
Allahabad High Court Shikshamitra Decision: उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों की नियमित करने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा अपडेट आया है। यूपी विधानसभा में पिछले दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों के मानदेय को बढ़ाने की घोषणा की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को शिक्षामित्रों के सेवा को नियमितिकरण में दो माह में फैसला लेने के लिए कहा गया है। साथ ही आगे कहा कि 115 याची को 3 सप्ताह में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा को प्रत्यावेदन देना होगा। हाईकोर्ट ने यह फैसला 115 शिक्षामित्रों की ओर से दायर की गई सेवा नियमितिकरण पर आदेश जारी किए जाने पर लिया है। अगर आप शिक्षामित्र बनने की सोच रहे हैं, तो नीचे लेख में जानें इसके लिए जरूरी योग्यता, आयु सीमा और इससे जुड़ी खास जानकारी।

शिक्षामित्र कौन होते हैं? यह सवाल अक्सर टीचर बनने की तैयारी करने वाले बच्चों के मन में आता है। अब ऐसे में शिक्षामित्र और अध्यापक के बीच का अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि यह नाम ही नहीं बल्कि योग्यता, सेलेक्शन प्रोसेस और अधिकारों का भी अंतर है। आसान भाषा में कहें तो शिक्षामित्र एक सहायक के रूप में नियुक्त किए गए थे, जबकि टीचर परमानेंट शिक्षक होते हैं।
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शिक्षामित्रों बनने के लिए कैंडिडेट्स की योग्यता 12वीं पास और उसी गांव का निवासी होना था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर स्नातक और बी.टी.सी. (BTC) कर दिया गया था।
शिक्षामित्र के पद पर काम करने या परमानेंट होने के लिए D.El.Ed. (BTC) या उसके समकक्ष कोई दो साल की टीचिंग ट्रेनिंग होना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद, किसी भी प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने के लिए TET या CTET पास होना जरूरी कर दिया गया है।
शिक्षामित्र के पद पर नौकरी करने के लिए आवेदक की उम्र आयु 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार छूट दी जाती है।
अगर बात करें शिक्षामित्र के वेतन की, तो इन्हें सैलरी की जगह मानदेय दिया जाता है। बीते दिन यूपी मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों को 18 हजार व अनुदेशकों को मिलेगा 17 हजार रुपये मासिक मानदेय देने का एलान किया था, जो 1 अप्रैल से लागू होगा।

सरकार नए शिक्षामित्रों की भर्ती नहीं कर रही है। वर्तमान में जो शिक्षामित्र कार्यरत हैं, वे पुराने नियमों के तहत रखे गए थे। उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर स्थायी किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साल 2017 में इसे रद्द कर दिया था। अब उन्हें स्थायी अध्यापक बनने के लिए TET और Super TET परीक्षा पास करनी अनिवार्य है।
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