
सभी घरों में नियमित रूप से पूजा की जाती है और पूजा के कुछ विशेष नियम भी बनाए गए हैं जिनका पालन करने से पूजा का पूर्ण फल भी मिलता है। पूजा को भगवान से जुड़ने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक माध्यम माना जाता है। पूजा में कई तरह की सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है और उनका अपना अलग महत्व होता है। पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुएं अत्यंत पवित्र होती हैं और उन्हें ईश्वर को समर्पित किया जाता है। पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुओं में से कुछ चीजें भगवान को एक बार अर्पित करने के बाद भी पवित्र बनी रहती हैं, जबकि कुछ ऐसी सामग्रियां होती हैं जिनका पूजा में एक बार इस्तेमाल होने के बाद इनका पुनः उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसे में आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानते हैं कि पूजा में किन वस्तुओं का पुनः उपयोग किया जा सकता है और साथ ही, उन वस्तुओं के बारे में भी जानें जिन्हें पूजा में पुनः उपयोग करना शुभ नहीं माना जाता है।
अगर हम पूजा की चीजों की बात करें तो कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका आप दोबारा इस्तेमाल भी कर सकती हैं। इसमें पूजा के बर्तनों से लेकर भगवान की मूर्तियां तक शामिल होती हैं। आइए जानें कुछ अन्य चीजों के बारे में-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में इस्तेमाल होने वाले चांदी, पीतल या तांबे के बर्तनों का दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी प्रकार, भगवान की मूर्ति, घंटी, शंख, माला और आसन का भी बार-बार पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। नियमित पूजा के बाद इन वस्तुओं को अच्छी तरह से साफ करके रख दिया जाता है और अगले दिन आप इन चीजों का फिर से इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके साथ ही भगवान के वस्त्र भी धोने के बाद दोबारा इस्तेमाल में लाए जा सकते हैं।
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हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत पवित्र पौधे के रूप में पूजा जाता है और इसे विशेष महत्व दिया जाता है। तुलसी की माता के रूप में भी पूजा की जाती है। इतना ही नहीं, तुलसी के पत्तों का उपयोग भी पूजा-पाठ में किया जाता है। मुख्य रूप से विष्णु जी की पूजा में तुलसी का अवश्य इस्तेमाल होता है। ऐसे में मान्यताओं के अनुसार, तुलसी कभी अशुद्ध या अपवित्र नहीं होती है। इसलिए, यदि किसी कारणवश नई तुलसी की पत्तियां उपलब्ध न हों, तो आप विष्णु जी में पहले से अर्पित की गई तुलसी को पानी से धोकर दोबारा इस्तेमाल में ला सकती हैं।
भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। शिवपुराण में इस बात का जिक्र है कि बेलपत्र 6 महीने तक बासी नहीं होता। शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने के बाद भी इसका पुनः उपयोग किया जा सकता है। हालांकि बेलपत्र का उपयोग करते समय आपको इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि वह कहीं से टूटा न हो और ऐसा ही बेलपत्र अर्पित करना चाहिए जिसमें 3 पत्ते मौजूद हों।
पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका आपको भूलकर भी दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आइए जानें उनके बारे में-

पूजा में भगवान को अर्पित किया गया भोजन, प्रसाद, जल, फूल और मालाएं आपको कभी भी दोबारा पूजा में प्रयोग नहीं करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि एक बार ये वस्तुएं भगवान को समर्पित हो जाती हैं, तो इनकी पवित्रता पूजा के लिए समाप्त हो जाती है। दोबारा इनका प्रयोग करने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है।
पूजा में भगवान को लगाए गए चंदन, कुमकुम और धूप का आपको दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये वस्तुएं एक बार पूजा में इस्तेमाल होने के बाद अपनी शुद्धता खो देती हैं, इसलिए इन्हें दोबारा उपयोग करना शुभ नहीं माना जाता है।
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पूजा के दौरान जलाए गए दीपक में बचा हुआ तेल या घी आपको दोबारा पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, पूजा में चढ़ाए गए नारियल को भी दोबारा पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
यदि आप नियमित पूजा में यहां बताई बातों का ध्यान रखती हैं तो आपके जीवन में सदैव खुशहाली बनी रहती है और पूजा का पूर्ण फल भी मिलता है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसे ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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