Wed Mar 18, 2026 | Updated 01:54 AM IST
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Chaitra Amavasya Date 2026: 18 या 19 मार्च, कब है चैत्र अमावस्या? यहां जानें सही तिथि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व

Chaitra Amavasya Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में किसी भी अमावस्या तिथि को बेहद पवित्र माना जाता है और इस दिन स्नान-दान, पूर्वजों के लिए तर्पण और पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इस साल 2026 में चैत्र अमावस्या की तिथि को लेकर लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि यह 18 या 19 मार्च में से किस दिन पड़ेगी। ऐसे में आइए जानते हैं, चैत्र अमावस्या की सही तिथि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।
Editorial
Updated:- 2026-03-17, 10:46 IST

हिंदू धर्म में किसी भी अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है और साल में 12 अमावस्या होती हैं, वहीं हर महीने एक अमावस्या होती है जिसका विशेष महत्व होता है। ऐसे ही चैत्र महीने में पड़ने वाली अमावस्या तिथि भी खास होती है। कहा जाता है कि किसी भी अमावस्या तिथि के दिन यदि आप पूर्वजों के लिए तर्पण और दान करते हैं तो जीवन में सदैव खुशहाली बनी रहती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने आने वाली अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। चैत्र अमावस्या को इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि इस अमावस्या के बाद ही चैत्र महीने का आरंभ भी हो जाता है। इस साल चैत्र अमावस्या की सही तिथि को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं और ये सवाल है कि. चैत्र अमावस्या 18 या 19 कब पड़ेगी? इस दिन स्नान-दान, पितरों का स्मरण और भगवान विष्णु व शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें चैत्र अमावस्या कब है और तर्पण के साथ दान का शुभ मुहूर्त क्या है?

चैत्र अमावस्या कब है? (Chaitra Amavasya Kab Hai 2026)

chaitra amavasya kab hai

  • हिंदू पंचांग की मानें तो इस साल चैत्र अमावस्या तिथि 18 मार्च 2026 से शुरू होगी।
  • चैत्र अमावस्या आरंभ- 18 मार्च प्रातः 08 बजकर 26 मिनट से
  • चैत्र अमावस्या समापन-19 मार्च प्रातः 06 बजकर 53 मिनट
  • उदया तिथि के अनुसार, अमावस्या तिथि 19 मार्च को है, लेकिन अमावस्या की पूजा हमेशा अभिजीत मुहूर्त में की जाती है। इस वजह से 18 मार्च को ही चैत्र अमावस्या मनाई जाएगी और इसी दिन स्नान-दान और पितरों का तर्पण करना शुभ होगा।

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चैत्र अमावस्या स्नान-दान शुभ मुहूर्त (Chaitra Amavasya Snan Muhurat 2026)

  • अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से कई जन्मों के पापों का नाश होता है।
  • इस बार अमावस्या का स्नान 18 मार्च और 19 मार्च दोनों दिन किया जा सकता है।
  • चूंकि 18 मार्च को पूरे दिन अमावस्या है, इसलिए इस दिन आप किसी भी समय स्नान कर सकती हैं।
  • 19 मार्च को सुबह 6:53 बजे तक अमावस्या होने की वजह से इस समय भी स्नान करना शुभ होगा।
  • स्नान-दान के शुभ मुहूर्त:
  • ब्रह्म मुहूर्त: 18 मार्च, प्रातः 4:59 से 5:47 तक
  • सूर्योदय: 18 मार्च, प्रातः 6:36 बजे
  • सूर्यास्त: 18 मार्च, शाम 6:53 बजे

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पितरों की पूजा और तर्पण समय (Chaitra Amavasya Tarpan Muhurat 2026)

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इस बार अमावस्या के दिन चतुष्पद करण योग भी बन रहा है। यह पितरों की पूजा और तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • चतुष्पद करण: प्रातः 8:26 से शाम 7:42 तक
  • यदि आप इस दौरान पितरों के नाम से दान, तर्पण या पिंडदान करती हैं, तो अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • पितृ पूजा के लिए शुभ समय- 18 मार्च बुधवार, प्रातः 11:20 से दोपहर 1:30 बजे तक।
  • 19 मार्च दिन गुरुवार को भी अमावस्या तिथि सूर्योदय तक रहेगी।
  • यदि आप 19 मार्च को पितरों की पूजा और तर्पण करना चाहती हैं तो ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:58 से 5:46 तक
  • सूर्योदय: सुबह 6:35 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 19 मार्च, गुरुवार, प्रातः 6:53 बजे तक।

चैत्र अमावस्या 2026 का महत्व

कोई भी अमावस्या तिथि पूर्वजों को प्रसन्न करने का एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्च महीने में पड़ने वाली अमावस्या को चैत्र अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह दिन उपवास रखने और पूर्वजों से संबंधित पूजा-अर्चना करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का बहुत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी है। ऐसा कहा जाता है कि यह दिन पितृ दोष, नकारात्मकता, पाप और कर्म दोष से मुक्ति दिलाने वाला होता है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य भी करते हैं। इस दिन किए गए दान को अत्यंत फलदायी माना जाता है और इससे पूर्वजों को शांति भी मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि यदि आप चैत्र अमावस्या के दिन सही समय पर पितरों के लिए तर्पण करेंगी तो इससे पूर्वजों का आशीर्वाद मिलेगा।

यदि आप भी पूर्वजों के निमित्त दान और तर्पण करती हैं तो आपको यहां बताए शुभ समय का ध्यान जरूर रखना चाहिए। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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