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History Of Bubble Wrap: सामान पैक करने के लिए नहीं, इस काम के लिए बनाया गया था बबल रैप, क्या आपको पता है इसकी कहानी?

कांच और प्लास्टिक के सामान को पैक करने के लिए आमतौर पर बबल रैप का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर मैं आपसे कहूं कि इसे इस काम के लिए नहीं बल्कि दीवार वॉलपेपर के लिए किया गया था, तो यकीनन भरोसा कर पाना मुश्किल होगा, लेकिन यही सच है। नीचे लेख में जानें इसकी पूरी कहानी।
Editorial
Updated:- 2026-03-23, 14:12 IST

हम सभी ने कभी न कभी ऑनलाइन सामान मंगाने पर निकलने वाले प्लास्टिक बुलबुले वाले रैप को जरूर फोड़ा। इसे फोड़ने में बहुत मजा आता है। सामान को टूटने-फूटने से बचाने के लिए आमतौर पर लोग इसी रैप पेपर का इस्तेमाल करते हैं। यह न केवल छोटे लेवल पर बल्कि बड़े पैकिंग इंडस्ट्री की जान है, लेकिन क्या आप जानती है कि जिस बबल रैप का इस्तेमाल आज हम नाजुक सामान को सेफ रखने के लिए करते हैं। उसे असल में इस काम के लिए बनाया ही नहीं गया था? जी हां, आपने सही पढ़ा, बता दें कि इसे दीवार पर लगाने के लिए बनाया गया था?

अगर आपको घर में मौजूद इस सफेद ट्रांसपेरेंट बबल रैप की असल कहानी अभी तक नहीं पता है, तो पढ़ें यह आर्टिकल। यह हम आपको बताने जा रहे हैं कि मार्केट में बबल रैप का बिजनेस फेल होने के बाद यह आज कैसे सामान पैक करने के लिए दुकानदारों की पहली पसंद है?

बबल रैप को कब और क्यों बनाया गया था?

bubble wrap history

जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि असल में इसे क्यों बनाया गया था? बबल रैप की कहानी साल 1957 में अमेरिका के न्यू जर्सी से शुरू होती है। दो इंजीनियरों, अल्फ्रेड फील्डिंग और मार्क चावनेस ने मिलकर इस 3D वॉलपेपर को बनाने की कोशिश की थी। उन्होंने प्लास्टिक की दो लेयर को एक साथ जोड़ा और बीच में हवा के छोटे-छोटे बुलबुले छोड़ दिए।

उनका मानना था कि यह दिखने में स्टाइलिश लगेगा और इसे साफ करना भी आसान होगा। हालांकि, लोगों को अपने घरों की दीवारों पर प्लास्टिक के बुलबुलों वाला वॉलपेपर लगाने का आइडिया बिल्कुल पसंद नहीं आया और उनका यह बिजनेस बुरी तरह फेल हो गया।

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दीवार के बाद ग्रीनहाउस के लिए किया गया इस्तेमाल

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वॉलपेपर वाला आइडिया फेल होने के बाद इन इंजीनियरों ने हार नहीं मानी। उन्होंने फिर इस प्लास्टिक की शीट का इस्तेमाल ग्रीनहाउस को ढकने के लिए किया। उन्हें लगा कि प्लास्टिक के बीच मौजूद हवा पौधों को गर्मी देने का काम करेगी, लेकिन यह आइडिया भी कुछ खास काम नहीं किया था।

बबल रैप ने मार्केट में कैसे पाई पहचान?

bubble wrap history in hindi

बबल रैप की मांग तब बढ़ी जब साल 1960, जब IBM ने अपना महंगा कंप्यूटर 1401 लॉन्च किया। उस समय कंप्यूटर बहुत बड़े और नाजुक होते थे और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में टूटने का डर रहता था। मार्क और अल्फ्रेड की कंपनी सील्ड एयर क्रॉप के एक मार्केटिंग एक्सपर्ट ने IBM को आइडिया दिया कि इस बबल रैप का इस्तेमाल कंप्यूटर की पैकेजिंग मटेरियल के लिया किया जा सकता है। यह आइडिया सुपरहिट रहा और देखते ही देखते दुनिया भर में सामान पैक करने का तरीका बदल गया।

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Image Credit: Shutterstock, Amazon

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