
हिंदू धर्म में षटतिला एकादशी का व्रत न केवल उपवास और तिल के उपयोग के लिए जाना जाता है बल्कि इस दिन दीपदान का भी विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी की शाम को भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्वलित करने से जीवन का अंधकार दूर होता है। विशेष रूप से षटतिला एकादशी पर कलावे की बत्ती का दीपक जलाना अत्यंत फलदायी माना गया है। कलावा जिसे हम रक्षासूत्र भी कहते हैं, त्रिदेवों और त्रिदेवी की शक्ति का प्रतीक है। जब इसे घी के साथ दीपक में जलाया जाता है तो यह घर की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सुख-समृद्धि के द्वार खोलता है और भक्तों पर श्रीहरि की असीम कृपा बरसाता है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं षटतिला एकादशी के दिन कलावे की बत्ती का दीया जलाने के लाभ।
षटतिला एकादशी के दिन कलावे की बत्ती का दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि कलावा सूती धागे से बना होता है और इसमें लाल, पीला और केसरिया रंग शामिल होता है। लाल रंग शक्ति का, पीला रंग ज्ञान और केसरिया रंग त्याग का प्रतीक है।

भगवान विष्णु को पीला और लाल रंग अत्यंत प्रिय है। जब हम साधारण रूई की जगह कलावे की बत्ती का उपयोग करते हैं तो यह पूजा की पवित्रता और प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। इससे घर में सकारात्मक तरंगों का संचार होता है और वास्तु दोषों का निवारण होता है।
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इस विशेष दिन पर शाम के समय प्रदोष काल में एक साफ तांबे या मिट्टी का दीपक लें। इसमें गाय का शुद्ध घी भरें और कलावे के धागे की एक लंबी बत्ती बनाकर लगाएं। इस दीपक को भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने या तुलसी के पौधे के पास जलाएं।
दीपक जलाते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। अगर आप इसे तुलसी के पास रख रहे हैं तो ध्यान रखें कि दीपक के नीचे थोड़े अक्षत या तिल जरूर रखें क्योंकि दीपक को सीधे जमीन पर रखना उचित नहीं माना जाता।

मान्यता है कि षटतिला एकादशी पर कलावे की बत्ती का दीपक जलाने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। जो लोग आर्थिक तंगी या कर्ज से परेशान हैं उनके लिए यह उपाय रामबाण माना गया है। कलावे की बत्ती से निकलने वाली अग्नि घर के वातावरण को शुद्ध करती है।
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परिवार के सदस्यों के बीच जन्मे क्लेश को नष्ट करती है और यह ज्योति इस बात का प्रतीक है कि आपके जीवन में खुशहाली का प्रकाश बना रहेगा और भगवान विष्णु आपकी हर मनोकामना पूर्ण करेंगे। चूंकि यह षटतिला एकादशी है, इसलिए इस दीपक में चुटकी भर काले तिल अवश्य डालें।
तिल भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न माने गए हैं। घी के दीपक में काले तिल डालकर कलावे की बत्ती जलाने से पितृ दोष शांत होते हैं और कुंडली के ग्रहों की अशुभता दूर होती है। यह छोटा सा कार्य आपके जीवन में सौभाग्य और ऐश्वर्य लेकर आता है जिससे घर की बरकत बनी रहती है।
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