
होली भारत का एक प्रमुख पर्व है जिसे रंगों का उत्सव भी कहा जाता है। यह फाल्गुन महीने की पूर्णिमा और प्रतिपदा को मनाया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन होता है और अगले दिन यानी कि चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को होली मनाई जाती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन को लोग आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे का प्रतीक भी मानते हैं। जहां सभी लोग रंगों और गुलाल के रंग में सराबोर होते हैं वहीं आपस में मेल-जोल बढ़ाने के लिए एक-दूसरे के घर भी जाते हैं। हालांकि, इस साल भी होली के पर्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और लोगों के मन में ये सवाल है कि इस साल रंगों की होली 3 मार्च को मनाई जाएगी अथवा 4 मार्च को? दरअसल हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 और 3 मार्च दोनों ही दिन पड़ रही है, वहीं 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने की वजह से होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा। ऐसे में आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें किहोली की सही तिथि क्या है, इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इस पर्व का महत्व क्या है?

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होली की पूजा में मुख्य रूप से सभी भगवानों को रंग गुलाल अर्पित किया जाता है जिसमें सबसे पहले गणपति जी को गुलाल लगाया जाता है। इस दिन पूजा के कई मुहूर्त मिल रहे हैं।
यदि आप इन्हीं शुभ मुहूर्त में होली की पूजा करेंगी तो आपके लिए अत्यंत लाभकारी होगा।

होली मुख्य रूप से रंगों का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि हमारी भावनाओं और संवेदनाओं से अलग-अलग रंग जुड़े होते हैं। क्रोध लाल रंग से, ईर्ष्या हरे रंग से, जीवंतता और खुशी पीले रंग से, प्रेम गुलाबी रंग से, विशालता नीले रंग से, शांति सफेद रंग से, त्याग केसरिया रंग से और ज्ञान बैंगनी रंग से जुड़ा है। प्रत्येक व्यक्ति में रंगों का समावेश होता है। होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है, जो जाति, धर्म और वर्ग की सीमाओं को पार करते हुए लोगों को एकजुट करता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर, परिवार के साथ मिलकर त्योहार का आनंद उठाते हैं जो लोगों को और ज्यादा करीब लाने में मदद करता है। इस दिन लोग घरों में गुझिया, मठरी, मालपुआ, भांग और ठंडाई जैसे स्वादिष्ट पकवानों का भी आनंद लेते हैं। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी होता है और आपसी सामंजस्य बढ़ाने का संदेश देता है।
इस प्रकार पंचांग और ज्योतिषीय गणना के आधार पर होली 2026 का रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है बल्कि प्रेम, उल्लास और आपसी सद्भाव का संदेश भी देता है।
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