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भारत के इस गांव में पिता नहीं, बेटियों के नाम से पूछा जाता है घर का पता, यहां महिलाओं के सम्मान से शुरू होती है घर की दहलीज

भारत के अलग-अलग राज्यों में कई ऐसे गांव हैं, जो अपनी किसी न किसी खास वजह से मशहूर हैं। इन जगहों पर जाकर लोग न सिर्फ वहां की खूबसूरती को महसूस करते हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी समझने की कोशिश करते हैं।
Editorial
Updated:- 2026-03-05, 10:08 IST

भारत में ऐसे कई गांव है, जो अपनी अलग-अलग खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं। कहीं किसी गांव को उसके ऐतिहासिक धरोहर के लिए जाना जाता है, तो कहीं कोई अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण यात्रियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। हालांकि, इस बार हम एक ऐसे गांव के बारे में बात कर रहे हैं, जो अपनी नेम प्लेट से चर्चा में है। इस गांव के घरों को लोग महिलाओं के नाम से जानते हैं, जहां हर परिवार और घर मर्दों की वजह से जाना जाता है, वहीं इस गांव में महिलाओं को सम्मान दिया जा रहा है। यह गांव कहां है और यहां ऐसा क्यों हो रहा है, इसके बारे में हम विस्तार से जानकारी देंगे।

घरों के बाहर क्यों लगी है महिलाओं की नेम प्लेट

जिस अनोखे गांव की हम बात कर रहे हैं, वह हरियाणा के अंबाला में स्थित है। अंबाला के खेड़ा गनी गांव ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जो महिलाओं को सम्मान भी देती है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करती है। इस गाांव में आपको जगह-जगह घरों के बाहर पिता के नाम की जगह ढ़ी-लिखी बेटियों और बहुओं के नाम लगाए गए हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें महिलाओं को शिक्षा के लिए बढ़ावा भी मिलेगा और समाज में उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा।

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Khera Gani village

महिला ग्राम सभा से शुरू हुई इस मुहिम

इस गांव में घरों के बाहर आपको MSc, BEd, BCom, MA और MBA जैसे नाम के बाद बेटियों का नाम पढ़ने को मिलेगा। यहां बेटियां क्या पढ़ रही हैं और पढ़ने के बाद वह क्या काम कर रही हैं, उनकी पोस्ट नाम के साथ लिखी गई है। यह पहल नवंबर 2025 में एक महिला ग्राम सभा बैठक में तय की गई थी। इसके लिए किसी सरकारी आदेश की जरूरत नहीं पड़ी। महिला एवं बाल विकास विभाग की महिला अधिकारियों एक बैठक में, लोगों की सहमती के बाद यह फैसला लिया। उन्होंने देखा कि जब गांव इतनी बेटियां पढ़ी-लिखी हैं, तो इसके लिए सर्वे करना चाहिए। सर्वे के बाद न्यूनतम योग्यता ग्रैजुएश तय हुआ और नेम प्लेट को इस तरह से लगाया गया।

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सर्वे के बाद लिया गया फैसला

गांव में किस घर की लड़कियां क्या कर रही है, यह जानने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों ने घर-घर जाकर जानकारी जुटाई। सर्वे किया गया और लगभग 30 घर ऐसे मिले, जहां बहू-बेटियां ने ग्रेजुएसल ड्रिग्री कम से कम की ही थी। ऐसे में पंचायत ने फैसला किया कि अब इन बेटियों का नाम कागजों पर हीं दीवारों पर लगाया जाएगा। इसके बाद उनके नाम से नेम प्लेट बनी और घर के बाहर लगवाई गई।

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image credit- Freepik, gemini

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