
India's Hottest Chilli Name: खाने का स्वाद सभी मसालों के बाद भी अधूरा माना जाता है जब तक उसमें तीखापन न हो। खाने को स्वादिष्ट और चटपटा बनाने के लिए तीखेपन का खास-ख्याल रखते हैं। इसके लिए लाल मिर्च पाउडर, हरी मिर्च या कुटी मिर्च का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आप जानती हैं कि हमारे देश में कुछ ऐसी मिर्चें पाई जाती हैं जिसका नाम सुनते ही कान खड़े हो जाते हैं।
अब आप सोच रही होंगी कि फिर मिर्च के तीखेपन का पता कैसे लगाया जाता है, जब इसे खाने की हिम्मत नहीं होती है। मिर्च का तीखापन स्क्वॉड विल हीट यूनिट (SHU) में मापा जाता है और भारत की कुछ मिर्चें इस पैमाने पर दुनिया के टॉप चार्ट में शामिल हैं।
उत्तर-पूर्व की पहाड़ियों से लेकर दक्षिण के तटीय इलाकों तक, ये मिर्चें अपनी अलग पहचान रखती हैं। इन्हें खाना तो दूर, बिना ग्लव्स के छूना भी आपके हाथों में घंटों तक जलन पैदा कर सकता है। कहीं अगर आपने गलती से चेहरे या बॉडी पर मिर्च पकड़ने के बाद इसे हाथ पर लगा लिया तो पूरे मोहल्ले में दौड़ते फिरेंगी। चलिए जानते हैं भारत की उन मिर्चों के बारे में जो तीखेपन के लिए मशहूर हैं।

असम और उत्तर-पूर्व भारत की शान कही जाने वाली भूत जोलोकिया को घोस्ट पेपर के नाम से भी जाना जाता है। साल 2007 में इसे दुनिया की सबसे तीखी मिर्च के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। यह इतनी खतरनाक होती है कि इसका इस्तेमाल हाथी भगाने और चिली बम बनाने तक में किया जाता है। इसका एक छोटा सा टुकड़ा भी आपके पूरे शरीर में आग लगा देने के लिए काफी है। इसे छूने के बाद अगर गलती से हाथ आंखों पर लग जाए, तो आफत आ सकती है।
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आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से आने वाली तेजा मिर्च अपने नाम की तरह ही बहुत तेज होती है। यह मिर्च न केवल भारत में लोकप्रिय है। इसकी खासियत यह है तीखी होने के साथ-साथ गहरे लाल रंग की होती है।
दक्षिण भारतीय व्यंजनों, खासकर मांसाहारी करी और तीखी चटनी बनाने में इसका भरपूर इस्तेमाल किया जाता है। इसे हाथ में लेते ही इसकी तीखी गंध नाक में चढ़ने लगती है।

केरल और तमिलनाडु में पाई जाने वाली कांथारी मिर्च दिखने में बहुत छोटी और हल्की पीली होती है। इसे बर्ड्स आई चिली के नाम से भी जाना जाता है।
यह छोटी सी मिर्च मुंह में जाते ही करंट की तरह लगती है। इसकी खास बात यह है कि तीखी होने के बावजूद आयुर्वेद में इसके कई औषधीय फायदे बताए गए हैं।

राजस्थान के जोधपुर के पास मथानिया गांव में उगने वाली मथानिया मिर्च अपनी अलग ही धाक रखती है। यह मिर्च न कवेल तीखी बल्कि इसमें एक खास तरह की मिठास और खुशबू भी होती है। राजस्थान की मशहूर डिश लाल मास का गहरा लाल रंग और जानलेवा तीखापन इसी मिर्च की वजह से है। राजस्थान की चिलचिलाती धूप इस मिर्च को और भी ज्यादा तीखा और गहरा बना देती है।
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