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जब कोई बच्चा अजनबियों या मेहमानों के सामने कुछ नहीं बोलता है और एकदम चुप हो जाता है, तो अक्सर माता-पिता इसे केवल शर्मीलापन समझ लेते हैं और नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कभी-कभी यह शर्मीलापन नहीं, बल्कि 'सोशल एंग्जायटी' हो सकती है। एक पेरेंट के तौर पर यह समझना बेहद ही जरूरी है कि बच्चा वास्तव में किस दौर से गुजर रहा है ताकि उसे सही समय पर सही मदद मिल सके। ऐसे में कुछ बिंदुओं से इसके बारे में समझा जा सकता है। इन प्वॉइटर्स के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि आपका बच्चा शर्म के कारण नहीं बोल रहा है या सोशल एंग्जायटी के कारण, इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...
बता दें कि शर्मीलापन एक आम पर्सनल साइन है। शर्मीले बच्चे को नए लोगों के साथ घुलने-मिलने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन एक बार जब वे घुल जाते हैं तो वह सामान्य रूप से व्यवहार करने लगता है।

इससे अलग, सोशल एंग्जायटी एक गंभीर समस्या है। इसमें बच्चा दूसरों के सामने बोलने या फोकस बनाने में दिक्कत महसूस करता है। उसे लगातार यह डर सताता है कि कहीं लोग उसका मजाक न उड़ाएं या उसे गलत न समझें।
अगर आपका बच्चा दूसरों के सामने आने पर घबराहट के कारण कांपने लगता है और उसे पसीना आता है या वह पेट दर्द और सिरदर्द की शिकायत करता है, तो यह सोशल एंग्जायटी के संकेत हो सकते हैं। इन्हें नजरअंदाज करना सही नहीं है। ऐसे बच्चे अक्सर आई-कॉन्टैक्ट (आंखों में आंखें डालकर देखना) नहीं कर पाते और दूसरों के पीछे छिपने की कोशिश करते रहते हैं। उनका चुप हो जाना केवल पसंद नहीं, बल्कि एक तरह की फ्रीज होने की स्थिति होती है।
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बच्चे के ऐसे व्यवहार के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। कभी-कभी यह अनुवांशिक होता है, यानी अगर परिवार में किसी को घबराहट की समस्या रही हो तो आपके बच्चे में भी ये संकेत नजर आ सकते हैं।

इसके अलावा, स्कूल में किसी अप्रिय घटना, बुलिंग (बच्चे को चिढ़ाया जाना) या घर का बहुत ज्यादा सख्त माहौल भी बच्चे के आत्मविश्वास को कम कर देता है। अगर बच्चे को छोटी-छोटी गलतियों पर बहुत ज्यादा टोका जाता है, तो वह बाहर जाकर बोलने की हिम्मत खो देता है।
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