
What is the secret to making good Tea| सुबह का समय हो और बस गरमा-गरम चाय की चुस्की मिल जाए तो बात ही कुछ और है। पर चाय का एडिक्शन अगर ज्यादा हो जाए, तो भी गलत होता है। वैसे हेल्दी चाय की बात की जाए तो हर्बल टी, ग्रीन टी और मसाले वाले चाय का ट्रेंड अब चल निकला है, लेकिन फिर भी अगर बात करें स्वाद की, तो वो तो हमारी बेहतरीन दूध वाली चाय में ही आता है।
पर अगर चाय में स्वाद के साथ-साथ हमें सेहत भी चाहिए, तो इसके इंग्रीडिएंट्स में कुछ बदलाव तो करना ही पड़ेगा।
डायटीशियन और होलिस्टिक न्यूट्रिशनिस्ट और डाइट पोडियम की फाउंडर शिखा महाजन ने हरजिंदगी से बात करते हुए चाय से जुड़ी कुछ जानकारी हमें दी। उन्होंने ये बताया कि ऐसे इंग्रीडिएंट्स हो सकते हैं जिन्हें स्वैप किया जाए, तो चाय को अपेक्षाक्रत ज्यादा हेल्दी बनाया जा सकता है। वैसे एक बात यहां समझ लेनी चाहिए कि चाय नेचुरली कैफीन से भरपूर होती है और इसलिए इसे बिल्कुल हेल्दी मान लेना सही नहीं होगा। हां, इंग्रीडिएंट्स स्वैप करके ऐसा जरूर किया जा सकता है कि चाय का नुकसान थोड़ा कम हो जाए।
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कुल मिलाकर चाय में स्वाद बढ़ाने वाली सभी चीजें उसे अनहेल्दी बनाने के लिए जिम्मेदार होती हैं।

शिखा महाजन के मुताबिक, इस विषय में कई स्टडीज की गई हैं और यह बात सामने आई है कि चाय की वजह से नींद आने में कमी हो सकती है। इसके अलावा, इसमें मौजूद कैफीन एंग्जायटी की समस्या भी पैदा कर सकता है। चाय की वजह से कॉन्स्टिपेशन जैसी समस्या भी हो सकती है। अगर किसी को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो उसके लिए भी चाय बहुत ही गलत ऑप्शन है।
शिखा महाजन के मुताबिक, अगर आप दिन में तीन से चार कप चाय पीती हैं, तो आपको शक्कर कम से कम रखनी चाहिए।
आप चाय में गुड़ या फिर स्टीविया डालकर उसे मीठा करें। कुछ लोग मिश्री भी मिलाते हैं जो शक्कर की तुलना में ठीक है, लेकिन बहुत ज्यादा मीठी होती है। ऐसे मामलों में आपको इसे थोड़ा कम ही मिलाना चाहिए। गर्म चाय में शहद बिल्कुल ना मिलाएं। कई लोग चाय को शहद से मीठा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह हेल्दी नहीं बल्कि और अनहेल्दी होता है। शहद को गर्म करने से वो टॉक्सिक बन जाता है जिससे यह और ज्यादा अनहेल्दी होता है।

सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि अगर आप चाय में विटामिन-सी मिला रही हैं, तो दूध ना डालें। नींबू की चाय में भरपूर विटामिन-सी होता है और यह दूध वाली चाय के मुकाबले बहुत हेल्दी होती है। अगर आपको दिन में 3-4 कप चाय पीने की आदत है, तो अपनी दो टाइम की चाय को नींबू की चाय से रिप्लेस कर दें। इसमें मौजूद कंपाउंड शरीर में आयरन को एब्जॉर्ब करने में मदद करता है।
ये डेयरी वाली चाय की तुलना में ज्यादा हेल्दी होती है इसका मतलब यह नहीं कि इसे जरूरत से ज्यादा पिया जाए। नींबू वाली चाय में भी आपको शक्कर की मात्रा कम ही रखनी है। अगर आप बिना शक्कर के इसे पी सकती हैं, तो यह बहुत अच्छा होगा।
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अगर आप फुल क्रीम या फिर गाय के दूध को नॉन-डेयरी या स्किम्ड मिल्क से रिप्लेस कर देंगी, तो चाय को थोड़ा हेल्दी बनाया जा सकता है। फुल क्रीम दूध बीपी के मरीजों के लिए भी अच्छा नहीं होता है और इसलिए यह जरूरी है कि आप उसे चाय में ना ही पिएं। इसके अलावा, अगर आपको किसी दूध हजम नहीं होता है, तो आप नॉन-डेयरी जैसे बादाम के दूध या सॉय मिल्क का इस्तेमाल करें।
कुछ लोगों को नॉन-डेयरी मिल्क की चाय अच्छी नहीं लगती है, ऐसे में आप कम फैट कंटेंट वाला दूध चुनें। स्किम्ड मिल्क अगर ना भी अच्छा लगे, तो डबल टोन दूध का ऑप्शन हमेशा रहता है।
अगर आपको कोई मेजर हेल्थ इशू हो रहा है, तो आप डॉक्टरी सलाह के बाद ही अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करें।
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