
नए वर्ष 2026 में सबसे पहले एकादशी जो आने वाली है वह है षटतिला एकादशी। इस एकादशी में भगवान विष्णु के बैकुण्ड रूप की पूजा की जाती है। भगवान श्री विष्णु को तिल अति प्रिय हैं, इसलिए इस दिन जो भी भक्त पूजा या व्रत रखता है वह 6 प्रकार से तिल का प्रयोग करता है। इस त्योहार के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमने उज्जैन, मध्यप्रदेश के ज्योतिषाचार्य एवं पंडित मनीष शर्मा से बात की है। वह कहते हैं, "इस दिन तिल से स्नान करने से लेकिर तिल का दान करना और तिल खाना भी बहुत शुभ माना गया है।"
मगर षटतिला एकादशी है कब, इसे लेकर लोगों भी बहुत ज्यादा भ्रम है। कुछ का कहना है कि यह एकादशी 13 जनवरी को है तो कुछ 14 जनवरी को इसके होने की आशंका जता रहे हैं। ऐसे में एकादशी का व्रत कब रखा जाए और किसी शुभ मुहूर्त में इसकी पूजा की जाए? इस बारे में हमें पंडित जी विस्तार से बता रहे हैं।
षटतिला एकादशी 2026 इस वर्ष 14 जनवरी को मनाई जाएगी। आमतौर पर 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व होता है, ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि इस दिन एकादशी कैसे पड़ सकती है। दरअसल, हिंदू धर्म में व्रत और त्योहार तिथि के आधार पर तय किए जाते हैं, न कि केवल तारीख के अनुसार।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ 13 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 17 मिनट पर होगा, जबकि एकादशी तिथि का समापन 14 जनवरी 2026 को शाम 5 बजकर 52 मिनट पर होगा। इसी कारण इस बार 14 जनवरी को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
वहीं, कुछ पंचांगों के अनुसार एक अन्य गणना में एकादशी तिथि 14 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 15 जनवरी 2026 को सुबह 9 बजकर 21 मिनट तक मानी जा रही है। इसी वजह से इस वर्ष मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का विशेष संयोग बन रहा है। हालांकि, मकर संक्रांति इस बार 15 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।
षटतिला एकादशी के दिन आप ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 28 मिनट से लेकर 6 बजकर 22 तक पानी में तिल डालकर स्नान करें और उगते सूर्य को जल अर्पित कर भगवान विष्णु की पूजा करें। शुभ मुहूर्त पर भगवान विष्णु की पूजा करने से आपको बहुत अच्छे फल प्राप्त होते हैं।
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14 जनवरी 2026 को पड़ रही षटतिला एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग बन रहा है। यह दोनों ही योग बहुत ही शुभ माने जाते हैं । पंडित जी के अनुसार इन दोनों ही योग में आप कोई नया कार्य शुरू कर सकती हैं, कोई धार्मिक अनुष्ठान करा सकती हैं। इतना ही नहीं, अगर आप इस योग में कुछ नया सामान खरीदना चाहती हैं, तो उसके लिए भी इसे बहुत अधिक शुभ माना जाता है।
हिंदू धर्म आधार पर ब्रह्म मुहूर्त से ही आपका वार्त शुरू हो जाएगा और एकादशी के समाप्त होने पर आप इसका पारण कर सकती हैं, जो कि 15 जनवरी को सुबह 9 बजे के करीब होगा। यह व्रत फलाहार रखा जाा सकता है, बस इस पर्व पर तिल का सेवन जरूर करें। इससे आपको शुभ फल प्राप्त होंगे।
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तो षटतिला एकादशी कब है और इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, यह जानकारी हमने आपको ऊपर लेख में दे दी है। इस जानकारी के आधार पर आप इस पर्व को मना सकती हैं। इसके साथ ही लेख पसंद आया हो तो इसे शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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