Fri Feb 13, 2026 | Updated 03:36 AM IST
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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर बन रहा है सर्वार्थ सिद्धि योग, शिवलिंग पूजा की विधि और पूजन सामग्री समेत पर्व से जुड़ी खास बातें

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग के कारण विशेष है, जो पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक है, जो आध्यात्मिक जागरण और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र चढ़ाकर सुख-शांति की कामना करते हैं। 
Editorial
Updated:- 2026-02-12, 18:56 IST

महाशिवरात्रि 2026 इस वर्ष बेहद खास मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो पूजा-पाठ, मंत्र जाप, रुद्राभिषेक और विशेष साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को ऐसा शुभ समय माना गया है, जिसमें किए गए धार्मिक कार्य कई गुना फल देते हैं।

महाशिवरात्रि को 'भगवान शिव की महान रात्रि' कहा जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक है और आध्यात्मिक जागरण, आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन रात्रि में भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा हेतु विष का पान किया था और इसी दिन उनका पार्वती जी के साथ विवाह भी संपन्न हुआ। इसलिए यह पर्व भक्ति, समर्पण और तपस्या का अद्भुत संगम माना जाता है।

देशभर में इस दिन मंदिरों में विशेष सजावट, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और जागरण का आयोजन किया जाता है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भगवान शिव से सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है, कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख एवं परिवार की मंगलकामना के लिए विशेष रूप से व्रत रखती हैं।

महाशिवरात्रि कब है? (Mahashivratri Kab Hai 2026)

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। हिंदू परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि उस दिन मनाई जाती है, जब कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि मध्यरात्रि (निशिता काल) में पड़ती है।

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महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त (Mahashivratri Puja Muhurat 2026)

विवरण तिथि  समय
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ 15 फरवरी 2026 शाम 05:04 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त 16 फरवरी 2026 शाम 05:34 बजे
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय 15 फरवरी 06:11 PM से 09:23 PM
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय 15 फरवरी 09:23 PM से 12:35 AM
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय 16 फरवरी 12:35 AM से 03:47 AM
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय 16 फरवरी 03:47 AM से 06:59 AM
निशिता काल पूजा समय 16 फरवरी 12:09 AM से 01:01 AM
शिवरात्रि पारण समय 16 फरवरी  06:59 AM से 03:24 PM

यह भी पढ़ें- Mahashivratri Date 2026: 15 या 16 फरवरी? जानें सही तिथि, निशिता काल और चारों प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त

  • वैसे तो महाशिवरात्रि पर सबसे ज्‍यादा निशिता काल की पूजा को महत्‍व दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस समय की जाने वाली पूजा से मनचाहा फल प्राप्‍त होता है, लेकिन इस महाशिवारात्रि पर 4 प्रहर की पूजा का अलग ही महत्व है। इसके बारे में हमें पंडित सौरभ बता रहे हैं।
  • प्रथम प्रहर की पूजा बेहद शुभ होती है और यह पूजा ऐसे लोगों के लिए खास होती है, जो किसी रोग से पीड़ि‍त होते हैं। इस समय पूजा करने से सुख-समृद्धि प्राप्‍त होती है।
  • द्वितीय प्रहर की पूजा में शिवलिंग का दही से अभिषेक करना चाहिए। इससे पैसों से जुड़ी समस्‍याएं दूर होती हैं।
  • अगर आप तृतीय प्रहर की पूजा करती हैं, तो गाय के घी से आपको शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इससे किसी भी काम में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
  • चौथे प्रहर की पूजा भी विशेष होती है। इस समय पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है, इतना ही नहीं मान-सम्‍मान भी बढ़ता है।

शिवलिंग पूजा विधि (Mahashivratri Puja Vidhi 2026)

महाशिवरात्रि के दिन इस विधि‍ से पूजा करें।

सुबह की तैयारी

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें।

शिवलिंग का अभिषेक

  • शिवलिंग पर क्रमशः जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और चीनी (पंचामृत) से अभिषेक करें।

