
फरवरी के महीने में चलने वाली ठंडी और तेज हवाएं शरीर में जकड़न, जलन और दर्द को बढ़ा देती हैं। बदलता मौसम वैसे भी हड्डियों और जोड़ों पर असर डालता है, लेकिन यह समय मिड लाइफ यानी 40 से 65 साल की महिलाओं के लिए हड्डियों की सेहत के लिहाज से खराब होता है। इस उम्र में हार्मोनल बदलाव, खासतौर पर मेनोपॉज के आसपास, बोन डेंसिटी को तेजी से प्रभावित करते हैं, जिससे अकड़न, जलन, कमजोरी और चलने-फिरने में परेशानी आम हो जाती है।
इन लक्षणों को अक्सर महिलाएं बढ़ती उम्र का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि यही वह समय होता है जब थोड़ी सी जागरूकता और सही देखभाल की जरूरत होती है ताकि हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत बनाया जा सके। मेनोवेदा की को-फाउंडर और सर्टिफाइड मेनोपॉज कोच तमन्ना सिंह बताती हैं कि इस उम्र में हड्डियां कमजोर होने के पीछे सिर्फ कैल्शियम की कमी ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल, पोषण, हार्मोनल असंतुलन और फिजिकल एक्टिविटी की कमी भी बड़ा कारण होती है।
अगर आप भी सुबह उठते ही शरीर में अकड़न, पैरों या कमर में जलन, घुटनों में दर्द या थकान महसूस करती हैं, तो यह संकेत है कि आपकी हड्डियों को अभी से एक्स्ट्रा केयर की जरूरत है। आइए जानें एक्सपर्ट से ऐसे 4 आसान लेकिन बेहद असरदार तरीके, जिन्हें अपनाकर आप इस उम्र में भी अपनी हड्डियों को मजबूत और एक्टिव बनाए रख सकती हैं।

मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन तेजी से कम होता है, जो हड्डियों में कैल्शियम बनाए रखने के लिए जरूरी है। इसके घटने से हड्डियां अंदर से कमजोर होने लगती हैं।
सर्दियों में धूप कम मिलने के कारण शरीर कैल्शियम को सही ढंग से अवशोषित नहीं कर पाता।
ठंड में कम चलने-फिरने से हड्डियों पर जरूरी प्रेशर नहीं पड़ता, जिससे बोन लॉस प्रोसेस तेज हो जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण अक्सर तब तक सामने नहीं आते जब तक कि कोई फ्रैक्चर न हो जाए।
अगर आप चाहती हैं कि आपकी हड्डियां ताउम्र आपका साथ दें और बढ़ती उम्र में भी आप बिना दर्द व अकड़न के एक्टिव रह सकें, तो आज से ही कुछ जरूरी आदतों को अपनाएं। छोटी-छोटी लाइफस्टाइल चेंजेस लंबे समय में हड्डियों की सेहत को मजबूत देते हैं।

रोज सुबह कम से कम 15-20 मिनट की धूप लेना बेहद फायदेमंद होता है। धूप से मिलने वाला विटामिन D शरीर में कैल्शियम को सही तरीके से अवशोषित करता है, जिससे हड्डियां अंदर से मजबूत बनती हैं। कोशिश करें कि धूप सीधे हाथों और पैरों पर पड़े।
लंबे समय तक बैठे रहना हड्डियों को कमजोर करता है। हफ्ते में कम से कम 2-3 दिन वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज, जैसे वॉकिंग, स्क्वाट्स, सीढ़ियां चढ़ना या योगासन जरूर करें। ये एक्सरसाइज हड्डियों पर हल्का प्रेशर डालती हैं, जिससे बोन डेंसिटी बेहतर होती है।

हड्डियों के लिए कैल्शियम सबसे जरूरी पोषक तत्व है। अपनी डाइट में तिल, दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, गुड़ और बादाम को जरूर शामिल करें। साथ ही मैग्नीशियम और प्रोटीन भी हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी होते हैं, इसलिए संतुलित आहार लें।
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45 साल की उम्र पार करने के बाद बोन डेंसिटी टेस्ट (Bone Density Test) कराना समझदारी भरा फैसला है। इससे समय रहते ऑस्टियोपोरोसिस या हड्डियों की कमजोरी का पता चल जाता है और सही ट्रीटमेंट शुरू किया जा सकता है।
इन आसान उपायों को अपनाकर आप न सिर्फ हड्डियों की जलन और अकड़न से बच सकती हैं, बल्कि आने वाले सालों में भी खुद को मजबूत और आत्मनिर्भर महसूस करेंगी।
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