
आज भी सब लड़कियों की सुरक्षा की बात आती है तब हम बड़े-बड़े दावे करते हैं कि लड़कियां घर की दहलीज के भीतर और बाहर पूरी तरह से सुरक्षित हैं। फिर भी आए दिन कोई न कोई ऐसी घटना सामने आ ही जाती है जो देश की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न लगाती है। ऐसे ही एक घटना सामने आई दिल्ली के पहाड़गंज इलाके से। वास्तव में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने यह सोचें पर मजबूर कर दिया है कि क्या सच में बेटियां घर के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं? पहाड़गंज में एक 14 वर्षीय लड़की का आरोप है कि उसके ही पिता ने तीन महीने में कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया है। उसकी शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार तो कर लिया है, लेकिन यह मामला सिर्फ एक अपराध की रिपोर्ट नहीं हैं बल्कि यह परिवार, भरोसे, सुरक्षा और सामाजिक सोच पर गहरे सवाल खड़े करता है। हम अक्सर अपने बच्चों से कहते हैं कि घर सबसे सुरक्षित जगह है, लेकिन जब ऐसे अपराध घर के भीतर ही होने लगें तो रिश्ते भी तार-तार हो जाते हैं। सवाल यह उठता है कि जब बच्चियां घर पर ही सुरक्षित नहीं हैं तो वो किस्से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाएं?
देश की राजधानी दिल्ली से एक शर्मनाक घटना सामने आई है जहां एक पिता ने अपनी ही बेटी के साथ एक नहीं बल्कि कई बार दुष्कर्म किया है।

यह पूरी घटना पहाड़गंज इलाके की है और बताया जा रहा है कि एक पिता ने अपनी 14 साल की नाबालिग बेटी के साथ कई बार दुष्कर्म किया है। इस हैवानियत से परेशान होकर पीड़िता जो आठवीं कक्षा की छात्रा भी है उसने अपने मकान मालिक के साथ पहाड़गंज थाने में जाकर पूरी घटना की शिकायत दर्ज की। पुलिस ने शिकायत दर्ज करके आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची ने बताया कि उसकी मां 15 दिन पहले अपने पैतृक गांव चली गई थी, जिसके बाद घर में वो पिता के साथ अकेली थी। उसी समय पिता ने उसके साथ यह गलत कदम उठाया। जब बच्ची ने इसका विरोध किया तब पिता ने उसे जान से मार देने की धमकी दी।
घर को हमेशा से ही बेटियों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है। जब भी सुरक्षा की बात होती है तो मां अपनी बेटी से बोलती है कि 'बेटा घर के भीतर ही रहो, क्योंकि बाहर निकलते ही तुम सुरक्षित नहीं हो' माता-पिता को बच्चों का सबसे बड़ा रक्षक माना जाता है,लेकिन जब वही रिश्ता आरोपों के घेरे में आ जाए, तो भला क्या कहा जा सकता है। दिल्ली के पहाड़गंज की यह घटना बताती है कि सुरक्षा केवल चार दीवारों से नहीं आती है बल्कि किसी भी व्यक्ति की सोच से आती है। अगर बेटियों को घर के भीतर ही डर हो, तो वो कहां जा सकती हैं। वास्तव में जब घर भी सुरक्षित नहीं है, तो इस मानसिकता को भला कैसे बदला जा सकता है। हम बेटियों को अजनबियों से बचना सिखाते हैं, लेकिन जब खुद का पिता ही ऐसा करे तो भला क्या कहा जा सकता है। बेटियों के साथ होने वाले ऐसी घटनाएं जिनकी वजह कभी पिता, तो कभी भाई, कभी दोस्त, तो कभी कोई और रिश्तेदार होता है उसका जिम्मेदार आखिर कौन है?

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इस घटना में सबसे बड़ी बात है उस बच्ची का साहस जिसने डर से बाहर निकलकर शिकायत दर्ज कराई। वास्तव में यह बेटियों की सुरक्षा के लिए एक जरूरी कदम है जो घर की इज्जत बचाने के डर से न जाने कितनी बार बेटियां अपनी बात को दूसरों तक नहीं पहुंचा पाती हैं। आमतौर पर एक नाबालिग बच्ची के लिए यह कदम उठाना बहुत कठिन होता है। परिवार के खिलाफ बोलना, सामाजिक प्रतिक्रिया का डर, भविष्य की चिंता जैसे कई डर उसके सबसे बड़े डर को भूलने के लिए मजबूर कर देते हैं जो उसके पिता या अन्य किसी करीबी रिश्तेदार से है। वास्तव में बेटियों को अब अपनी सुरक्षा के लिए डर के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है जिससे समाज की तस्वीर बदली जा सके। जरूरत है उस डर से बाहर निकलने की जो समाज की इस सोच पर लगाम लगा सके कि लड़कियों के साथ किसी भी तरह का व्यवहार किया जा सकता है।
इस दर्दनाक मामले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि बेटियों की सुरक्षा केवल कानून और चार दीवारों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके लिए समाज, परिवार और हर व्यक्ति की जागरूकता बेहद जरूरी है, जिससे कोई भी बच्ची घर के भीतर या बाहर खुद को महफूज समझे।
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