
महाशिवरात्रि 2026 इस वर्ष बेहद खास मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो पूजा-पाठ, मंत्र जाप, रुद्राभिषेक और विशेष साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को ऐसा शुभ समय माना गया है, जिसमें किए गए धार्मिक कार्य कई गुना फल देते हैं।
महाशिवरात्रि को 'भगवान शिव की महान रात्रि' कहा जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक है और आध्यात्मिक जागरण, आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन रात्रि में भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा हेतु विष का पान किया था और इसी दिन उनका पार्वती जी के साथ विवाह भी संपन्न हुआ। इसलिए यह पर्व भक्ति, समर्पण और तपस्या का अद्भुत संगम माना जाता है।
देशभर में इस दिन मंदिरों में विशेष सजावट, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और जागरण का आयोजन किया जाता है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भगवान शिव से सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है, कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख एवं परिवार की मंगलकामना के लिए विशेष रूप से व्रत रखती हैं।
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। हिंदू परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि उस दिन मनाई जाती है, जब कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि मध्यरात्रि (निशिता काल) में पड़ती है।

| विवरण तिथि | समय |
| चतुर्दशी तिथि प्रारंभ 15 फरवरी 2026 | शाम 05:04 बजे |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त 16 फरवरी 2026 | शाम 05:34 बजे |
| रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय 15 फरवरी | 06:11 PM से 09:23 PM |
| रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय 15 फरवरी | 09:23 PM से 12:35 AM |
| रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय 16 फरवरी | 12:35 AM से 03:47 AM |
| रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय 16 फरवरी | 03:47 AM से 06:59 AM |
| निशिता काल पूजा समय 16 फरवरी | 12:09 AM से 01:01 AM |
| शिवरात्रि पारण समय 16 फरवरी | 06:59 AM से 03:24 PM |
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महाशिवरात्रि के दिन इस विधि से पूजा करें।
सुबह की तैयारी
शिवलिंग का अभिषेक
पूजन सामग्री अर्पित करें
मंत्र जाप
रात्रि जागरण
व्रत पारण
महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर विशेष रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से की गई पूजा और अभिषेक से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। यदि आप महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का अभिषेक करने जा रही हैं, तो नीचे दी गई पूजन सामग्री तैयार रखें।
विधिपूर्वक और श्रद्धा भाव से की गई पूजा भगवान शिव को अति प्रिय होती है। महाशिवरात्रि के दिन सच्चे मन से किया गया जलाभिषेक जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। एक अन्य मान्यता यह भी है कि इसी रात्रि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया था, जिससे संसार की रक्षा हुई। इसलिए, यह दिन बुराई और अज्ञान पर विजय का प्रतीक माना जाता है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह वह रात भी है जब भगवान शिव ने सृष्टि के निर्माण, पालन और संहार का तांडव नृत्य किया था।
इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि के दिन आप इन चीजों का दान कर सकते हैं।
इस दिन आप रुद्राभिषेक करा सकते हैं।
महाशिवरात्रि अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देती है। यह आत्मचिंतन, साधना और आत्म शुद्धि का पर्व है। इस दिन किया गया जप-तप कई गुना फलदायी माना जाता है।
भक्तों का विश्वास है कि इस पावन रात्रि में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, वैवाहिक सुख मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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