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Sheetala Ashtami Vrat Katha 2026: शीतला अष्टमी की यह कथा रोग-बीमारियां को करती है दूर, माता का प्राप्त होता है आशीर्वाद

Sheetala Ashtami Vrat Katha 2026: शीतला अष्टमी की पूजा रोग और बीमारियों को दूर करने के लिए होती है। खसरा और चेचक के दाने न हो इसलिए पूजन किया जाता है। आप भी अगर इस दिन शीतला माता की पूजा करती हैं, तो कथा को जरूर पढ़ें।
Editorial
Updated:- 2026-03-11, 05:11 IST

शीतला अष्टमी जिसे कई सारे लोग बसोड़ा कहते हैं। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है। साथ ही ठंडा खाना बनाया जाता है, ताकि माता को इसका भोग चढ़ाया जा सके। इसी खाने को घर के सभी सदस्य खाते हैं। आप भी अगर बसोड़े के दिन पूजा करती हैं, तो ऐसे में माता शीतला की कथा को जरूर पढ़ें। इससे आपके घर के सभी सदस्यों को रोग और बीमारियों से राहत मिल सकती है। आइए बताते हैं कौन सी कथा आप पढ़ सकती हैं।

शीतला अष्टमी की संपूर्ण कथा (Sheetala Ashtami Vrat Katha 2026)

एक समय की बात है, एक गांव में माता शीतला की पूजा सबसे ज्यादा की जाती है। वहां पर रहने वाले पुराने लोग उन्हें बहुत मानते थे, लेकिन जो ब्राह्मण के घर की बहुएं थी, वो इन सभी चीजों को नहीं मानती थी। ऐसे में वो शीतला अष्टमी के दिन भी ताजा खाना बनाकर वही भोग लगाती थी। ऐसे में ताजा भोजन के भोग से शीतला माता क्रोधित हो गई। उस घर में सभी को चेचक होने लगे। ये दाने ऐसे होते हैं, जिसमें दर्द के साथ-साथ काफी जलन होती है। ऐसे ही देखते-देखते उनके बच्चों को इसका नुकसान झेलना पड़ा। साथ ही इससे घर बर्बाद हो गया।

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जब इस बात का पता बुढ़िया को लगा, तो उसने अपनी बहुओं के साथ मिलकर नियमों का ध्यान रखकर इस व्रत को रखा। उन्होंने माता को ठंडे भोजन का भो लगाया। ऐसा इसलिए ताकि माता उनके घर को सुरक्षित रखें। इसके बाद उसकी बहूओं को अपनी गलतियों का अहसास हुआ और वो अपने बच्चों के शव को माता के पास लेकर गईं, जिनकी मृत्यृ चेचक के दानों की वजह से हो गई थी। उन्होंने माता से उसके लिए माफी मांगी। साथ ही अपनी भूल को स्वीकार किया।

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इसके बाद से शीतला अष्टमी के दिन ठंडे खाने का भोग लगाया जाता है। साथ ही इस दिन घर के चूल्हे को भी नहीं जलाया जाता है, ताकि बच्चों या घर के अन्य लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

इन बातों का रखें ध्यान

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और रात को बने हुए खाने का भोग ही माता को लगाएं।
  • आप इरात के बने बासी खाने को अपने घर के हर सदस्य को खिलाएं, ताकि चेचक या खसरा जैसी समस्या न हो।
  • पूजा में रोली की जगह हल्दी का इस्तेमाल करें, ताकि आपके बच्चों के जीवन में ठंडक बनी रहे।

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इस कथा को पढ़ने से आपको भी शीतला अष्टमी की महत्ता के बारे में पता चल जाएगा। साथ ही आपके जीवन की परेशानियां कम हो जाएंगी।

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Image credit-Freepik

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