
हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का पर्व बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन पूर्ण रूप से माता शीतला की पूजा के लिए समर्पित होता है। उन्हें रोगों और संक्रमण से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता शीतला की पूजा नियम से करने से घर-परिवार में फैलने वाले रोग और नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं। शीतला माता को कई रोगों से मुक्ति दिलाने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। उनकी पूजा करने से मुख्य रूप से बच्चों की सेहत अच्छी बनी रहती है और किसी भी बीमारी से बचने में मदद मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि यदि आप शीतला अष्टमी के दिन कुछ विशेष ज्योतिष उपाय आजमाएंगी तो आपको नकारात्मक ऊर्जा और दोषों से मुक्ति मिल सकती है। यही नहीं संतान की अच्छी सेहत के लिए भी ये उपाय कारगर हो सकते हैं। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कुछ उपायों के बारे में जो आप शीतला अष्टमी के दिन आजमा सकती हैं।

शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और शीतला माता का पूजन उन्हें बासी भोजन अर्पित करके करें। इस दिन आपको घर में और मंदिर में दोनों स्थानों पर शीतला माता की पूजा करनी चाहिए। माता का पूजन और माता के मंत्रों का जाप करने से पूरे साल घर के सदस्यों मुख्य रूप से संतान की सेहत अच्छी बनी रहती है।
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शीतला अष्टमी के दिन दान-पुण्य करना भी विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को यदि आप भोजन, कपड़े या दक्षिणा दान स्वरूप देती हैं तो यह बहुत शुभ हो सकता है और इससे माता का आशीर्वाद भी मिलता है। ऐसी मान्यता है कि जरूरतमंदों को दान करने से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार के सभी सदस्यों को सुख-समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करती हैं।

शीतला अष्टमी के दिन नीम के पेड़ की पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। नीम को एक ऐसे वृक्ष के रूप में पूजा जाता है जिसमें देवी का वास होता है। इसके लिए आप प्रातः स्नान आदि से मुक्ति होकर गुड़, चावल, हल्दी, लौंग और फूल लेकर नीम के पेड़ के पास जाएं। वहां सबसे पहले नीम के पेड़ को जल अर्पित करें और पेड़ की सात बार परिक्रमा करें। इसके बाद हाथ जोड़कर माता शीतला से प्रार्थना करें कि वो आपके जीवन को रोग मुक्ति करें और संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद प्रदान करें।

शीतला अष्टमी के दिन पूजा के बाद बच्चों के माथे पर हल्दी का टीका लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। हल्दी को शुद्धता और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन हल्दी का तिलक बच्चों के माथे पर लगाने से उन्हें किसी भी नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिल सकती है और बीमारियों से सुरक्षा भी मिलती है।
शीतला अष्टमी का पर्व स्वच्छता से जुड़ा होता है। इस दिन आपको विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आपके घर या मुख्य द्वार पर किसी भी प्रकार का कूड़ा-कचरा इकठ्ठा न हो। साफ-सफाई रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और बीमारियों का खतरा भी कम होता है। इसलिए इस दिन घर में विशेष रूप से स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। इसके साथ ही यह भी माना जाता है कि जिस घर में सफाई होती है उसी स्थान पर शीतला माता का वास होता है और गंदगी वाले स्थान से माता सदैव के लिए प्रस्थान कर जाती हैं।
यदि आप शीतला अष्टमी के दिन यहां बताए उपायों में से कोई एक भी आजमाएंगी तो इसका प्रभाव पूरे साल सकारात्मक रूप से देखने को मिलेगा और संतान की सेहत भी अच्छी बनी रहेगी। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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