
महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है, जो भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण भी करते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करके भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात शिवतत्व सबसे ज्यादा जागृत रहता है, इसलिए इस दिन की गई पूजा, जप और साधना का फल कई गुना ज्यादा मिलता है। इस साल महाशिवरात्रि 2026 पर विशेष शुभ मुहूर्त में शिवलिंग का जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। ऐसा कहा जाता है कि शिवलिंग का जलाभिषेक हमेशा सही समय पर करना शुभ माना जाता है और यदि आप जलाभिषेक के साथ गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करेंगी तो मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं और जीवन के कष्टों में कमी आ सकती है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया जलाभिषेक पापों का क्षय करता है और सुख-समृद्धि के द्वार खोलता है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कि महाशिवरात्रि के दिन किस मुहूर्त में जलाभिषेक करना सबसे शुभ होगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 05 बजकर 04 मिनट पर आरंभ होगी और इस तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 05 बजकर 34 मिनट पर होगा।
इस दौरान महाशिवरात्रि की पूजा में रात्रिकाल का चार प्रहर और निशीथ काल मान्य होगा और इस पर्व को मनाने के लिए उदया तिथि का नियम लागू नहीं होगा। इसी वजह से इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी की रात को मनाई जाएगी।

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महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त विशेष रूप से रात्रि के चार प्रहरों में माना जाता है। शास्त्रों की मानें तो महाशिवरात्रि की पूरी रात शिवपूजन के लिए पवित्र होती है, लेकिन निशीथ काल यानी कि मध्यरात्रि का समय जलाभिषेक के लिए सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।
महाशिवरात्रि के दिन पहले प्रहर में जल से, दूसरे प्रहर में दूध से, तीसरे प्रहर में दही या घी से और चौथे प्रहर में फिर से जल और गंगाजल से अभिषेक करना शुभ होगा। यदि पूरी रात पूजा संभव न हो, तो आप प्रदोष काल यानी कि शाम 06:10 बजे से रात 08:44 बजे के बीच शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकती हैं जो अत्यंत शुभ होगा।
| शुभ पहर | जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त |
| प्रदोष काल | 15 फरवरी, शाम 06:10 बजे से रात 08:44 बजे |
| प्रथम पहर की पूजा | 15 फरवरी, शाम 06 बजे से रात 09 बजे तक |
| द्वितीय पहर की पूजा | 15 फरवरी, रात 09 से 12 बजे तक |
| तृतीय पहर की पूजा | 15 फरवरी, रात 12 से 03 बजे तक |
| चतुर्थ पहर की पूजा | 16 फरवरी, प्रातः 03 से सुबह 6 बजे तक |
ऐसा माना जाता है कि शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा दृष्टि प्राप्त होती है और जीवन में सदैव सकारात्मकता बनी रहती है। जलाभिषेक का मतलब होता है जल से अभिषेक करना यानी कि शिवलिंग पर जल अर्पित करना। जलाभिषेक करने से भगवान शिव का आशीर्वाद भक्तों पर बना रहता है और जीवन में सुख-समृद्धि के साथ आरोग्य बना रहता है। यही नहीं यदि आप महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक करते हैं तो जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने में मदद भी मिलती है।
महाशिवरात्रि के दिन यदि आप जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करती हैं तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। जल अर्पित करते समय शिवलिंग पर बेलपत्र और कच्चा दूध भी अर्पित किया जा सकता है। यह भी बहुत फलदायी माना जाता है और जीवन की बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।
अगर आप भी महाशिवरात्रि के दिन शुभ मुहूर्त में जलाभिषेक करेंगी तो आपके जीवन में इसके लाभ दिखाई देंगे और जीवन की समस्त बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
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