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गंदा पानी पीकर इंदौर में गई जान! कहीं आप भी तो नहीं पी रहे मौत का प्याला? ऐसे चेक करें Water पीने लायक है या नहीं

Water Purity Check: जब से इंदौर में दूषित पानी के कारण कई लोगों ने अपनी जान गवाई है तब से हमारे मन में भी ये सवाल उठ रहे हैं कि जो पानी हम पी रहे हैं क्या वह सुरक्षित है, जानते हैं पानी की जांच कैसे करें...
Editorial
Updated:- 2026-01-07, 18:33 IST

अभी हाल ही में इंदौर से आई एक खबर ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। बता दें कि यहां पर दूषित पानी की वजह से कई लोगों ने अपनी जान गवाई है। यह घटना न केवल एक घटना है बल्कि हमारे लिए चेतावनी भी है कि जो पानी हम अपने घरों में इस्तेमाल करते हैं क्या वह सुरक्षित है? पानी हमारे जीवन का आधार है। अगर उसमें ही बैक्टीरिया पनपेंगे तो हम कहां जाएंगे। क्या हम मौत का प्याला तो नहीं पी रहे, अगर आपके मन में भी ये सवाल उठ रहे हैं तो बता दें कि पानी को पीने से पहले उसकी जांच करनी बेहद जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि पानी की जांच कैसे की जाए। पढ़ते हैं आगे... 

पीने वाले पानी की जांच कैसे करें? 

  • पानी की जांच रंग, गंध और स्वाद से की जा सकती है। जी हां, बता दें कि जो शुद्ध पानी होता है उसका कोई रंग गंध का स्वाद नहीं होता है। ऐसे में एक कांच के गिलास में पानी को तेज रोशनी में देखें। 

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  • अगर पानी हल्का पीला भरा या मटमैला सा दिखाई दे रहा है तो इसका मतलब इसमें मिट्टी या जंग हो सकती है। अगर पानी से क्लोरीन जैसी तेज गंध रही है तो ये सफाई की अधिकता को दर्शाता है, लेकिन अगर गंध सड़े हुए अंडे जैसी है तो समझ लें कि इसमें खतरनाक बैक्टीरिया है। अगर पानी का स्वाद धातु जैसा कड़वा है तो इसमें लेड या आर्सेनिक जैसे तत्व पाए जा सकते हैं।

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  • दूसरा तरीका- आप सबसे पहले एक गिलास में पानी भरकर कुछ घंटे के लिए छोड़ दें। अगर गिलास के तले में मिट्टी बैठ जाती है तो इसका मतलब यह है कि पानी में सेडीमेंट ज्यादा है। ऐसा पानी किडनी स्टोन या पेट के संक्रमण का कारण बन सकता है।

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  • शुद्ध और नरम पानी साबुन के साथ तुरंत बहुत सारा झाग बनाते हैं। ऐसे में यदि साबुन घिसने पर झाग कम और दही जैसा सफेद ज्यादा बन रहा है तो समझ जाएं कि पानी हार्ड है। इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा भी बेहद ही ज्यादा है। साथ ही लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से स्किन की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।
  • बाजार में छोटे और सस्ते टीडीएस मीटर पाए जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मानें तो पानी का टीडीएस स्तर 50 से 150 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच होना अच्छा होता है। यदि ये 500 से ऊपर है तो ये पानी बिल्कुल सुरक्षित नहीं है।

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