
हिंदू धर्म में हनुमान जी को शक्ति, भक्ति, बुद्धि और साहस का प्रतीक माना जाता है। उन्हें कई नामों से जाना जाता है जिनमें से बजरंगबली, संकट मोचन, आंजनेय, पवनपुत्र और महावीर जैसे अनेक नामों को प्रमुख माना जाता है। रामायण काल से ही हनुमान जी को उनके भक्त अलग-अलग नामों से जानते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उनका वास्तविक नाम क्या है? शास्त्रों की मानें तो हनुमान जी का नाम जन्म से हनुमान न होकर कुछ और ही था। रामायण से जुड़े गूढ़ रहस्यों के अनुसार हनुमान जी के नाम के पीछे एक अत्यंत रोचक और आध्यात्मिक कथा छिपी हुई है और उनके असली नाम को लेकर कई बातें भी सामने आती हैं। आइए यहां ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कि हनुमान जी का असली नाम क्या था?
'हनुमान' शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है- हनु और मान। हनुमान जी का असली नाम हनुमान नहीं है। हनुमान शब्द में हनु का अर्थ होता है जबड़े की हड्डी जिसे संस्कृत में हनुअस्थि कहा जाता है और मान का अर्थ है उभरा हुआ। बचपन में जब उन्होंने सूर्य देव को फल समझकर निगल लिया तब उन पर इंद्र ने वज्र से प्रहार किया। वज्र के प्रहार से हनुमान जी के जबड़े में चोट लगी और उनका मुंह सूज गया। उसी समय उनका नाम हनुमान रखा गया। बाल्यकाल में जब हनुमान जी ने सूर्य देव को एक लाल फल समझकर निगल लिया था। तब देवताओं के बीच हाहाकार मच गया। उस समय देवराज इंद्र को वज्र प्रहार ही एकमात्र उपाय नजर आया। इंद्र के प्रहार के बाद हनुमान जो को यह नाम दिया गया। वास्तविकता यही है कि यह उनका असल नाम नहीं था।

इंद्र के वज्र प्रहार से बाल हनुमान मूर्छित हो गए थे। यह देखकर माता अंजना और पवन देव अत्यंत क्रोधित हुए। पवन देव ने समस्त सृष्टि से वायु का संचार रोक दिया, जिससे सभी देवता व्याकुल हो उठे। तब सभी देवताओं ने हनुमान जी को दिव्य वरदान दिए। ब्रह्मा जी ने अमरत्व, विष्णु जी ने अद्भुत शक्ति और इंद्र ने उन्हें वज्र के समान कठोर शरीर का वरदान दिया। इसके बाद सभी देवताओं ने अपने शास्त्रों से उन्हें इम्युनिटी दी और उनका शरीर वज्र की तरह मजबूत हो गया और उनका नाम बजरंगबली रखा गया।
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हनुमान जी माता अंजना के पुत्र थे, इसलिए उन्हें आंजनेय कहा जाता है। साथ ही उनका जन्म पवन देव की कृपा से हुआ था, इसलिए वे पवनपुत्र या वायुपुत्र भी कहलाते हैं। ये सभी नाम उनके जीवन से जुड़ी घटनाओं और संबंधों को दिखाते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम के अनन्य भक्त होने के कारण हनुमान जी ने अपने जीवन में अनेकों असंभव कार्य किए और माता सीता की खोज, लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और राम-रावण युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाना। उन्होंने न केवल भगवान राम की सहायता की बल्कि असंख्य भक्तों के संकट भी दूर किए। इसी कारण से हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि वो भक्तों के सभी कष्टों को हरने वाले हैं।
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हनुमान जी का जन्म शिव जी की तपस्या से हुआ था और वो रूप और बुद्धि से बहुत सुंदर थे, इसी वजह से उनका नाम सुंदर था। ऐसा कहा जाता है कि हनुमान जी का असली नाम भी सुंदर ही है। रामायण के जिस अध्याय में हनुमान जी के चरित्र का वर्णन मिलता है उसे सुंदरकांड कहा जाता है।
शास्त्रों और रामायण के अनुसार, हनुमान जी न केवल बल और बुद्धि में श्रेष्ठ थे बल्कि रूप और चरित्र में भी अत्यंत सुंदर थे। इसी वजह से उनका नाम जन्म के समय सुंदर रखा गया था जो बाद में हनुमान पड़ा।
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