
हिंदू धर्म में किसी भी अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है और इस दिन स्नान-दान करना मुख्य रूप से फलदायी माना जाता है। साथ ही, इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि आप इस तिथि पर पूर्वजों के लिए तर्पण और दान करती हैं तो किसी भी तरह के पितृ दोष को दूर किया जा सकता है। फाल्गुन अमावस्या फाल्गुन महीने में आती है और बहुत पुण्यकारी मानी जाती है। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करना भी पुण्यकारी माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो पितरों का पिंडदान करना फाल्गुन अमावस्या पर शुभ माना जाता है। जिस प्रकार किसी भी पूजा-पाठ का शुभ मुहूर्त होता है, वैसे ही पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए अमावस्या तिथि पर तर्पण का भी शुभ मुहूर्त होता है। आइए ज्योतिर्विद पंडित द्विवेदी से जानें कि इस साल फाल्गुन अमावस्या कब मनाई जाएगी और इसका क्या महत्व है। साथ ही, यह भी जानें कि पूर्वजों के लिए तर्पण करने का शुभ मुहूर्त क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन अमावस्या तिथि पूर्वजों को समर्पित होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से मिलने आते हैं और उनका तर्पण स्वीकार करते हैं। ज्योतिष की मानें तो जिनकी कुंडली में पितृ दोष होता है और उसकी वजह से बाधाएं आ रही होती हैं उनके लिए फाल्गुन अमावस्या की तिथि अत्यंत शुभ होती है और इसमें तर्पण आदि कार्य किए जाते हैं। यदि किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि का पता न हो तब भी यदि उनके लिए अमावस्या तिथि पर तर्पण किया जाता है तो समस्त पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है।
इस साल 2026 में 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लगेगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसकी शुरुआत दोपहर 3:26 बजे और समाप्ति शाम 7:57 बजे पर होगी। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए देश में सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण काल में वातावरण में विशेष प्रकार की ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। ऐसे समय में दान, जप और साधना का महत्व सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना बढ़ जाता है। सूर्य ग्रहण के दौरान किया गया दान पापों का नाश करता है, नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है, ग्रह दोषों से मुक्ति दिलाता है और व्यक्ति के जीवन में आर्थिक व आध्यात्मिक समृद्धि लाता है। साथ ही, इस दान से पितरों को भी शांति प्राप्त होती है। फाल्गुन अमावस्या और सूर्य ग्रहण का विशेष संयोग होने की वजह से इस दिन किया गया दान भी अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
सनातन धंर्म में किसी भी अमावस्या तिथि को महत्वपूर्ण बताया गया है और फाल्गुन महीने में पड़ने वाली यह तिथि दूसरों से अलग होती है। यदि आप इस दिन शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए दान-पुण्य और तर्पण आदि कार्य करती हैं तो जीवन में सदैव खुशहाली बनी रहती है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसे ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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