
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है और माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली षटतिला एकादशी का स्थान बेहद खास माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना मुख्य रूप से तिल के माध्यम से की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस एकादशी पर तिल का छह प्रकार से उपयोग करने का विधान है जिससे जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और श्रद्धापूर्वक पूजन करते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन विधि-विधान से पूजन और विशेष भोग अर्पण करता है उसे मोक्ष और वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से विस्तार में।
षटतिला एकादशी के नाम में ही तिल का महत्व छिपा है। इस दिन भगवान विष्णु को तिल के लड्डू का भोग लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। सफेद तिल को भूनकर गुड़ या चीनी के साथ बनाए गए ये लड्डू न केवल शुद्ध होते हैं बल्कि भगवान को अत्यंत प्रिय भी हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन तिल का भोग लगाने से व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

भगवान विष्णु की पूजा पंचामृत के बिना अधूरी मानी जाती है। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से बना पंचामृत भगवान को अर्पित करने से वे अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं। षटतिला एकादशी पर इस पंचामृत में तुलसी का पत्ता डालना अनिवार्य है। ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़ी जाती, इसलिए इसे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए। तुलसी युक्त पंचामृत का भोग लगाने से घर के क्लेश दूर होते हैं।
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साधारण पंजीरी के बजाय इस विशेष दिन पर तिल मिश्रित पंजीरी का भोग लगाना बहुत शुभ होता है। धनिये या आटे की पंजीरी में भुने हुए तिल मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। यह भोग भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी को भी प्रिय है। इस भोग को अर्पण करने से भक्त की आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और उसे आरोग्य या अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत प्रिय है, इसलिए उन्हें पीतांबर भी कहा जाता है। षटतिला एकादशी पर उन्हें केले, आम या पीले रंग की मिठाई जैसे बेसन के लड्डू या केसरिया बर्फी का भोग जरूर लगाएं। पीला रंग ज्ञान और गुरु का प्रतीक है। इस रंग के खाद्य पदार्थ अर्पित करने से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
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दूध और चावल की खीर तो अक्सर बनती है, लेकिन षटतिला एकादशी पर तिल की खीर का विशेष महत्व है। दूध में कुटे हुए तिल और मेवे डालकर बनाई गई खीर का भोग लगाने से पूर्वजों को भी शांति मिलती है। यह भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में बांटने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।
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image credit: herzindagi
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