
नवरात्रि के सातवें दिन, मां कालरात्रि की विशेष पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन मां को नीले वस्त्र अर्पित करने चाहिए और अपराजिता का फूल चढ़ाना चाहिए। मां कालरात्रि भय से मुक्ति प्रदान करती हैं। ऐसे में ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं मां कालरात्रि की पूजा सामग्री, पूजा विधि, मंत्र, आरती और शुभ रंग के बारे में विस्तार से।

मां कालरात्रि का शरीर घने अंधकार की तरह एकदम काले रंग का है। उनके कृष्णवर्ण होने के कारण ही उन्हें कालरात्रि कहा जाता है। इसी कारण मां कालरात्रि का प्रिय रंग भी काला और नीला माना जाता है। नवरात्रि की महासप्तमी के दिन देवी कालरात्रि की पूजा में नीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह रंग निर्भयता का प्रतीक होता है।
नवरात्रि के सातवें दिन, मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। इस पूजा की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके और मां कालरात्रि का ध्यान करके होती है। फिर, पूजा स्थल को स्वच्छ किया जाता है और एक चौकी स्थापित की जाती है, जिस पर मां कालरात्रि की प्रतिमा रखी जाती है। यदि घर में पहले से ही दुर्गा मां की प्रतिमा है, तो लौंग को मां काली के प्रतीक के रूप में चौकी पर रखा जा सकता है।
इसके बाद, मां को गंगाजल से स्नान कराया जाता है और नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। फिर फल, फूल, सुपारी, धनिया, अक्षत, और सिंदूर जैसी सामग्रियां अर्पित की जाती हैं। माता के सामने कपूर जलाया जाता है और मंत्रों का जाप किया जाता है। फिर भोग लगाया जाता है, घी का दीपक जलाया जाता है और आरती गाई जाती है। अंत में, भोग को प्रसाद के रूप में परिवार और आस-पास के घरों में बांटा जाता है।

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन भक्तों को मां कालरात्रि के निम्न मंत्रों का जाप करना चाहिए— 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः', 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे', 'या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥'। इसके अतिरिक्त, मां कालरात्रि के स्वरूप का वर्णन करते हुए भी एक श्लोक है जिसका जाप करना शुभ होता है।
यह श्लोक कुछ इस प्रकार से है- 'एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥' का जाप भी किया जाता है। इन मंत्रों के उच्चारण से मां कालरात्रि प्रसन्न होकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं और सभी प्रकार के भय, नकारात्मक शक्तियों तथा बाधाओं का नाश करती हैं।
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कालरात्रि जय जय महाकाली काल के मुंह से बचाने वाली दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतारा पृथ्वी और आकाश पर सारा महाकाली है तेरा पसारा
खंडा खप्पर रखने वाली दुष्टों का लहू चखने वाली कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा सभी देवता सब नर नारी गावे
स्तुति सभी तुम्हारी रक्तदंता और अन्नपूर्णा कृपा करे,तो कोई भी दुख ना ना कोई चिंता रहे।
ना बीमारी ना कोई गम ना संकट भारी उस पर कभी कष्ट ना आवे
महाकाली मां जिसे बचावे तू भी 'भक्त' प्रेम से कह कालरात्रि मां तेरी जय।
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