
शिर्डी के साईं बाबा के प्रति करोड़ों लोगों की अटूट श्रद्धा है। उनके दरबार में अमीर-गरीब, राजा-रंक हर कोई एक समान भाव से नतमस्तक होता है। वैसे तो बाबा की भक्ति के लिए हर दिन शुभ माना जाता है, लेकिन गुरुवार का दिन साईं भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ती है, विशेष पालकी यात्राएं निकाली जाती हैं और भंडारों का आयोजन होता है। साईं बाबा ने हमेशा 'सबका मालिक एक' का संदेश दिया और मानवता की सेवा को ही सर्वोपरि माना। गुरुवार को बाबा की पूजा के पीछे धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक कारण छिपे हैं जो इस दिन को उनकी आराधना के लिए सबसे उत्तम बनाते हैं। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।
हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में गुरुवार का दिन 'गुरु' को समर्पित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन देवगुरु बृहस्पति की पूजा की जाती है। चूंकि साईं बाबा को उनके भक्त एक महान गुरु और आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानते हैं, इसलिए गुरु के दिन उनकी पूजा करना अत्यंत स्वाभाविक और फलदायी माना गया है। भक्त मानते हैं कि गुरुवार के दिन बाबा की आराधना करने से जीवन में गुरु की कृपा प्राप्त होती है और अज्ञान का अंधकार मिट जाता है।

कहते हैं कि जब साईं बाबा शिर्डी में सशरीर मौजूद थे, तब भी भक्त अक्सर गुरुवार के दिन विशेष प्रार्थनाएं लेकर उनके पास आते थे। बाबा ने कभी खुद को ईश्वर नहीं कहा, बल्कि हमेशा एक फकीर और मार्गदर्शक के रूप में रहे। भक्तों ने पाया कि गुरुवार को की गई सेवा और प्रार्थना से उन्हें विशेष मानसिक शांति और सुखद परिणाम मिलते हैं। समय के साथ यह एक परंपरा बन गई कि गुरुवार का दिन 'साईं का दिन' है।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बृहस्पति (गुरु) ग्रह ज्ञान, भाग्य और सुख-समृद्धि का कारक है। गुरुवार के दिन साईं बाबा की पूजा करने, साईं चरित्र का पाठ करने या व्रत रखने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है। इससे शिक्षा, करियर और पारिवारिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। बाबा की सादगी और उनके संदेशों को जीवन में उतारने के लिए यह दिन आत्म-चिंतन और आत्म-सुधार के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

साईं बाबा ने हमेशा भूखों को भोजन कराने और जरूरतमंदों की मदद करने की शिक्षा दी। गुरुवार के दिन साईं मंदिरों में खिचड़ी या बूंदी का प्रसाद बांटने की परंपरा है। भक्त मानते हैं कि इस दिन किया गया दान सीधे बाबा को स्वीकार होता है। गुरुवार के दिन 'साईं व्रत' रखना भी बहुत लोकप्रिय है जिसमें भक्त 9 गुरुवार तक श्रद्धा और सबुरी के साथ बाबा की उपासना करते हैं और अंतिम गुरुवार को गरीबों को भोजन कराकर व्रत का उद्यापन करते हैं।
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