
मकर संक्रांति का त्योहार खगोलीय और आध्यात्मिक परिवर्तनों का संगम है जिसमें सूर्य देव के उत्तरायण होने का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन खिचड़ी का महत्व केवल एक व्यंजन के रूप में नहीं बल्कि एक महाप्रसाद के रूप में है। शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान और सेवन करने से नवग्रहों की शांति होती है। विशेष रूप से इस दिन भगवान विष्णु, सूर्य देव और शनिदेव को खिचड़ी का भोग लगाना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। यह परंपरा न केवल श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि जीवन के तीन मुख्य आधारों मोक्ष, तेज और कर्मको संतुलित करने का एक सरल मार्ग भी है जिससे रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।
भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है और मकर संक्रांति के दिन उन्हें खिचड़ी अर्पित करने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती। खिचड़ी में चावल और दाल का मिश्रण होता है।

जब इसमें शुद्ध देसी घी और तुलसी दल मिलाकर श्रीहरि को भोग लगाया जाता है, तो इससे मानसिक शांति मिलती है और परिवार में खुशहाली आती है। मान्यता है कि इस दिन विष्णु जी को खिचड़ी खिलाने से व्यक्ति के जीवन के सभी संताप मिट जाते हैं और उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
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मकर संक्रांति पूरी तरह से सूर्य देव को समर्पित पर्व है। इस दिन जब सूर्य देव अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें खिचड़ी का भोग लगाना विशेष फलदायी होता है। सूर्य देव को खिचड़ी का भोग लगाने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य मजबूत होता है।
इससे समाज में मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। सूर्य को अर्पित की जाने वाली खिचड़ी में गुड़ का प्रयोग करना शुभ माना जाता है, क्योंकि गुड़ सूर्य का प्रतीक है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और करियर की बाधाएं दूर होती हैं।
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मकर संक्रांति पर शनिदेव को खिचड़ी खिलाने के पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसके अनुसार इसी दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर आए थे और शनिदेव ने खिचड़ी से उनका स्वागत किया था। तब सूर्य देव ने प्रसन्न होकर वरदान दिया था।

जो भी इस दिन शनिदेव को खिचड़ी अर्पित करेगा उसे शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कष्टों से मुक्ति मिलेगी। इस दिन खिचड़ी में काले तिल और काली उड़द की दाल का प्रयोग जरूर करें। शनिदेव को यह भोग लगाने से व्यक्ति के कठिन समय का अंत होता है और उसके कर्मों का शुभ फल मिलने लगता है।
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