
28 जनवरी 2026 का दिन देश के लिए एक गहरा आघात लेकर आया। इस दिन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक विमान हादसे में मृत्यु हो गई। विमान के बारामती में लैंडिंग के दौरान हुए इस भयानक हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। किसी भी संवेदनशील समाज में ऐसी घटना के बाद पहला भाव शोक, सहानुभूति और आत्ममंथन का होता है कि आखिर गलती कहां हुई, भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या किया जा सकता है। जहां एक तरफ देश अजित पवार के निधन का शोक मना रहा था, वहीं विमान में मौजूद को-पायलट शांभवी पाठक पर एक महिला होने की वजह से सोशल मीडिया पर अलग-अलग कमेंट आ रहे थे। मगर अफसोस, हमारे समाज का एक हिस्सा ऐसा भी है, जो किसी भी हादसे को इंसानियत के बजाय अपनी विकलांग सोच फैलाने का मौका मान बैठता है। इस विमान दुर्घटना के बाद भी यही हुआ। कैप्टन शांभवी पाठक के ऊपर किए जाने वाले कई ऐसे कमेंट जिसमें महिलाओं को कमजोर दिखाने की बात कही गई है। आखिर इन लोगों को एक महिला पर सवाल उठाने, उन पर तंज कसने और सदियों पुरानी पुरुष प्रधान सोच को उगलने का हक भला कौन देता है?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए कमेंट पढ़कर वास्तव में समाज का एक ऐसा चेहरा सामने आ रहा है जो इस बात की गवाही दे रहा है कि हम क्यों न विकसित देश के दावे करें, क्यों न हम महिलाओं को पुरुषों के ही समान अधिकार देने की बातें करें, लेकिन हमारी सोच अभी भी मेल डोमिनेटेड ही है। हम ऐसे समाज का हिस्सा हैं जिसमें यदि कोई महिला विमान दुर्घटना में जिंदगी की जंग हार जाती है, तो उसके लिए ऐसे भद्दे कमेंट किए जाते हैं। "वह लड़की, खासकर X क्रोमोजोम वाली, अभी स्कूटर चलाना भी नहीं सीख पाई है और अगर उसे हवाई जहाज दे दिया जाए तो यही होगा।शांभवी के लिए दुख है, लेकिन पुरुषों के वर्चस्व वाले कामों में महिलाओं को नियुक्त करना एक तरह का आत्मघाती काम है, जिस पर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए।" ये कमेंट एक यूजर ने विमान दुर्घटना के बाद अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किया। दरअसल, ये समाज की सोच पर प्रश्न चिह्न तो है ही और इस बात पर भी सवाल उठाता है कि आखिर ऐसे कमेंट करने का हक इन लोगों को कौन देता है?

रास्ते में कई बार जब आगे चलने वाली गाड़ी अचानक रुक जाती है तो लोग बोल पड़ते हैं कि 'हो न हो ये गाड़ी कोई महिला ही चला रही होगी', मेरी तरह आपने भी राह चलते हुए ऐसे कई कमेंट सुने होंगे। ऐसे ही विमान दुर्घटना में अजीत पवार के साथ जान गंवाने वाली को-पायलट शांभवी पाठक को भी लोग ट्रोलकरते हुए कॉमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट किया "लड़की से स्कूटी नहीं चलती, ब्रेक पैरो से लगाती है इनको सीधा प्लेन दिया पैर से रोकने के ट्राई की होगी क्रैश हो गया सही बोलते है वो लोग लडकिया आधी दिमाग की होती है " ये कमेंट महज एक ट्रोलिंग नहीं है, ये उस मानसिकता का प्रदर्शन भी है जो आज भी मानती है कि काबिलियत उसके जेंडर से तय होती है, उसकी ट्रेनिंग, अनुभव और मेहनत से नहीं। सवाल यह नहीं है कि हादसा क्यों हुआ सवाल यह बना दिया गया कि हादसे में महिला पायलट क्यों थी? आखिर कब बदलेगी समाज की ये अपाहिज सोच, जो महिलाओं को आगे बढ़ते हुए देख ही नहीं पा रही है। एक तरफ जहां महिलाएं चांद पर पहुंच गईं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे मनचले भी मौजूद हैं जो अपनी असफलता को महिलाओं की सफलता से तौलते हैं और उन पर भद्दे कमेंट करते हैं।

