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psychology behind kids love for brands

महंगे ब्रांड्स के दीवाने क्यों हो रहे हैं बच्चे? 5 कारण जो हर माता-पिता को समझने चाहिए

आजकल बच्चे महंगे ब्रांड्स के प्रति आकर्षित हो रहे हैं, जिसके कई कारण हैं। सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर उन्हें प्रभावित करती है, जबकि साथियों का दबाव (पीयर प्रेशर) उन्हें ब्रांडेड चीजें खरीदने पर मजबूर करता है।
Editorial
Updated:- 2026-03-12, 14:57 IST

आपने देखा होगा कि अगर किसी स्कूल या पार्क में जाएं, तो छोटे-छोटे बच्चे भी बड़े ब्रांड्स के जूते, कपड़े और गैजेट्स की बातें करते हैं। अब वो दौर नहीं है, जब बच्चों के लिए कपड़े सिर्फ सुंदर होने चाहिए थे। आज उनके लिए ब्रांड ज्यादा मायने रखता है। आखिर ऐसा क्या बदला कि मासूम बचपन अब लग्जरी ब्रांड्स का दीवाना हो गया है? ऐसे में माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि यह केवल एक जिद नहीं, बल्कि एक बड़ा बदलाव है। यहां 5 मेन कारण दिए गए हैं जो बच्चों की इस पसंद के पीछे छिपे हैं। ऐसे में इन कारणों के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बच्चों को क्यों महंगे ब्रांड पसंद हैं। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...

सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर कल्चर

आज के समय में बच्चे अपना ज्यादातर समय इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर बिताते हैं। वहां वे अपने पसंदीदा यूट्यूबर या सेलिब्रिटी को महंगे ब्रांड्स प्रमोट करते देखते हैं। जब कोई बच्चा अपने पसंदीद को खास ब्रांड के जूते पहने देखता है, तो उसे लगता है कि ब्रांड पहनकर कूल बन जाएंगे।

brand shopping kids

पीयर प्रेशर

स्कूल या फ्रेंड सर्कल में दिखावा एक बड़ी चुनौती बन गई है। अगर ग्रुप के चार बच्चों के पास ब्रांडेड सामान है, तो पांचवां बच्चा खुद को अलग-थलग या कमतर महसूस करने लगता है। ऐसे में दोस्तों के बीच अपनी जगह बनाए रखने और उनके जैसा दिखने के लिए बच्चे अक्सर महंगे ब्रांड्स मांगना शुरू कर देते हैं। इसे 'फियर ऑफ मिसिंग आउट' (FOMO) भी कहते हैं।

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पहचान और आत्मविश्वास का जुड़ाव

आज के बच्चे ब्रांडेड चीजों को अपनी पहचान से जोड़कर देखते हैं। उन्हें लगता है कि एक महंगा बैग या फोन उनके सेल्फ कॉन्फिडेंस को बढ़ाएगा। वे यह सोचने लगते हैं कि समाज में उनकी अहमियत उनके पास मौजूद सामान की कीमत से तय होती है। यह सोच बच्चों के मानसिक विकास के लिए सोचने पर मजबूर कर देने वाली बात हो सकती है।

brand shopping attraction

बच्चों के मन में क्रेविंग पैदा करना

कंपनियां अपनी सेल बढ़ाने के लिए अब सीधे बच्चों को टारगेट करती हैं। खिलौनों से लेकर जूतों तक एडवरटाइजमेंट को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे बच्चों के मन में क्रेविंग पैदा करें। ऐसे एडवरटाइजमेंट बच्चों को यह विश्वास दिलाते हैं कि बिना उस खास ब्रांड के उनका जीवन अधूरा है।

माता-पिता की गलती है जिम्मेदार

कई बार कामकाजी माता-पिता समय न दे पाने के कारण बच्चों को महंगे तोहफे दिलाकर अपना प्यार जताते हैं। धीरे-धीरे बच्चों को इसकी आदत हो जाती है और वे साधारण चीजों को ना पसंद करना शुरू कर देते हैं।

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Images: Freepik/shutterstock

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