
रथ सप्तमी जिसे 'सूर्य जयंती' के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में भगवान सूर्य को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव ने अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड को आलोकित करना शुरू किया था, इसीलिए इसे सूर्य देव के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन आरोग्य, प्रकाश और नई ऊर्जा का प्रतीक है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने और पवित्र नदियों में स्नान करने से मनुष्य के सभी शारीरिक रोग दूर होते हैं और पापों से मुक्ति मिलती है। किसान इस दिन को फसल के मौसम की शुरुआत के रूप में देखते हैं और भक्त सूर्य की किरणों के माध्यम से सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करते हैं। ऐसे में आइये जानते हैं वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से कि इस साल रथ सप्तमी कब मनाई जाएगी, क्या है रथ सप्तमी का शुभ मुहूर्त और महत्व?
वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में माघ शुक्ल सप्तमी तिथि की शुरुआत 24 जनवरी 2026 को शनिवार के दिन रात 12 बजकर 39 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 25 जनवरी 2026 को रविवार के दिन रात 11 बजकर 10 मिनट पर होगा।

ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, रथ सप्तमी का व्रत और पूजन 25 जनवरी को किया जाएगा। इसके अलावा, रथ सप्तमी का दान भी इसी दिन होगा और यहां तक की सूर्य दोष निवारण अगर आप कोई पूजा कराने की सोच रहे हैं तो यह दिन सबसे उत्तम है।
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रथ सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान का विशेष महत्व होता है। ऐसे में 25 जनवरी को स्नान के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 26 मिनट से सुबह 07 बजकर 13 मिनट तक है। वहीं, सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए शुभ समय सुबह 7 बजे का है।
अगर आप सूर्य दोष के निवारण के लिए कोई पूजा कर रहे हैं या फिर किसी भी पकार का कोई अन्य धार्मिक कार्य रथ सप्तमी के दिन कर रहे हैं तो इसके लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक का मौजूद है।
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रथ सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अद्भुत लाभ मिलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव 'आरोग्य' के देवता हैं, इसलिए इस दिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देने से गंभीर शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

स्वास्थ्य के साथ-साथ रथ सप्तमी का पूजन व्यक्ति के आत्मविश्वास, यश और मानसिक शांति में भी वृद्धि करता है। जो लोग इस दिन सच्चे मन से सूर्य देव की आराधना और 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करते हैं, उनके जीवन से अंधकार और नकारात्मकता दूर होती है।
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