
हिंदू धर्म में माघ मास की अमावस्या, जिसे मौनी अमावस्या भी कहते हैं वह अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस साल यह दिन 18 जनवरी यानी रविवार के दिन पड़ रहा है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का जितना महत्व है, उससे कहीं अधिक महत्व मौन व्रत रखने का होता है। इसलि एक कई सारे लोग इस दिन मौन व्रत रखते हैं, ताकि मन को शांत रख सके और पितरों की आत्मा को शांति प्रदान कर पाएं, लेकिन कई सारे लोग ऐसे होते हैं जो इस व्रत के बारे में सही से नहीं जानते हैं। ऐसे में आप वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से जानते हैं कैसे इस व्रत को किया जाता है और इसका धार्मिक महत्व क्या होता है?
मौनी अमावस्या का व्रत केवल चुप रहने तक सीमित नहीं है, इसके कुछ विशिष्ट नियम हैं, जिसका ध्यान रखना भी बेहद जरूरी होता है। इसलिए आपको इसका भी खास ध्यान रखना चाहिए, ताकि आपके द्वारा रखा गया ये व्रत अच्छे से पूरा हो सके।
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मौनी अमावस्या का व्रत सिर्फ मन की शांति प्रदान नहीं करता है, बल्कि इस व्रत को रखने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन चुप रहकर ईश्वर का ध्यान करने पितरों को प्रसन्न कर सकती हैं।
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मौनी अमावस्या पर दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। मौन व्रत खोलने के बाद आप तिल, गुड़, गर्म कपड़े, अन्न और जल का दान करना चाहिए।
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