
हिंदू धर्म में किसी भी तीज त्योहार की तरह अक्षय तृतीया को भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन को साल की सबसे शुभ तिथियों में से एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन आप जो भी शुभ काम करते हैं उसमें सफलता जरूर मिलती है। यही नहीं अक्षय तृतीया के दिन किए गए कार्यों का व्यक्ति के जीवन में अक्षय फल मिलता है। इस दिन को अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है और कहा जाता है कि इस दिन व्यक्ति बिना किसी मुहूर्त का विचार किए ही कोई भी शुभ काम जैसे शादी की कोई रस्म, गृह प्रवेश, नया वाहन खरीदना या नया घर खरीदना जैसे काम कर सकता है। इस दिन किए गए सभी कार्यों का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है। यही कारण है कि अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। इस दिन बिना पंचांग, तिथि या चौघड़िया देखे भी विवाह, गृह प्रवेश, खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत की जा सकती है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें इस दिन को अबूझ मुहूर्त क्यों कहा जाता है और इसका महत्व क्या है?

अबूझ मुहूर्त का अर्थ है ऐसा शुभ समय, जिसे जानने या समझने के लिए किसी विशेष गणना की आवश्यकता नहीं होती है। आमतौर पर किसी भी शुभ कार्य से पहले लोग पंडित से मुहूर्त निकलवाते हैं, लेकिन जब भी अबूझ मुहूर्त होता है तब आपको किसी भी शुभ समय या तिथि का विचार करने की आवश्यकता नहीं होती है। अक्षय तृतीया भी ऐसा ही दिन है जब आपको किसी भी मुहूर्त का विचार करने की आवश्यकता नहीं होती है। इस दिन का पूरा समय ही शुभ माना जाता है और आप दिन के किसी भी समय में शुभ काम की शुरुआत कर सकते हैं।
अक्षय तृतीया वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी-अपनी उच्च राशि में मौजूद होते हैं। इस दौरान सूर्य मेष राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहते हैं, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है और कोई भी शुभ काम करने से उसका फल कई गुना तक बढ़ जाता है। अक्षय शब्द का अर्थ है जो कभी न खत्म हो। इसलिए इस दिन किए गए दान, जप, तप, हवन, पूजा और किसी भी बड़े निवेश का फल कई गुना बढ़कर मिलता है और लंबे समय तक बना रहता है।

अक्षय तृतीया को लेकर कई धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं, जो इसकी पवित्रता को और बढ़ाती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्म हुआ था और इसी दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण भी हुआ था। यही नहीं महाभारत काल में पांडवों को अक्षय पात्र की प्राप्ति भी इसी दिन हुई थी, जिसमें कभी भोजन की कमी नहीं हो सकती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा की गरीबी भी दूर की थी। इन सभी घटनाओं के कारण इस दिन को आज भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है और इस दिन किए गए कार्यों का शुभ फल मिलता है।
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अक्षय तृतीया का सबसे बड़ा महत्व यही है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती है। इस दिन आप कुछ शुभ काम बिना मुहूर्त का विचार किए ही कर सकती हैं। जैसे विवाह और सगाई,गृह प्रवेश,नया व्यवसाय शुरू करना,वाहन या संपत्ति खरीदना,सोना-चांदी खरीदना। नए घर का निर्माण शुरू करना। इन सभी कार्यों को अक्षय तृतीया के दिन करने से जीवन में सफलता और समृद्धि बनी रहती है।
ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान कई गुना बढ़कर वापस मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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