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Papmochani Ekadashi Vrat Katha 2026: बड़े से बड़े पापों का होगा नाश, बस एक बार पढ़ लें यह पापमोचनी व्रत कथा

Papmochani Ekadashi Vrat Katha: पापमोचनी एकादशी बेहद शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। ऐसे में अगर आप भी इस दिन का व्रत रख रही हैं, तो इसमें कथा जरूर पढ़ें, ताकि आपको पापों से मुक्ति प्राप्त हो सके।
Editorial
Updated:- 2026-03-15, 05:06 IST

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत सबसे शुभ माना जाता है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पापमोचनी एकादशी आती है। इसके नाम से ही पता चलता है कि इसका अर्थ होता है पाप से मुक्ति। ऐसे में अगर आप भी चाहती हैं कि आपके द्वारा किए गए कर्म अच्छे हो सके। इसके लिए आप पापमोचनी एकादशी का व्रत रख सकती हैं और इस दिन खास तरह की कथा को जरूर पढ़ें, ताकि आपके जीवन की सभी परेशानियां दूर हो सके। आइए इस दिन की संपूर्ण कथा आपको बताते हैं।

पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा (Papmochani Ekadashi Vrat Katha 2026)

प्राचीन काल की कथा है कि च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी वन में कठिन तपस्या कर रहे थे। उनकी तपस्या की शक्ति से देवराज इंद्र भयभीत हो गए और उन्होंने तपस्या भंग करने के लिए मंजुघोषा नामक अप्सरा को भेजा। मंजुघोषा ने अपनी सुंदरता और नृत्य से मेधावी मुनि को मोहित कर लिया। काम के वशीभूत होकर मेधावी मुनि अपनी तपस्या की मर्यादा भूल गए और उस अप्सरा के साथ कई वर्षों तक भोग-विलास में मग्न रहे। जब वर्षों बाद उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्हें पता चला कि उनकी तपस्या नष्ट हो चुकी है, तो उन्हें स्वयं पर बहुत पश्चाताप हुआ। उन्होंने क्रोध में आकर मंजुघोषा को 'पिशाचनी' बनने का श्राप दे दिया।

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मंजुघोषा भयभीत होकर मुनि के चरणों में गिर पड़ी और क्षमा याचना करने लगी। तब मुनि ने दया भाव दिखाते हुए उसे उद्धार का मार्ग बताया। मेधावी मुनि ने कहा हे अप्सरा, यदि तुम चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी का विधि-विधान से व्रत करोगी, तो तुम्हारे समस्त पापों का नाश हो जाएगा और तुम पुनः अपने दिव्य रूप को प्राप्त करोगी। केवल मंजुघोषा ही नहीं, मेधावी मुनि स्वयं भी अपने पिता च्यवन ऋषि के पास गए और अपने पाप का प्रायश्चित पूछा। पिता ने उन्हें भी इसी 'पापमोचनी एकादशी' का व्रत रखने की सलाह दी। मुनि मेधावी और अप्सरा मंजुघोषा, दोनों ने पूरी श्रद्धा से इस व्रत का पालन किया। परिणाम स्वरूप, अप्सरा पिशाच योनि से मुक्त होकर स्वर्ग चली गई और मेधावी मुनि का तेज वापस लौट आया और वे पापमुक्त हो गए।

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कैसे करें पूजा और कथा का पाठ?

  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद व्रत कथा से इस कहानी को पढ़ें और मन में विश्वास रखें कि भगवान आपके ऊपर आशीर्वाद बनाएं रखेंगे।
  • इसके बाद किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न या पीले वस्त्र दान करें।

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पापमोचनी एकादशी हमें यह सिखाती है कि मनुष्य से गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन उन गलतियों का प्रायश्चित करना और ईश्वर की शरण में जाना ही धर्म है। यह व्रत मानसिक शांति प्रदान करता है और नकारात्मक कर्मों के बोझ को कम कर जीवन में नई शुरुआत करने की ऊर्जा देता है। यदि आप भी अपने जीवन के कष्टों और पापों से मुक्ति चाहते हैं, तो 2026 में आने वाली पापमोचनी एकादशी पर इस कथा का पाठ अवश्य करें। भगवान विष्णु की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होगा।

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Image credit-Freepik

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