
हिन्दू नव वर्ष जिसे 'विक्रम संवत' भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में एक नई शुरुआत का प्रतीक है। यह पर्व चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है जिसे 'गुड़ी पड़वा' और 'उगादि' के रूप में भी मनाया जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय प्रकृति में बदलाव और नई ऊर्जा के संचार का होता है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि कब से शुरू हो रहा है हिंदू नव वर्ष और कौन से उपायों से हम सभी देवी-देवताओं एवं ग्रहों का आशीर्वाद पा सकते हैं?
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिन्दू नव वर्ष का आरंभ होता है। ऐसे में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार के दिन सुबह 6 बजकर 45 मिनट से हो रही है। वहीं, इसका समापन 20 मार्च, शुक्रवार के दिन सुबह होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 19 मार्च से आरंभ हो जाएगा।

हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर नए साल का एक खास नाम होता है जिससे पता चलता है कि वह साल कैसा बीतने वाला है। सरल शब्दों में कहें तो हर नाम उस साल के प्रभाव को दर्शाता है। साल 2026 में शुरू होने वाला नया साल यानी विक्रम संवत 2083 'रौद्र संवत्सर' के नाम से जाना जाएगा। इस नए साल की शुरुआत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, शुक्ल योग और मीन लग्न में हो रही है।
'रौद्र' नाम का अर्थ ही बदलाव और तीव्रता से जुड़ा है। इसका मतलब यह है कि इस साल सभी राशियों के जीवन में बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस दौरान लोगों को कई अच्छे और चुनौतीपूर्ण उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ सकता है। सरल शब्दों में कहें तो यह साल काफी हलचल भरा और बड़े बदलावों वाला साबित हो सकता है।
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हिंदू नववर्ष की शुरुआत जिस दिन से होती है उसी दिन के आधार पर उस साल के 'राजा' और 'मंत्री' का फैसला किया जाता है। साल 2026 में नया साल 19 मार्च, गुरुवार से शुरू हो रहा है। गुरुवार का दिन होने के कारण इस साल के राजा 'गुरु' ग्रह होंगे, जबकि मंत्री का पद 'मंगल' ग्रह को मिलेगा। ज्योतिष शास्त्र में इन ग्रहों की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
माना जाता है कि राजा और मंत्री के स्वभाव का असर पूरे साल के मौसम, अर्थव्यवस्था और देश-दुनिया की घटनाओं पर पड़ता है। इसके अलावा, राशियों पर इसका विशेष प्रभाव देखा जाता है। जहां गुरु के राजा होने से ज्ञान और धर्म में बढ़ोत्तरी होने की संभावना रहती है, वहीं मंगल के मंत्री होने से साहस और अनुशासन का प्रभाव देखने को मिल सकता है।

हिन्दू नव वर्ष के पहले दिन किए गए कुछ विशेष उपाय आपको साल भर नौ ग्रहों और सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद दिला सकते हैं। नव वर्ष के दिन अपने घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का वंदनवार लगाएं। यह घर में नकारात्मक ऊर्जा को आने से रोकता है और माता लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त करता है।
अपने घर की छत पर या मुख्य स्थान पर केसरिया रंग का ध्वज लगाएं। साथ ही, घर के मंदिर में मंगल कलश की स्थापना करें। यह मान-सम्मान में वृद्धि और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक है। पारंपरिक रूप से इस दिन नीम की कोमल पत्तियों को मिश्री या गुड़ के साथ खाया जाता है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए उत्तम है, बल्कि ज्योतिष में इसे कड़वाहट दूर करने और रोग-दोष से मुक्ति का उपाय माना गया है।
साल के पहले दिन ब्राह्मणों, गरीबों या जरूरतमंदों को अनाज, गुड़ और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा दान करें। यह पितरों की शांति और नौ ग्रहों की अनुकूलता के लिए सबसे सरल और अचूक उपाय है। चूंकि यह दिन नवरात्रि का पहला दिन भी होता है, इसलिए घर में श्री हरि विष्णु या मां दुर्गा के मंत्रों का पाठ करें। इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और परिवार के सदस्यों के बीच सुख-शांति बनी रहती है।
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