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Skandmata vrat katha

Navratri Day 5 Vrat Katha 2026: चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन पढ़ें मां स्कंदमाता की व्रत कथा, जीवन के सभी कष्ट होंगे दूर

Skandamata ki Vrat Katha 2026: चैत्र नवरात्रि के 5वें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इनका व्रत महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए भी रखती हैं। आप भी अगर इस दिन व्रत कर रही हैं, तो कथा को जरूर पढ़ें, जिससे आपके जीवन के भी सारे कष्ट दूर हो जाएंगे।
Editorial
Updated:- 2026-03-23, 05:10 IST

चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन नवदुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है। स्कंद की माता होने के कारण ही देवी के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहते हैं। ममता की प्रतिमूर्ति मानी जाने वाली मां स्कंदमाता की पूजा करने से न केवल ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति होती है, बल्कि संतान सुख भी प्राप्त होता है। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की पौराणिक व्रत कथा।

मां स्कंदमाता की पौराणिक व्रत कथा (Skandamata ki Vrat Katha 2026

पौराणिक कथाओं के अनुसार, तारकासुर नाम के एक भयानक राक्षस ने अपनी तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर लिया था। उसने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा जी ने कहा कि जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है। तब चतुर तारकासुर ने सोचा कि भगवान शिव तो योगी हैं और वे विवाह नहीं करेंगे, इसलिए उसने वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु केवल शिव के पुत्र के हाथों से होगी।

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वरदान पाकर तारकासुर ने तीनों लोकों में अपना आतंक मचाने लगा। देवी देवताओं को परेशान करने लगा। ऐसे में देवता इस कहर से बचने के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे और उन्हें विवाह करने को कहा। इसके बाद भगवान शिव का विवाह माता पार्वती से हुआ। विवाह के बाद उनके पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ। जब कार्तिकेय छोटे थे, तब माता पार्वती ने उन्हें युद्ध के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था, ताकि वो ताड़कासुर का सामना कर सके।

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इसी के कारण शक्ति का ये स्वरुप स्कंदमाता कहलाया। उन्होंने अपने पुत्र को युद्ध की सारी कलाएं सिखाई और गोद में बैठाकर शक्ति का संचार किया। अंत में भगवान स्कंद ने तारकासुर का वध कर देवताओं के अत्याहारों को कम किया। इसलिए जीवन की परेशानियों को कम करने के लिए स्कंदमाता की पूजा की जाता है। भक्त अपनी परेशानियों का हल यहां से ढ़ूंढ़ते हैं, ताकि वो जीवन की राहों को आसान कर सके।

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माता की इस कथा को पढ़ने के बाद आपको भी साहस और शक्ति का अहसास होगा। साथ ही आपकी मन की सभी इच्छाएं भी पूरी होंगी। कथा के बाद आपको माता की आरती भी जरूर करनी चाहिए। इससे आपकी पूजा पूरी मानी जाएगी।

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Image credit- Freepik

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