
मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है जिसका मुख्य महत्व मौन रहकर आत्मचिंतन और भक्ति करने में निहित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों विशेषकर गंगा में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य और पितरों के तर्पण का भी विशेष फल मिलता है जिससे घर में सुख-शांति आती है। कहा जाता है कि इस दिन मौन व्रत रखने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और व्यक्ति का मन शांत व एकाग्र होता है, इसलिए इसे माघ अमावस्या के साथ-साथ मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार के दिन पड़ रही है। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें बताया कि इस दिन पितरों की आरती अवश्य करनी चाहिए, इससे पितृ प्रसन्न होकर कृपा बरसाते हैं।
जय जय पितरजी महाराज,मैं शरण पड़यो हूँ थारी।
शरण पड़यो हूँ थारी बाबा,शरण पड़यो हूँ थारी॥
आप ही रक्षक आप ही दाता,आप ही खेवनहारे।
मैं मूरख हूँ कछु नहि जाणू,आप ही हो रखवारे॥ जय जय पितरजी महाराज।

आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,करने मेरी रखवारी।
हम सब जन हैं शरण आपकी,है ये अरज गुजारी॥
जय जय पितरजी महाराज।
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देश और परदेश सब जगह,आप ही करो सहाई।
काम पड़े पर नाम आपको,लगे बहुत सुखदाई॥
जय जय पितरजी महाराज।
भक्त सभी हैं शरण आपकी,अपने सहित परिवार।
रक्षा करो आप ही सबकी,रटूँ मैं बारम्बार॥
जय जय पितरजी महाराज।
मौनी अमावस्या पर शाम के समय घर के दक्षिण कोने में या घर के मंदिर के पास पितरों के नाम का पूजन करना चाहिए। सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाएं और उस पर अपने पूर्वजों की तस्वीर स्थापित करें। तस्वीर के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। ध्यान रहे कि पितरों के लिए जलाए गए दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर होनी चाहिए क्योंकि यह दिशा पितरों की मानी जाती है।

आरती शुरू करने से पहले एक लोटे में जल लेकर उसमें थोड़े काले तिल, सफेद फूल और गंगाजल मिलाकर अर्पित करें। इसके बाद कपूर या घी के दीपक से पितृ देव की आरती करें। आरती के दौरान मन ही मन उनसे अपनी गलतियों की क्षमा मांगें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। अंत में पितरों को सात्विक भोजन या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
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आरती और पूजन के बाद किसी जरूरतमंद को सफेद खाद्य पदार्थ जैसे चावल, दूध, चीनी या सफेद वस्त्र का दान जरूर करें। ऐसा माना जाता है कि दान का पुण्य सीधे पितरों को मिलता है और वे तृप्त होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, जब तक मौनी अमावस्या के दिन दान का विधान संपन्न न हो तब तक अमावस्या की पूजा पूरी नहीं मानी जाती है।
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image credit: herzindagi
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