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33 बच्चों के साथ 10 साल तक दरिंदगी...जब सामने आया दंपत्ति का सच तो सीधा मिली फांसी, पॉक्सो कोर्ट का ये फैसला सभी के लिए है मिसाल

उत्तर प्रदेश के बांदा की पॉक्सो कोर्ट ने एक दंपत्ति को 33 बच्चों के यौन शोषण और अश्लील वीडियो बनाने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है। 2010 से 2020 के बीच सक्रिय इस दंपत्ति ने ऑनलाइन गेम्स और पैसों का लालच देकर बच्चों को शिकार बनाया।
Editorial
Updated:- 2026-02-24, 13:23 IST

हमारे सामने एक ऐसा केस पेश हुआ है, जिसने सभी के मन में हलचल पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश के बांदा की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले को सुनाकर इस मामले को सभी के लिए मिसाल बना दिया है। बता दें कि मासूम बच्चों के साथ यौन शोषण और उनकी अश्लील वीडियो बनाने के कारण दंपत्ति को फांसी की सजा सुनाई गई है। यह मामला तब चर्चा में आया जब सीबीआई ने सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात राम भवन के खिलाफ केस बनाया। ऐसे में जब जांच हुई तो एक ऐसा राज हम सबके सामने खुला, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। जानते हैं इस पूरे मामले के बारे में...

क्या था मामला?

बता दें कि बांदा और चित्रकूट के इलाकों में 2010 से 2020 के बीच में दंपति बेहद एक्टिव थे। इन्होंने 33 छोटे बच्चों को न केवल अपने कब्जे में लिया बल्कि उन्हें अपनी हवस का शिकार भी बनाया।

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इनमें से कुछ बच्चे महज 3 साल के थे। इन बच्चों को फसाने के लिए ये लोग न केवल ऑनलाइन गेम्स का सहारा लेते थे बल्कि पैसे देकर, खिलौने देकर अपनी हवस का शिकार बनाते थे।

प्राइवेट पार्ट्स में गंभीर चोट

जब बच्चों की जांच की गई तो कुछ के तो प्राइवेट पार्ट्स में गंभीर चोटे भी सामने आई हैं। जब बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया तो कुछ बच्चे भैंगे पन के शिकार हुए तो कुछ गहरे सदमें अपनी याददाश्त खो बैठे हैं।

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क्या कहा कोर्ट ने?

जब कोर्ट के सामने यह मामला पेश हुआ तो उन्होंने कहा कि ये रेयरेस्ट ऑफ रेयर है। जिस तरह इन दोनों ने मिलकर मासूम बच्चों के जीवन को तबाह किया ऐसे में किसी भी प्रकार की रियायत नहीं बरती जा सकती और समाज को एक सबक सिखाने और संदेश देने के लिए फांसी ही एकमात्र रास्ता है।

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बता दें कि अदालत ने केवल सजा नहीं सुनाई बल्कि प्रत्येक पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा देने का भी फैसला किया है। 

सीबीआई का अहम रोल

बता दें, सीबीआई ने इस केस की बारीकी से जांच की। बच्चों के काउंसलिंग से लेकर सारे सबूतों को इकट्ठा करने तक टीम ने बेहद ही सेंसिटिविटी से काम लिया। जब 2021 में चार्ट शीट दाखिल हुई तब से लेकर आज तक यानी 2026 तक बच्चों को पूर्ण न्याय दिलाने की कोशिश की गई है। 

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Images: Freepik/shutterstock

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