • करीब 300 महिलाओं को रोजाना भोजन, दूध, फल, दवाइयां और कपड़े जैसी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं।
  • हर महीने हजारों विधवाओं तक भोजन और जरूरी मदद पहुंचाई जाती है।
  • यहां आने वाली कई महिलाएं पहले मंदिरों या रेलवे स्टेशनों पर छोड़ दी गई थीं, लेकिन आश्रम में उन्हें फिर से साथ, सुरक्षा और अपनापन मिलता है।

सिर्फ मदद नहीं, सम्मान और आत्मविश्वास

मैत्री घर का उद्देश्य सिर्फ भोजन या रहने की जगह देना नहीं है। संस्था इन महिलाओं को भावनात्मक सहारा, समुदाय का एहसास और आत्मसम्मान लौटाने पर भी काम करती है।

विनी सिंह का मानना है कि किसी भी इंसान के लिए सबसे जरूरी है सम्मान के साथ जीने का अधिकार। इसी सोच के साथ वह पिछले दो दशकों से सामाजिक कार्यों में एक्टिव हैं।

winnie singh story

अनुभवी समाज सेविका और हीलर

विनी सिंह को पब्लिक हेल्‍थ, बुजुर्गों की देखभाल और जेंडर इक्विटी के क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने घरेलू हिंसा, महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों से जुड़े मुद्दों पर काउंसलिंग भी की है। वह एक सर्टिफाइड पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपिस्ट भी हैं और कॉन्शियस एजिंग जैसे विषयों पर वक्ता के रूप में भी जानी जाती हैं।

यह भी पढ़ें- तीसरी बेटी का जन्म हुआ, तो पति अस्पताल में ही छोड़कर भाग गया...डिलीवरी के 15 दिन बाद घर-घर जाकर करना पड़ा काम, पढ़िए सिंगल मदर कुसमी की पोस्ट पार्टम कहानी

समाज के सहयोग से चल रहा मिशन

इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए विनी सिंह ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म 'मिलाप' (Milaap) के माध्यम से लोगों से सहयोग जुटाना शुरू किया। इस पहल की मदद से आम लोग भी सीधे इन विधवाओं की मदद कर सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर विनी सिंह की इंस्‍पायरिंग स्‍टोरी याद दिलाती है कि महिला सशक्तिकरण केवल अवसर देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देना भी है जिन्हें समाज ने हाशिए पर छोड़ दिया है।

winnie singh woman changing lives of vrindavan widows

विनी सिंह और उनके सहयोगियों का मिशन बेहद सरल लेकिन शक्तिशाली है, कोई भी विधवा अपनी जिंदगी के अंतिम वर्षों में अकेली, भूखी या बिना सम्मान के न रहे।

यह भी पढ़ें- 17 की उम्र में शादी, घरेलू हिंसा का खतरनाक मंजर, अब बन गईं 700 परिवारों की गायत्री दीदी, जानिए एक महिला के संघर्ष की कहानी उसी की जुबानी

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

यह विडियो भी देखें

Herzindagi video

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।