पूजन सामग्री अर्पित करें

  • बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन, फल, फूल आदि अर्पित करें।

मंत्र जाप

  • ''ॐ नमः शिवाय'' मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी अत्यंत लाभकारी है।

रात्रि जागरण

  • पूरी रात शिव भजन, ध्यान और जप करें।

व्रत पारण

  • अगले दिन सूर्योदय के बाद हल्का सात्विक भोजन कर व्रत खोलें।

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महाशिवरात्रि पूजन सामग्री लिस्ट (Mahashivratri Puja Samagri List)

महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर विशेष रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से की गई पूजा और अभिषेक से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। यदि आप महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का अभिषेक करने जा रही हैं, तो नीचे दी गई पूजन सामग्री तैयार रखें।

अभिषेक में इस्‍तेमाल होने वाली सामग्री

  • शुद्ध जल- अभिषेक की शुरुआत शुद्ध जल से की जाती है। यह पवित्रता और आत्मशुद्धि का प्रतीक है और शिवलिंग को स्नान कराया जाता है।
  • दूध- भगवान शिव को दूध अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • दही- दही शांति और संतुलन का प्रतीक है। इसका अभिषेक मानसिक शुद्धि और स्थिरता देता है।
  • शहद- शहद मधुरता और समृद्धि का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से जीवन में मिठास और सौभाग्य की कामना की जाती है।
  • गंगाजल- गंगाजल को अत्यंत पवित्र माना गया है। इससे अभिषेक करने पर दोषों का नाश और पापों से मुक्ति मिलती है।
  • घी- घी का उपयोग दीपक जलाने में किया जाता है। यह वातावरण को शुद्ध और पूजा को पूर्ण बनाता है।
  • बेलपत्र- बेलपत्र भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय हैं। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र त्रिदेव और त्रिगुणों का प्रतीक माना जाता है।
  • चंदन- चंदन का लेप शिवलिंग पर लगाने से शांति, ठंडक और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • फूल- लाल या सफेद पुष्प अर्पित किए जाते हैं। बेलपत्र के साथ पुष्प चढ़ाना विशेष शुभ माना गया है।
  • फल- केले, नारियल, पपीता आदि फल अर्पित कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
  • धतूरा और भांग- ये दोनों भगवान शिव को प्रिय माने जाते हैं और विशेष रूप से महाशिवरात्रि पर अर्पित किए जाते हैं।

विधिपूर्वक और श्रद्धा भाव से की गई पूजा भगवान शिव को अति प्रिय होती है। महाशिवरात्रि के दिन सच्चे मन से किया गया जलाभिषेक जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

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महाशिवरात्रि व्रत कथा (Mahashivratri Vrat Katha 2026)

पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। एक अन्य मान्यता यह भी है कि इसी रात्रि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया था, जिससे संसार की रक्षा हुई। इसलिए, यह दिन बुराई और अज्ञान पर विजय का प्रतीक माना जाता है।

कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह वह रात भी है जब भगवान शिव ने सृष्टि के निर्माण, पालन और संहार का तांडव नृत्य किया था।

महाशिवरात्रि पर दान

इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि के दिन आप इन चीजों का दान कर सकते हैं।

  • काले तिल
  • वस्त्र
  • अन्न
  • गौ सेवा
  • जरूरतमंद को भोजन

महाशिवरात्रि के विशेष उपाय

इस दिन आप रुद्राभिषेक करा सकते हैं।

  • महामृत्युंजय मंत्र का 108 या 1008 बार जाप करें।
  • शिव मंदिर में घी का दीपक जलाएं।
  • यह व्रत कुंवारी लड़कियां योग्य वर के लिए रख सकती हैं।

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महाशिवरात्रि अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देती है। यह आत्मचिंतन, साधना और आत्म शुद्धि का पर्व है। इस दिन किया गया जप-तप कई गुना फलदायी माना जाता है।

भक्तों का विश्वास है कि इस पावन रात्रि में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, वैवाहिक सुख मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

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 Image Credit: Shutterstock

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