
भारत देश अपनी संस्कृति और पौराणिक कथाओं के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां पर स्थित मंदिरों के पीछे एक खास कहानी और मान्यता है। एक जगह नहीं बल्कि देश के अलग-अलग स्टेट में देवी-देवताओं के मंदिर बने हुए हैं। हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के मंदिर की खास मान्यता है। अब ऐसे में दुनिया भर से लाखों लोग आए दिन इन मंदिरों के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं। मंदिरों में भगवान की मूर्ति और प्रतिमा के साथ यहां पर प्रवेश द्वार से लेकर अंदर तक तमाम घंटियां लगी होती है। मंदिर पहुंचने के साथ प्रवेश द्वार पर लगी घंटी को बजाकर आगे बढ़ते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर मंदिर में घंटी क्यों लगाई जाती है। क्या इसके पीछे कोई उद्देश्य या फिर बेवजह लगाई जाती है। चलिए पंडित राघवेन्द्र तिवारी से जानते हैं इसके पीछे का कारण और महत्व-

मंदिर में घंटी लगाने के पीछे न केवल धार्मिक बल्कि आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक कारण शामिल है। देवी-देवताओं की आरती के समय तमाम प्रकार के वाद्य यंत्र बजाए जाते हैं। खासतौर से घंटी। पंडित जी के अनुसार बता दें कि मंदिर में जब घंटी बजाया जाता है तो इससे मंदिर के आसपास के वातावरण चैतन्य हो जाता है यानी जागृत हो जाता है। साथ ही साथ भगवान भी जागृत हो जाते हैं। मंदिर के आसपास के नकारात्मक ऊर्जाएं भी दूर हो जाती हैं और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घंटी बजाने से शरीर के अंदर की आत्मा भी जागृत हो जाती है। इतना ही बल्कि ऐसा कहा जाता है कि जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ, उस समय जो आवाज थी, वही आवाज घंटी की ध्वनि से भी निकलता है।
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मंदिर में लगी हुई घंटी की ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है। साथ ही वातावरण को शुद्ध बनाती है। इसके अलावा यह भक्तों के मन को शांत कर एकाग्र रहने में मदद करती है, जिससे वे पूजा में पूरी तरह लीन हो सकें। धार्मिक दृष्टि से, घंटी बजाना देवी-देवताओं का आह्वान है, जिससे उनकी उपस्थिति का बोध और आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसकी ध्वनि को 'ॐ' की ध्वनि के समान माना जाता है, जो हमें ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ती है। यह मन को बाहरी विचारों से विरक्त कर अंदर की शक्ति और आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर करती है, जिससे पूजा का अनुभव और भी पवित्र हो जाता है।
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