इतिहास गवाह है कि पहले भी विमान दुर्घटनाएं हुई हैं और इस विमान दुर्घटना में भी पायलट के तौर पर सुमित कपूर मौजूद थे, लेकिन को-पायलट शांभवी पर ही ऐसे भद्दे कमेंट इस बात को दिखाते हैं कि आज भी हम एक पुरुष प्रधान समाज का ही हिस्सा हैं। कई बड़े हादसे पुरुष पायलटों की मौजूदगी में भी हुए हैं। कई रेल हादसे भी हुए हैं, सड़क दुर्घटनाएं हुईं जिनमें पुरुष ही मुख्य ड्राइवर या पायलट थे, लेकिन जब पुरुषों के साथ हादसा होता है, तब कारण तकनीकी खराबी, मौसम, मानवीय भूल या सिस्टम फेल्योर होता है लेकिन अब जब कोई महिला इस हादसे में मौजूद होती है तो दुर्घटना की मुख्य वजह ही महिला को क्यों बनाया जाता है? कैप्टन शांभवी पाठक कोई शौकिया पायलट नहीं थीं। वह प्रशिक्षित, लाइसेंस प्राप्त और अनुभवी को-पायलट थीं। एविएशन जैसे क्षेत्र में किसी को भी सिर्फ जेंडर के आधार पर कॉकपिट में नहीं बैठाया जाता है। वहां हर कदम पर कड़ी ट्रेनिंग, मेडिकल टेस्ट, सिमुलेशन, फ्लाइट आवर्स और लाइसेंसिंग होती है, लेकिन हादसे के बाद उनके ऊपर किए गए ऐसे भद्दे कमेंट यही दिखाते हैं कि अभी भी पुरुष समाज को शिक्षित करने की जरूरत है। आखिर उन्हें ये अधिकार कौन देता है जो महिलाओं को नीचे दिखाएं?
जहां शांभवी पाठक को उनकी स्किल्स पर कुछ मनचलों ने कमेंट करके पुरुष प्रधान समाज का आईना दिखाया वहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का पुराना ट्वीट भी सामने आया जो उनके लिए सम्मान की भावना को और ज्यादा बढ़ा देती है। अजीत पवार ने यह बयान साल 2024 में एक महिला सशक्तिकरण अभियान को उजागर करने के लिए दिया था। उनके ट्वीट में लिखा था- "जब हम हेलीकॉप्टर या विमान से यात्रा करते हैं और अगर हमारा विमान या हेलीकॉप्टर सुचारू रूप से उतरता है, तो हम समझ जाते हैं कि पायलट एक महिला है।" वास्तव में उनका यह ट्वीट इस बात को उजागर करता है कि हमने विमान हादसे में एक बड़े नेता को खोया है जो वास्तव में देश के भविष्य को बुलंदियों तक पंहुचा सकते थे।

जब तक हम ऐसे बड़े हादसों को जेंडर से जोड़ते रहेंगे, तब तक हम न ही इंसाफ कर पाएंगे और न ही इंसानियत। अब वक्त है कि हम सवाल ट्रोल्स से नहीं, खुद से पूछें कि क्या हम सच में इतने मॉडर्न हैं, जितना खुद को बताते हैं? क्या सच में हमारा समाज विकसित होने की होड़ में है? क्या वास्तव में देश आजाद है? क्या सच में महिला और पुरुष में कोई अंतर नहीं है? सवाल बहुत से हैं, लेकिन उत्तर अभी भी मिलने बाकी हैं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसे ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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