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Shattila Ekadashi Paran Muhurat 2026: षटतिला एकादशी का व्रत पारण का मुहूर्त और सरल विधि जानें

Shattila Ekadashi Vrat Paran Muhurat 2026: षटतिला एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त, हरि वासर का महत्व और व्रत खोलने की सरल विधि यहां जानें। एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का सही समय, व्रत पारण का शुभ समय, भगवान विष्णु की पूजा विधि और पंडित मनीष शर्मा द्वारा बताए गए खास नियम पढ़ें। सही मुहूर्त में व्रत पारण कर पुण्य लाभ और मनोकामना पूर्ति पाएं।
Editorial
Updated:- 2026-01-13, 14:01 IST

हिंदू धर्म में षटतिला एकादशी को बहुत ज्‍यादा पवित्र माना गया है। इस दिन भक्‍त भगवान श्री हरी विष्‍णु का व्रत रखते हैं और पूरे दिन उन्‍हीं के नाम का जाप करते हैं। यह व्रत बहुत ही विशेष होता है। मगर इसका पारण और भी ज्‍यादा खास होता है। जैसे शुभ मुहूर्त में व्रत का संकल्‍प लिया जाता है, वैसे ही व्रत के पारण का भी समय होता है। इस विषय में हमारी बातचीत मध्‍य प्रदेश, उज्‍जैन के ज्‍योतिषाचार्य एवं पंडित मनीष शर्मा जी से हुई है। वह कहते हैं, "हरि वासर में षटतिला एकादशी व्रत का पारण किया जाता है।"

हमने पंडित मनीष से विस्‍तार में हरी वासर के बारे में बातचीत की और जाना कि वर्ष 2026 में षटि‍तला एकादशी व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त क्‍या है।

षटितला एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त (Shattila Ekadashi Paran Muhurat 2026)

  • एकादशी तिथि का प्रारंभ 13 जनवरी, 2026 को दोपहर 3 बजकर 17 मिनट पर होगा । 
  • एकादशी तिथि समाप्‍त 14 जनवरी 2026 को शाम 5 बजकर 52 मिनट पर होगी।
  • षटितला एकादशी व्रत पारण का समय 15 जनवरी 2026 को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से लेकर 9 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।

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हरि वासर क्‍या होता है ?

हरि वासर यानि श्री हरि विष्‍णु भगवान का दिन । एकादशी का दिन पूरी तरह से भगवान विष्‍णु को समर्पित बताया गया है और एकादशी के व्रत का पारण जब किया जाता है तो वह हरि वासर कहलाता है। इस दौरान भगवान के भजन कीर्तन होते हैं और द्वादशी तिथि की पहली चौथाई अवधि जैसे ही समाप्‍ता होती है, भक्‍त अपने व्रत का पारण कर सकते हैं। यह बहुत ही पावन समय होता है। इस समय के दौरान आप भगवान के आगे जो भी इच्‍छा प्रकट करते हैं, वह उसे पूर्ण करते हैं और आपकी सारी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।

पंडित जी कहते हैं, "हरी वासर को लेकर लोगों में अलग-अलग बात प्रचलित है, मगर इस अवधि में एकादशी का व्रत खोला जा सकता है और अपनी भूल चूक के लिए भगवान श्री हरि विष्‍णु से माफी मांगी जा सकती है।"

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षटतिला एकादशी के व्रत की पारण विधि

षटतिला एकादशी के दिन व्रत रखना और उसका पारण करना दोनों की ही विधि बहुत ज्‍यादा आसान है। व्रत खोलने से पहले आपको निम्निलिखित बातों का ध्‍यान रखना चाहिए।

  • व्रत खोलने से पहले मंदिर की साफ-सफाई करें।
  • भगवान विष्‍णु के मंत्रों का जाप करें और विष्‍णु चालीसा भी पढ़ें।
  • इसके बाद भगवान को भोग चढ़ाकर, सात्विक भोजन ग्रहण कर अपना व्रत खोल लें।

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तो षटतिला एकादशी के व्रत का पारण करने का शुभ मुहूर्त क्‍या है, यह जानकारी हमने आपको ऊपर लेख में दे दी है। इस जानकारी के आधार पर आप इस पर्व को मना सकती हैं और व्रत का पारण कर सकती हैं। इसके साथ ही लेख पसंद आया हो तो इसे शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्‍स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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