Fri Feb 13, 2026 | Updated 03:36 AM IST
Baidyanath Jyotirlinga,Mahashivratri Deoghar

रेशमी धागे से गौरी शंकर का गठबंधन, कामना लिंग का किया जाता है जलाभिषेक; कुछ इस तरीके से मनाई जाती है बैद्यनाथ में महाशिवरात्रि

Baidyanath Jyotirlinga Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में खास धूम देखने को मिलती हैं। इसी में से एक है झारखंड का देवघर बैद्यनाथ है, जो न केवल शिव का निवास नहीं बल्कि शक्तिपीठ भी है।
Editorial
Updated:- 2026-02-12, 18:31 IST

Baidyanath Jyotirlinga Mahashivratri Kaisi Manayi Jati Hai: महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को पड़ रहा है। इस मौके पर भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं। साथ ही जगह-जगह पर भव्य शिव बारात निकाली जाती है। महाशिवरात्रि पर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में खास धूम देखने को मिलती हैं। इसी में से एक है झारखंड का देवघर बैद्यनाथ है, जो न केवल शिव का निवास नहीं बल्कि शक्तिपीठ भी है। यह स्थान शिव और शक्ति का अद्भुत संगम है। इस दिन बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग में लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से यहां आते हैं। मंदिर का पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयकारे से गूंज उठता है। नीचे लेख में जानिए बैद्यनाथ की महाशिवरात्रि क्यों विशेष महत्व रखती है।

देवघर की महाशिवरात्रि में खास क्या है?

Significance of Panchshool at Baidyanath temple

देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में महाशिवरात्रि का उत्सव पूरे भारत में सबसे अनूठा माना जाता है। यहां की महाशिवरात्रि इसलिए खास है क्योंकि बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को मनोकामना लिंग के साथ-साथ शक्तिपीठ भी माना जाता है।

माता पार्वती और शिव का गठबंधन

देवघर दुनिया का इकलौता ऐसा शिव मंदिर है जहां शिव और शक्ति के मंदिरों के शिखरों के बीच रेशमी लाल धागों से गठबंधन बांधा जाता है। महाशिवरात्रि के दिन इस गठबंधन को बदलना और नया सूत्र बांधना बेहद शुभ माना जाता है, जो वैवाहिक सुख का प्रतीक है।

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बाबा की निकाली जाती है भव्य शिव बारात

देवघर की महाशिवरात्रि का सबसे बड़ा आकर्षण यहां निकलने वाली शिव बारात है। इसमें हजारों की संख्या में लोग भूत-प्रेत, देवी-देवता और विभिन्न जीव-जंतुओं का वेश धरकर शामिल होते हैं। इसे देखने के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और पूरा शहर शिवमय हो जाता है।

सिंदूर दान की परंपरा

Jalabhishek importance Baidyanath Mahashivratri

आमतौर पर शिव लिंग पर सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता, लेकिन बैद्यनाथ धाम में महादेव और शक्ति साथ-साथ विराजमान हैं। यहाँ महाशिवरात्रि पर बाबा को सिंदूर अर्पित करने की परंपरा है, जो शिव-पार्वती के विवाह के उत्सव को दर्शाता है।

पंचशूल की विशेष पूजा

बैद्यनाथ मंदिर के शिखर पर त्रिशूल की जगह पंचशूल स्थापित है। महाशिवरात्रि से दो दिन पहले यहां पर विशेष अनुष्ठान के साथ इन पंचशूलों को उतारा जाता है, उनकी पूजा की जाती है और फिर पूरे विधि-विधान के साथ वापस से स्थापित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पंचशूल की वजह से रावण भी इस मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका था।

जलाभिषेक का महत्व

Baba-Baidyanath-Temple-Rituals

यहां महाशिवरात्रि पर जलार्पण का विशेष फल मिलता है। लोग सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा करके भी यहां पहुंचते हैं। इस दिन मंदिर के कपाट भक्तों के लिए लंबे समय तक खुले रहते हैं ताकि हर कोई अपने वैद्य यानी भगवान शिव का दर्शन कर सके।

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